पंजाब में पराली पर सख्ती: 717 घटनाएं, केस और जुर्माना दर्ज
चंडीगढ़। पंजाब में धान की कटाई के साथ ही पराली जलाने की घटनाएं बढ़ने लगी हैं। राज्य में अब तक पराली जलाने की 717 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इस पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ने निगरानी और कार्रवाई तेज कर दी है। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) की रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 664 स्थानों का निरीक्षण किया गया, जिनमें 313 जगहों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई है। इस मामले में जुर्माना लगाने, एफआईआर दर्ज करने और संबंधित खेतों के रिकॉर्ड में प्रतिकूल प्रविष्टियां करने जैसी कार्रवाई की जा रही है।
तरनतारन में सबसे ज्यादा घटनाएं दर्ज
पीपीसीबी की मंगलवार तक की जिलेवार रिपोर्ट में तरनतारन पराली जलाने की घटनाओं के मामले में सबसे आगे रहा। जिले में 318 घटनाएं दर्ज की गईं। अधिकारियों ने 299 स्थानों का निरीक्षण किया, जिनमें 152 जगहों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई।
रिपोर्ट के मुताबिक, पुष्टि किए गए 152 मामलों में पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया। इसके तहत कुल 7.80 लाख रुपये का जुर्माना निर्धारित किया गया, जिसमें से 2.65 लाख रुपये की वसूली हो चुकी है। इसके अलावा, 64 मामलों में केस दर्ज किए जाने और 152 खेतों के राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री किए जाने की जानकारी दी गई है।
अमृतसर में भी पराली जलाने के कई मामले
अमृतसर जिले में पराली जलाने की 154 घटनाएं सामने आईं। अधिकारियों ने 150 स्थानों पर जांच की, जिनमें 75 जगहों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई।
रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से 70 मामलों में पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया। कुल 3.35 लाख रुपये का जुर्माना निर्धारित किया गया, जिसमें से 2.85 लाख रुपये वसूल किए जा चुके हैं। जिले में 24 एफआईआर दर्ज की गईं और 57 खेतों के रिकॉर्ड में रेड एंट्री की गई। इसके अलावा, किसानों को जागरूक करने और पराली जलाने से रोकने के लिए 186 चेतावनी नोटिस जारी किए गए।
फिरोजपुर, गुरदासपुर और कपूरथला में भी मामले
राज्य के दूसरे जिलों में भी पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, फिरोजपुर में 42, गुरदासपुर में 47 और कपूरथला में 46 घटनाएं सामने आईं।
जांच के दौरान फिरोजपुर में 20, गुरदासपुर में 17 और कपूरथला में 15 स्थानों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई। इन आंकड़ों के बीच प्रशासन के सामने किसानों को फसल अवशेषों के वैकल्पिक प्रबंधन के लिए प्रोत्साहित करने और खेतों में आग लगाने की घटनाओं पर नियंत्रण रखने की चुनौती बनी हुई है।
किसानों की मदद के लिए शुरू हुई टेलीफोन हेल्पलाइन
पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण को कम करने के लिए किसानों को फसल अवशेषों के प्रबंधन के व्यावहारिक विकल्प उपलब्ध कराने की पहल भी की गई है।
क्लीन एयर पंजाब, एयरकेयर सेंटर और सांझ पंजाब से जुड़ी पहल के तहत सांझा मित्तर किसान सहायता केंद्र ने किसानों के लिए एक टेलीफोन हेल्पलाइन शुरू की है। इसका उद्देश्य किसानों को पराली जलाने के बजाय उसके उचित प्रबंधन से जुड़े विकल्पों के बारे में जानकारी देना और जरूरत के अनुसार मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है।
हेल्पलाइन नंबर: +91 79737 27514 समय: सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक उपलब्ध है।
(समाचार एजेंसी आईएएनएस के इनपुट के साथ)
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