यूरोप में युवाओं का विद्रोह! फ्रांस से जर्मनी तक सड़कों पर उतरी जेन ज़ी
नई दिल्ली। यूरोप के कई देशों में युवाओं का गुस्सा अब सड़कों पर दिखाई देने लगा है। शिक्षा, बेरोजगारी, महंगाई, जलवायु संकट और सरकार की नीतियों के खिलाफ हजारों युवा प्रदर्शन कर रहे हैं। फ्रांस, जर्मनी, पुर्तगाल और नीदरलैंड में युवाओं ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए। हालांकि, इन देशों में आंदोलन का स्वरूप अलग-अलग रहा। फ्रांस में प्रदर्शन काफी हद तक शांतिपूर्ण रहे, जबकि जर्मनी के कई शहरों में हिंसा, तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाएं सामने आईं।
फ्रांस में लगातार तीसरे शनिवार युवाओं और विभिन्न संगठनों ने सड़कों पर उतरकर राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई। वहीं जर्मनी में 'जेन-जी रीगेल्ट' यानी 'जेन-जी संभाल लेंगे' के नारे के साथ 30 शहरों में प्रदर्शन हुए। पुर्तगाल और नीदरलैंड में भी हजारों युवाओं ने आंदोलन में हिस्सा लिया।
फ्रांस में 3.20 लाख प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे, 70 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात
फ्रांस में युवाओं के प्रदर्शन का असर देश के कई शहरों में दिखाई दिया। सरकार के अनुमान के मुताबिक, देशभर में करीब 3.20 लाख लोगों ने विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
हैलोवीन के मौके पर कई प्रदर्शनकारी डरावनी पोशाकें पहनकर सड़कों पर पहुंचे। पुलिस को आशंका थी कि इन पोशाकों की वजह से हिंसा करने वालों की पहचान करना मुश्किल हो सकता है।
फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए करीब 70 हजार सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था। शहरों की निगरानी के लिए हेलीकॉप्टरों की भी मदद ली गई।
प्रदर्शन में छात्र, जलवायु कार्यकर्ता, मजदूर संगठन और महंगाई से परेशान आम नागरिक शामिल हुए। लोगों ने सरकार की नीतियों और राष्ट्रपति मैक्रों के खिलाफ नारेबाजी की।
फ्रांस में देर रात हिंसा, पुलिस ने 560 लोगों को किया गिरफ्तार
दिन में प्रदर्शन काफी हद तक शांतिपूर्ण रहे, लेकिन देर शाम कुछ स्थानों पर हालात बिगड़ गए। प्रदर्शनकारियों के कुछ समूहों ने पुलिस पर बोतलें और पटाखे फेंके।
इसके जवाब में पुलिस ने आंसू गैस और स्टन ग्रेनेड का इस्तेमाल किया। देर रात तक करीब 560 लोगों की गिरफ्तारी की खबर सामने आई।
पुलिस ने पूरे देश में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी, ताकि प्रदर्शन के दौरान हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं पर नियंत्रण किया जा सके।
जर्मनी में 30 शहरों में प्रदर्शन, फ्रैंकफर्ट में 17 दुकानों में लूटपाट
जर्मनी में युवाओं का आंदोलन 'जेन-जी रीगेल्ट' के बैनर तले आयोजित किया गया। इसके तहत करीब 30 शहरों में प्रदर्शन हुए।
युवाओं ने शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार, जलवायु संरक्षण और जीवनयापन की लागत कम करने की मांग उठाई। इसके अलावा अनिवार्य सैन्य सेवा की वापसी का भी विरोध किया गया।
हालांकि, फ्रैंकफर्ट में प्रदर्शन के दौरान हालात हिंसक हो गए। उपद्रवियों ने 17 दुकानों में तोड़फोड़ और लूटपाट की। एक बंदूक की दुकान से कई हथियार भी उठा लिए गए। पुलिस ने बाद में हथियार जब्त करने का दावा किया।
हिंसा के दौरान 100 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए। कोलोन और हैंबर्ग में भी प्रदर्शनकारियों की ओर से पटाखे, पत्थर और पेट्रोल बम फेंके जाने की खबरें सामने आईं।
हालात नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने पानी की बौछार और आंसू गैस का इस्तेमाल किया।
पुर्तगाल में हजारों युवा सड़कों पर, टेंट हटाने पहुंची पुलिस
पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में भी युवाओं और दूसरे प्रदर्शनकारियों ने बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरकर विरोध जताया।
प्रदर्शन के बाद पुलिस ने रोसियो स्क्वायर में लगाए गए 50 से अधिक टेंट हटा दिए। इस दौरान पुलिस कार्रवाई, लाठीचार्ज और गिरफ्तारियों की भी खबरें सामने आईं।
प्रदर्शनकारियों की मांगों को लेकर सरकार और प्रशासन पर दबाव बढ़ता दिखाई दिया।
नीदरलैंड में भी युवाओं का प्रदर्शन, ज्यादातर जगह शांतिपूर्ण रहा आंदोलन
नीदरलैंड में भी हजारों युवाओं ने विभिन्न मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। यहां पुलिस ने सुरक्षा और निगरानी के व्यापक इंतजाम किए थे।
फ्रांस और जर्मनी के मुकाबले नीदरलैंड में प्रदर्शन ज्यादातर शांतिपूर्ण रहे। युवाओं ने अपनी मांगों को लेकर रैलियां निकालीं और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।
आखिर क्यों सड़कों पर उतर रही है यूरोप की जेन ज़ी?
यूरोप के अलग-अलग देशों में हुए इन प्रदर्शनों के पीछे कई मुद्दे हैं। युवाओं की प्रमुख चिंताओं में शामिल हैं:
- महंगाई और महंगा जीवनयापन: बढ़ते खर्च के कारण युवाओं के लिए घर, शिक्षा और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना चुनौती बन रहा है।
- बेरोजगारी और शिक्षा: बेहतर रोजगार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अवसरों की मांग उठ रही है।
- जलवायु परिवर्तन: युवा पर्यावरण संरक्षण और जलवायु से जुड़ी प्रभावी नीतियां चाहते हैं।
- सरकारी नीतियां: कई देशों में सरकार के फैसलों और राजनीतिक नेतृत्व के खिलाफ नाराजगी देखने को मिल रही है।
- अनिवार्य सैन्य सेवा: जर्मनी में युवाओं ने सैन्य सेवा की अनिवार्यता वापस लाने के प्रस्ताव का विरोध किया।
यूरोप के चार देशों में एक साथ दिखाई दे रहे इन आंदोलनों ने युवाओं की आर्थिक और सामाजिक चिंताओं को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। हालांकि, हर देश में प्रदर्शन के मुद्दे और उनका स्वरूप अलग है। फ्रांस में बड़े पैमाने पर विरोध के बावजूद ज्यादातर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, जबकि जर्मनी में कुछ स्थानों पर हिंसा ने आंदोलन को गंभीर रूप दे दिया।
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