दिल्ली-एनसीआर में ग्रैप-2 लागू: 50% वर्क फ्रॉम होम, पार्किंग महंगी
दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम में बिगड़ती हवा ने बढ़ाई चिंता, सरकारी और निजी दफ्तरों में 50% वर्क फ्रॉम होम का निर्देश; पार्किंग महंगी और जनरेटर के इस्तेमाल पर भी पाबंदी
नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में लगातार बिगड़ती हवा ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राजधानी से लेकर नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम तक प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्थिति में पहुंचने के बाद ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान का दूसरा चरण लागू कर दिया गया है। इसके तहत सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 फीसदी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम देने, वाहनों के इस्तेमाल को कम करने और प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों पर सख्ती करने जैसे कदम उठाए गए हैं। इसके अलावा सड़कों की सफाई, पानी के छिड़काव और निर्माण गतिविधियों पर भी निगरानी बढ़ाई जाएगी।
कई इलाकों में 400 के पार पहुंचा एक्यूआई
प्रदूषण की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स 400 के पार दर्ज किया गया। 3 नवंबर को दिल्ली का औसत एक्यूआई 331 तक पहुंच गया था।
वहीं, अलग-अलग इलाकों की स्थिति और भी चिंताजनक रही। जहांगीरपुरी में एक्यूआई 450, पंजाबी बाग में 424 और बवाना में 408 दर्ज किया गया। गाजियाबाद में यह आंकड़ा 499, ग्रेटर नोएडा में 458 और नोएडा में 450 तक पहुंच गया।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली के 58 निगरानी केंद्रों में से 41 पर एक्यूआई 300 से ऊपर रहा।
ऑफिस जाने वालों पर भी पड़ेगा असर, 50% वर्क फ्रॉम होम
ग्रैप-2 के तहत सरकारी और निजी संस्थानों में कर्मचारियों को घर से काम करने की सुविधा देने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत 50 फीसदी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम देने की व्यवस्था लागू की गई है।
इसके अलावा दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में सरकारी कार्यालयों, नगर निगमों और औद्योगिक इकाइयों के कामकाज की टाइमिंग में बदलाव करने की बात कही गई है। अलग-अलग शिफ्ट निर्धारित करने का उद्देश्य एक ही समय पर सड़कों पर वाहनों की भीड़ कम करना है।
डीजल जनरेटर से लेकर तंदूर तक पर पाबंदी
प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए डीजल जनरेटर के इस्तेमाल को लेकर भी सख्ती की गई है। अस्पताल, रेलवे स्टेशन, हवाई अड्डे और आपातकालीन सेवाओं जैसी जरूरी सुविधाओं को छूट देते हुए अन्य स्थानों पर डीजल जनरेटर के संचालन पर प्रतिबंध लगाया गया है। निर्धारित नियमों के तहत गैस, पीएनजी, एलपीजी और बायोगैस से चलने वाले जनरेटर इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
होटल, ढाबों और रेस्टोरेंट में कोयले और लकड़ी से चलने वाले तंदूरों के इस्तेमाल पर भी रोक लगाई गई है। इनके स्थान पर गैस या इलेक्ट्रिक तंदूर का उपयोग करना होगा।
इसके साथ ही खुले में कूड़ा, प्लास्टिक और सूखी पत्तियां जलाने पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पार्किंग शुल्क बढ़ेगा, मेट्रो लगाएगी अतिरिक्त फेरे
सड़कों पर निजी वाहनों की संख्या घटाने के लिए पार्किंग शुल्क बढ़ाने का फैसला किया गया है। इसके तहत दिल्ली-एनसीआर में पार्किंग फीस दोगुनी तक की जा सकती है।
वहीं, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली मेट्रो ने 3 नवंबर से कामकाजी दिनों में रोजाना 40 अतिरिक्त फेरे चलाने की व्यवस्था की है। इससे यात्रियों को सफर के लिए ज्यादा विकल्प मिलेंगे और निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
पुराने वाहनों और निर्माण कार्यों पर भी निगरानी
प्रदूषण नियंत्रण के लिए पुराने वाहनों पर लागू नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। दिल्ली में 10 साल से पुराने डीजल और 15 साल से पुराने पेट्रोल वाहनों के संचालन पर पहले से प्रतिबंध है।
इसके अलावा दिल्ली के बाहर से आने वाले निर्धारित बीएस-6 और उससे नीचे के मानकों वाले पेट्रोल-डीजल वाहनों के प्रवेश पर भी पाबंदी का प्रावधान बताया गया है। इलेक्ट्रिक, सीएनजी और बीएस-6 वाहनों को छूट दी गई है।
निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल को रोकने के लिए भी विशेष इंतजाम किए जाएंगे। दी गई जानकारी के मुताबिक, 500 वर्ग मीटर या उससे अधिक क्षेत्र वाले निर्माण स्थलों पर 5 नवंबर से 20 नवंबर तक काम रोकने का निर्देश है। निर्माण स्थलों पर एंटी-स्मॉग गन, धूल रोकने वाली जालियां और पानी के छिड़काव की व्यवस्था अनिवार्य होगी।
नगर निगम और आरडब्ल्यूए की भी बढ़ेगी जिम्मेदारी
प्रदूषण से निपटने के लिए नगर निगमों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन को भी सक्रिय भूमिका निभाने को कहा गया है।
- प्रमुख सड़कों पर रोजाना मैकेनिकल और वैक्यूम स्वीपिंग कराई जाएगी।
- धूल कम करने के लिए पानी का नियमित छिड़काव होगा।
- प्रदूषण के हॉटस्पॉट वाले इलाकों में विशेष निगरानी रखी जाएगी।
- खुले में कचरा जलाने और अवैध पार्किंग पर नजर रखी जाएगी।
- सफाई मशीनों की शिफ्ट और काम करने के घंटे बढ़ाए जाएंगे।
आम नागरिक भी 311, ग्रीन दिल्ली और समीर ऐप के माध्यम से प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों की शिकायत कर सकते हैं।
प्रदूषण और बढ़ा तो लागू हो सकती हैं और सख्त पाबंदियां
ग्रैप के दूसरे चरण के तहत फिलहाल प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों पर नियंत्रण के लिए कदम उठाए गए हैं। हालांकि, यदि हवा की गुणवत्ता में और गिरावट आती है तो अगले चरणों में निर्माण गतिविधियों, औद्योगिक इकाइयों और अन्य प्रदूषणकारी गतिविधियों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
ऐसे में दिल्ली-एनसीआर के लोगों को आने वाले दिनों में परिवहन, ऑफिस और रोजमर्रा की गतिविधियों में कई बदलावों का सामना करना पड़ सकता है।
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