'भारत के मुसलमानों को अपने लिए अलग देश की मांग करनी चाहिए'
अंकारा। भारत के मुसलमानों को हिंदू शासन की 'बेड़ियों' को तोड़ देना चाहिए और अपने लिए अलग आजाद देश की मांग करनी चाहिए। इस तरह की उकसाने वाली बात तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयब एर्दोगन और पाकिस्तान के चीफ ऑफ़ डिफेन्स फोर्सेज (सीडीएफ) सैयद आसिम मुनीर अहमद शाह कर रहे हैं। ऐसा दावा एक वेबसाइट ने अपनी रिपोर्ट में किया है। वेबसाइट के अनुसार तुर्की और पाकिस्तान इस बात पर जोर दे रहे हैं कि भारत के मुसलमानों को हिंदू शासन की 'बेड़ियों' को तोड़ देना चाहिए और अपने लिए एक अलग आजाद देश की मांग करनी चाहिए।
भारत में मुसलमानों को विद्रोह के लिए उकसा रहे तुर्की के खलीफा, पाकिस्तान के सीडीएफ आसिम मुनीर
जिहादवॉच वेबसाइट के अनुसार, तुर्की चाहता है कि भारत के 20 करोड़ मुसलमानों को या तो पड़ोसी मुस्लिम राष्ट्रों में शामिल होने की अनुमति दी जाए या फिर उन्हें अपना एक अलग देश बनाने दिया जाए। एक अमेरिकी टिप्पणीकार माइकल रुबिन ने हाल में संडे गार्जियन में 'क्या भारत को सांप्रदायिक गृहयुद्ध का सामना करना पड़ सकता है' शीर्षक से लिखे लेख में इस मुद्दे पर बात की है।
तुर्की और पाकिस्तान का रुख
पाकिस्तान और तुर्की की इस्लामी विचारधारा में यह बात छिपी है कि भारतीय मुसलमानों को गैर-मुस्लिम शासन में नहीं रहना चाहिए। अगस्त 2019 में पाकिस्तान के उस समय के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा था कि जिन्ना ने दो-राष्ट्र सिद्धांत दिया ताकि भारत के मुसलमानों को अलग देश मिले। बीते साल आसिम मुनीर ने कहा था कि हिंदू और मुसलमान जीवन के हर पहलू में अलग और पूरी तरह दो राष्ट्र हैं।
पाकिस्तान और तुर्की ने बार-बार कश्मीर से परे जाकर अपनी सांप्रदायिक महत्वाकांक्षाओं के साफ संकेत दिए हैं। 2019 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में तुर्की के राष्ट्रपति तैयब एर्दोआन ने मंच से सवाल किया था कि भारत में हम उन मुस्लिम युवाओं की रक्षा कैसे करेंगे, जिन्हें सिर्फ बीफ खाने के कारण मारा जा रहा है और यहां तक कि मौत की सजा भी दी जा रही है।
भारत पर एर्दोगन की बयानबाजी
साल 2029 में अपनी ही राजनीतिक पार्टी के युवा कार्यकर्ताओं से बात करते हुए एर्दोगन ने हिंदू शासन के तहत रह रहे मुसलमानों की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि भारत एक ऐसा देश बन गया है, जहां बड़े पैमाने पर नरसंहार हो रहे हैं। ये नरसंहार मुसलमानों के हो रह हैं और हिंदू कर रहे हैं। एर्दोगन ने भारत में मुसलमानों के हिंदुओं पर हमलों का जिक्र नहीं किया।
मुनीर और एर्दोगन की शिकायतों में विडंबना यह है कि पाकिस्तान और तुर्की दोनों ही सहिष्णुता के बिल्कुल विपरीत हैं। पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों- ईसाइयों और हिंदुओं को लगातार दंगों और ईशनिंदा कानूनों के दुर्भावनापूर्ण इस्तेमाल का सामना करना पड़ा है। वहीं तुर्की के मौजूदा शासन ने भी कई मौकों पर अपनी कट्टरपंथी छवि को पेश किया है।
इंटरनेट का हो रहा इस्तेमाल
रिपोर्ट दावा करती है कि तुर्की और पाकिस्तान के नेता भारत के मुसलमानों को हिंदुओं के खिलाफ खड़े होने के लिए उकसा रहे हैं। भारत में 20 करोड़ से ज्यादा मुसलमान हैं। इंटरनेट के जरिए इस आबादी के बीच भड़काने वाली सामग्री पहुंचाई जा रही है। इनकी कोशिश है कि भारत में मुसलमान सड़कों पर उतर जाएं।
भारत के करोड़ों मुसलमान को व्यवस्था को उखाड़ फेंकने के लिए कहा जा रहा है। ऐसा उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे सटे हुए राज्यों में संभाव हो सकता है। वे या तो मुसलमानों के नियंत्रण वाले स्टेट बना सकते हैं या फिर किसी मुस्लिम देश में शामिल हो सकते हैं। तुर्की और पाकिस्तान की कोशिश अब एक वास्तविक खतरा है।
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