बढ़े मुआवजे की मांग पर किसानों का हल्लाबोल
मेरठ में वेदव्यासपुरी, गंगानगर और लोहियानगर योजना से जुड़े किसानों ने किया प्रदर्शन, महिलाओं ने भजन गाकर जताया विरोध
2015 के समझौते को लागू करने की मांग, किसानों ने कहा- मांग पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन
मेरठ। बढ़े हुए प्रतिकर (मुआवजे) की मांग को लेकर सोमवार को किसानों ने मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) कार्यालय पर जमकर हंगामा किया। वेदव्यासपुरी, गंगानगर और लोहियानगर योजना से जुड़े किसानों ने मेडा परिसर में धरना-प्रदर्शन करते हुए अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी की। किसान देर रात तक कार्यालय परिसर में डटे रहे। इस दौरान महिलाओं ने भजन गाकर अपना विरोध दर्ज कराया। वहीं, धरना स्थल पर किसानों ने खुद ही खाने की व्यवस्था भी की।
पुलिस ने किसानों को रोकने की कोशिश की, मेडा परिसर में हुआ हंगामा
प्रदर्शन से पहले ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से आ रहे किसानों को पुलिस ने पुठा रोड पर रोकने की कोशिश की। इसका किसानों ने विरोध किया। इसके बाद किसान इंडियन ऑयल डिपो के पास पुठा रोड पर धरने पर बैठ गए और मेडा के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। कुछ देर बाद किसान मेडा कार्यालय पहुंचे। यहां पुलिस ने कार्यालय का मुख्य गेट बंद कर दिया। किसानों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। हालांकि, कुछ देर बाद किसानों की भीड़ और हंगामे के चलते गेट खोल दिया गया। इसके बाद किसानों ने मेडा परिसर में धरना शुरू कर दिया, जो देर रात तक जारी रहा।
2015 के समझौते के अनुसार बढ़ा प्रतिकर देने की मांग
संयुक्त किसान संघर्ष समिति के किसानों का कहना है कि वर्ष 1987 में वेदव्यासपुरी, गंगानगर और लोहियानगर के लिए करीब 615 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया था। सरकार की ओर से किसानों को मुआवजा दिया गया, लेकिन अब जमीनों के रेट काफी बढ़ चुके हैं। किसानों का आरोप है कि वर्ष 2015 में मेडा अधिकारियों के साथ हुए समझौते के तहत बढ़े हुए प्रतिकर के अनुसार प्लॉट या मुआवजा देने की बात तय हुई थी। इसके बावजूद उनकी मांगों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
किसानों का कहना है कि शताब्दीनगर की तर्ज पर अन्य योजनाओं के प्रभावित किसानों की समस्याएं भी सुनी जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।
सचिव ने दिया बातचीत का भरोसा, लेकिन किसान नहीं माने
मेडा सचिव ब्रजेश सिंह किसानों को समझाने के लिए धरनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि किसानों की समस्या के समाधान के लिए विकास प्राधिकरण में कई बार मंथन हो चुका है। मामला प्रशासन के संज्ञान में भी है और इस पर निर्णय शासन स्तर से ही होना है। अधिकारियों की ओर से बातचीत का
भरोसा दिए जाने के बावजूद किसान अपनी मांगों पर अड़े रहे।किसानों ने साफ कहा कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। उन्हें बढ़े हुए प्रतिकर का लाभ मिलने तक उनका धरना और आंदोलन जारी रहेगा।
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