फिर चालबाजी कर रहा चीन: अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में चीनी सैनिकों की मौजूदगी से बढ़ी चिंता, सियासी हलचल तेज

Arunachal Pradesh में भारत-चीन की सीमा पर कई जगहों पर चीनी सैनिकों के साथ आमना-सामना चल रहा है। यह बात ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने 22 अक्टूबर को ITBP के 65वें स्थापना दिवस से पहले आयोजित एक सम्मान समारोह के दौरान अपने जवानों को संबोधित करते हुए कही।

Oct 24, 2026 - 11:12
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फिर चालबाजी कर रहा चीन: अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में चीनी सैनिकों की मौजूदगी से बढ़ी चिंता, सियासी हलचल तेज
ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर।

- जुलाई से LAC पर आमने-सामने भारत-चीन की सेना.

India-China Border News: भारत-चीन सीमा पर तनाव के बीच अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में चीनी सैनिकों की मौजूदगी को लेकर सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं। ITBP प्रमुख के बयान पर विपक्ष ने सरकार को घेरा, वहीं MEA ने कहा कि चीनी सेना के नियम तोड़ने से स्थिति बिगड़ती है। सवाल यह है कि दोनों देशों के बीच हुए समझौतों के बावजूद सीमा पर तनाव कब खत्म होगा?

अरुणाचल प्रदेश में India-China की Border पर कई जगहों पर चीनी सैनिकों के साथ आमना-सामना चल रहा है। यह बात ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने 22 अक्टूबर को ITBP के 65वें स्थापना दिवस से पहले आयोजित एक सम्मान समारोह के दौरान अपने जवानों को संबोधित करते हुए कही।

भारत-चीन सीमा पर तनाव के बीच अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में चीनी सैनिकों की मौजूदगी को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर के बयान के बाद विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है. अरुणाचल के कुछ इलाकों में जुलाई से ही भारतीय और चीनी सैनिक आमने-सामने हैं. इनमें असफिला जैसे संवेदनशील क्षेत्र भी शामिल हैं, जहां चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के सैनिक भारतीय पक्ष की ओर से समझी जाने वाली वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से महज छह-सात किलोमीटर दूर तंबू लगाए हुए हैं।

राजस्थान के अलवर में जवानों को संबोधित करते हुए शत्रुजीत सिंह कपूर ने सीमावर्ती क्षेत्रों में जारी स्थिति का जिक्र किया. उनका यह बयान इसलिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे अरुणाचल प्रदेश में लंबे समय से बनी सैन्य तनातनी पर चर्चा फिर तेज हो गई है. एलएसी पर दोनों देशों के बीच सीमा की धारणा को लेकर पहले से मतभेद रहे हैं. ऐसे में भारतीय सीमा के नजदीक चीनी सैनिकों की मौजूदगी सुरक्षा एजेंसियों के लिए सतर्कता का विषय है.

चीन के सामने पुराने युद्धकौशल बेअसर

ITBP अब चीन से लगी 3,488 किलोमीटर लंबी एलएसी की सुरक्षा के लिए आधुनिक युद्धकौशल पर जोर दे रही है. 1962 में गठित इस बल के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने चीन को भारत का सबसे बड़ा विरोधी बताते हुए कहा कि पारंपरिक युद्ध के तरीके अब पुराने पड़ चुके हैं.

Arunachal Pradesh के कई इलाकों में चीनी सैनिकों के साथ जारी आमने-सामने की स्थिति के बीच कपूर ने शौर्य कमांडो प्लाटून की तारीफ की. उन्होंने बताया कि इन कमांडो को अब ITBP की हर बॉर्डर बटालियन में शामिल किया जाएगा. यह कदम सीमा पर अचानक पैदा होने वाली तनावपूर्ण परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने की तैयारी का हिस्सा है.

शौर्य कमांडो को गलवान घाटी जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया है. जून 2020 में गलवान में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे. उस दौरान चीनी सैनिकों पर पत्थरों, नुकीले डंडों और लोहे की छड़ों से हमला करने के आरोप लगे थे. चीन ने अपने पक्ष के चार सैनिकों की मौत की पुष्टि की थी, जबकि कुछ अन्य रिपोर्टों में चीनी पक्ष के नुकसान का आंकड़ा अधिक बताया गया था. 

ड्रोन अब चुनौती भी हैं और अवसर भी

ITBP महानिदेशक ने यूक्रेन-रूस युद्ध और ईरान-अमेरिका संघर्ष का उदाहरण देते हुए बताया कि आज के समय में ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक कितनी महत्वपूर्ण हो गई है. उन्होंने कहा कि रूस जैसा बड़ा देश और महाशक्ति भी यूक्रेन के खिलाफ लड़ते हुए हर महीने दस से पंद्रह हजार सैनिक खो रहा है. 

यह चौथे साल भी जारी है, जबकि रूस सोचता था कि एक-दो महीने में काम हो जाएगा. इसी तरह ईरान ने बिना पारंपरिक वायुसेना, नौसेना या सेना के अमेरिकी महाशक्ति को चुनौती दी. इन उदाहरणों से साफ है कि पारंपरिक सेनाओं की भूमिका बदल चुकी है. महानिदेशक ने जोर देकर कहा कि ड्रोन अब चुनौती भी हैं और अवसर भी. 

चीन ने अपनी पीएलए को बहुत आधुनिक बना लिया है और भारी निवेश किया है, इसलिए पारंपरिक तरीकों से मुकाबला मुश्किल है. लेकिन ड्रोन ऐसी तकनीक है जिससे छोटा देश भी बड़े देश को मुंहतोड़ जवाब दे सकता है. इसी सोच के साथ आईटीबीपी ने हर सीमा सुरक्षा बटालियन में ड्रोन प्लाटून तैयार कर ली है. 

लगभग 95,000 कर्मियों वाली यह बल पहाड़ी युद्ध में प्रशिक्षित है. सरकार से मिले 400 करोड़ रुपये के फंड में से 70 प्रतिशत हिस्सा ड्रोन युद्ध क्षमताओं को बढ़ाने में लगाया जा रहा है. होम मिनिस्ट्री ने सिद्धांत रूप में 4000 करोड़ रुपये की बड़ी आधुनिकीकरण योजना को मंजूरी दी है, जिसमें से 1000 करोड़ रुपये सिर्फ ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम के लिए रखे जाएंगे. ITBP अब खुद ड्रोन बना रहा है ताकि बाहरी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम हो. 

ड्रोन पायलटों की ट्रेनिंग भी जोर-शोर से चल रही है. यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आधुनिक युद्ध में हवा से निगरानी, हमला और बचाव तीनों में ड्रोन की भूमिका बढ़ गई है. अरुणाचल जैसे दुर्गम इलाकों में जहां सड़कें कम हैं और मौसम कठोर है, ड्रोन से तुरंत जानकारी मिल सकती है और जवाबी कार्रवाई तेज हो सकती है.

स्ट्राइक कोर्स और शौर्य कमांडो

आईटीबीपी ने ‘स्ट्राइक’ नाम का एक नया कोर्स तैयार किया है, जो गलवान जैसी स्थितियों से निपटने के लिए बनाया गया है. अब तक करीब दस हजार जवानों को यह ट्रेनिंग दी जा चुकी है और 330 मास्टर ट्रेनर तैयार किए गए हैं. पूरा बल 2027 के अंत तक इस ट्रेनिंग से गुजरेगा. यह कोर्स सिर्फ शारीरिक ताकत नहीं, बल्कि मानसिक तैयारियों, क्लोज कॉम्बैट और आधुनिक हथियारों के इस्तेमाल पर जोर देता है. 

इसके अलावा शौर्य कमांडो टीम बनाई गई है, जिसने अरुणाचल में जारी फेस-ऑफ के दौरान अपनी क्षमता दिखाई. ये कमांडो हर बॉर्डर बटालियन में तैनात होंगे. महानिदेशक ने कहा कि चीन मोर्चा सबसे कठिन सीमा है और वहां पारंपरिक तरीकों से काम नहीं चलेगा. इसलिए आईटीबीपी को विशेष हाई-एल्टीट्यूड मांउटेन लड़ाकू बल बनाने की योजना बनाई गई है.

पुराने हथियारों को भी बदला जा रहा है, जिनमें से कुछ पचास साल पुराने हैं. नई ऑल-ट्रेन वाहन, ग्राउंड वाहन और क्विक रिएक्शन वाहन खरीदे जा रहे हैं ताकि दुर्गम इलाकों में तेजी से पहुंच बनाई जा सके. ‘कोल्ड स्टार्ट किट’ दी गई है, जिससे बर्फीले मौसम में वाहन एक क्रैंक में चालू हो जाते हैं. यह अनुभव कोसोवो मिशन से लिया गया था, जहां सब-जीरो तापमान में वाहन आसानी से स्टार्ट होते थे.

यह पूरा मामला सिर्फ सैन्य तैयारियों का नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक संदेश का भी है. भारत यह दिखा रहा है कि वह अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए किसी भी स्तर की तैयारी करने को तैयार है. महानिदेशक शत्रुजीत कपूर, जो 31 अक्टूबर को रिटायर होने वाले हैं, ने अपने अंतिम दिनों में इन बड़े ऐलानों से आईटीबीपी को नई दिशा दी है.

समझौतों के बावजूद विवाद खत्म नहीं

Arunachal Pradesh में LAC की लंबाई करीब 1,126 किलोमीटर मानी जाती है. भारत और चीन के बीच LAC का पूरा सीमांकन नहीं हुआ है, इसलिए कई जगह दोनों देशों की धारणा अलग-अलग है कि सीमा कहां से गुजरती है. इसी वजह से गश्त के दौरान सैनिकों के आमने-सामने आने और टकराव की घटनाएं होती रही हैं. 2020 के गलवान संघर्ष के बाद सीमा पर तनाव और सुरक्षा व्यवस्था दोनों देशों के लिए प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं. 

2020 में गलवान घाटी की घातक झड़पों और उसके बाद चार साल से अधिक समय तक चले सैन्य टकराव के कारण भारत और चीन के संबंधों में भारी तनाव आ गया था. इस तनाव के बाद, अपने रिश्तों को फिर से सुधारने के लिए दोनों देशों ने पिछले एक साल से अधिक समय में कई कदम उठाए हैं.

  • अक्टूबर 2024 में दोनों पक्षों ने पूर्वी लद्दाख के आखिरी दो विवादित बिंदुओं - डेपसांग और डेमचोक - से सेना पीछे हटाने के लिए एक समझौते को अंतिम रूप दिया.
  • इस समझौते के कुछ दिनों बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कज़ान में बातचीत की और संबंधों को बेहतर बनाने के लिए कई फैसले लिए.
  • पिछले साल अगस्त में प्रधानमंत्री मोदी वार्षिक SCO शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन के तियानजिन शहर गए थे. वहां, मोदी और शी के बीच विस्तृत बातचीत हुई.
  • पिछले महीने नई दिल्ली में ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के दौरान PM मोदी ने शी के साथ द्विपक्षीय बातचीत की.

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