नंदीग्राम उपचुनाव से पहले बंगाल में सियासी भूचाल; ममता बनर्जी के दोबारा लड़ने की अटकलें

पश्चिम बंगाल की हाई-प्रोफाइल नंदीग्राम (Nandigram) विधानसभा सीट पर 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव से पहले राज्य की राजनीति में अभूतपूर्व घमासान छिड़ गया है। शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे के बाद खाली हुई इस सीट से पूर्व मुख्यमंत्री व तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी के एक बार फिर चुनावी मैदान में उतरने को लेकर सियासी कयास तेज हो गए हैं। जानिए नंदीग्राम उपचुनाव, टीएमसी सिंबल विवाद और बंगाल के राजनीतिक घटनाक्रम पर विस्तृत रिपोर्ट।

Sep 13, 2026 - 11:46
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नंदीग्राम उपचुनाव से पहले बंगाल में सियासी भूचाल; ममता बनर्जी के दोबारा लड़ने की अटकलें

नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस की संस्थापक ममता बनर्जी के पश्चिम बंगाल विधानसभा की सदस्य के तौर पर संभावित वापसी की चर्चा जोरों पर है, जबकि अभी यह तय नहीं हुआ है कि पार्टी के मौजूदा दो गुटों में से कौन-सा गुट "असली" पार्टी है। 

चुनाव आयोग ने शनिवार को दोनों गुटों को पार्टी के असली नाम और चुनाव चिह्न पर अपना-अपना दावा पेश करने के लिए समय दिया। एक गुट ममता बनर्जी के नेतृत्व में है, जिन्हें अक्सर उनके घर के पते के कारण "कालीघाट तृणमूल" कहा जाता है और दूसरा गुट पूर्व वामपंथी नेता रिताब्रत बनर्जी के नेतृत्व में है।

दोनों गुट अगले महीने पश्चिम बंगाल की दो विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले चुनाव आयोग से मान्यता चाहते हैं। ये सीटें वहां से जीतने वाले उम्मीदवारों के इस्तीफे के बाद खाली हुई थीं।

चुनाव आयोग की हालिया सूचना के अनुसार, दोबारा मतदान 6 अक्टूबर को होगा और नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख बुधवार है।

बाबरी मस्जिद की हूबहू नकल बनाने वाले हुमायूं कबीर के इस्तीफे के बाद रेजीनगर विधानसभा सीट खाली हो गई थी (उन्होंने अपनी नावदा सीट अपने पास रखी), वहीं नंदीग्राम सीट मौजूदा मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने भवानीपुर के लिए खाली की थी।

दिलचस्प बात यह है कि 2021 में ममता बनर्जी नंदीग्राम में उनसे हार गई थीं और इसके बाद उन्हें तीसरी बार लगातार मुख्यमंत्री बनने के लिए भवानीपुर से दोबारा चुनाव लड़ना पड़ा था।

कबीर ने उन्हें रेजीनगर से चुनाव लड़ने का "न्योता" भी दिया है और दावा किया है कि वह उस सीट से उनकी जीत पक्की कर सकते हैं।

वह पहले तृणमूल कांग्रेस में थे, लेकिन पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के रेजीनगर में अयोध्या की बाबरी मस्जिद जैसी मस्जिद बनाने के विवादित फैसले के बाद उन्हें सस्पेंड कर दिया गया था।

इस बीच, रिताब्रता गुट के सदस्यों ने कहा है कि अगर ममता बनर्जी खुद चुनाव लड़ती हैं, तो वे नंदीग्राम में कोई उम्मीदवार नहीं उतारेंगे।

पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता रिताब्रता बनर्जी ने खुद इस बात का समर्थन किया, हालांकि उन्होंने मज़ाक में कहा कि अगर वह जीतती भी हैं, तो राज्य विधानसभा में दोबारा मतदान (रीपोल) के ज़रिए ही प्रवेश कर पाएंगी।

वह उनकी लगातार दो हार का जिक्र कर रहे थे, जिनमें से एक मामले में दोबारा मतदान के बाद ही उनकी जीत सुनिश्चित हो पाई थी। ममता बनर्जी या उनके खेमे ने अभी तक आगामी उपचुनाव लड़ने के बारे में कोई पक्का बयान नहीं दिया है।

हालांकि, यह लगभग तय है कि रिताब्रता गुट का उम्मीदवार न होने की स्थिति में नंदीग्राम में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को बढ़त मिलेगी। उनका गुट ममता बनर्जी-विरोधी वोटों को बांट सकता है; ऐसे में जो लोग बीजेपी का समर्थन नहीं कर रहे हैं, उनके पास पिछली तृणमूल सरकार के ख़िलाफ़ वोट देने का विकल्प होगा।

फिलहाल, इस साल चुनाव में हार, कई नेताओं, सांसदों और विधायकों के पाला बदलने, और ममता बनर्जी के भतीजे व पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी समेत कई लोगों की गिरफ़्तारी या उनके ख़िलाफ़ कानूनी कार्रवाई शुरू होने के बाद, जुझारू पूर्व मुख्यमंत्री का गुट कुछ कमज़ोर नजर आ रहा है।


इनपुट : आईएएनएस

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