रात में बड़ी खामोशी से चला गया कड़ियल जुबां में बोलने वाला एंग्री कॉमन मैन

अपने तल्ख संवादों से आम आदमी के दब्बूपने और कायरता को झिंझोड़ने वाले कलाकार नाना पाटेकर रात को बड़ी खामोशी के साथ चले गए। थिएटर से ताल्लुक रखने वाले, दिल से गंवई, खांटी देसी अंदाज पसंद करने वाले इस कलाकार को बॉलीवुड की चकाचौंध कभी प्रभावित नहीं कर पाई। एक कलाकार के साथ महाराष्ट्र और देश नाना को एक बड़े समाजसेवक के तौर पर भी याद करेगा। खेती-बाड़ी तबाह होने पर महाराष्ट्र के हजारों किसान परिवारों को नाना ने बड़े संवेदनशील तरीके से मदद पहुंचाई थी।
बॉलीवुड में 1973 में एक आंधी उठी और वह पूरे मुल्क में छा गई। यह एक ऐसे हीरो की आवाज थी जो बला की हद तक गुस्सैल था। कानून को बहुधा हाथ में लेता था और जुल्म का प्रतिकार जुल्मियों की ही जुबां में करता था। कहने को तो फिल्म का नाम जंजीर था लेकिन उसने हर तरह की बंदिश तोड़ने वाला एक अभिनेता को जन्म दिया जिसे हम लोग अमिताभ बच्चन के तौर पर जानते हैं। उस किरदार को नाम मिला एंग्री यंग मैन। अगले डेढ़-दो दशक यह एंग्री मैन तबके जेन जी ही नहीं, आम लोगों के दिलो-दिमाग पर छाया हुआ था।
लेकिन हर अभिनेता का एक दौर होता है। एंग्री यंग मैन का गुस्सा भी अपनी ढलती उम्र के साथ ढलान पर था। आम आदमी को नई समस्याओं ने घेरा था। भ्रष्टाचार के अलावा, सांप्रदायिकता, जात-पात ने भी बुरी तरह जकड़ लिया था। 1987 में लोगों ने प्रतिघात फिल्म में एक ऐसे अभिनेता को देखा जो फिल्म में तो पुलिस वाला बना था, लेकिन गुंडा-माफिया और सियासतदां से त्रस्त। कानून का इस रखवाले ने खुद कानून को हाथ में लेकर जिस तरह जुल्म ढाने वालों पर प्रतिघात किया उससे वह आम लोगों के मनःमस्तिष्क पर छा गया।
इसके बाद लोगों ने उसे मेहुल कुमार की फिल्म क्रांतिवीर में आम लोगों की कायरता, दब्बूपने व सांप्रदायिकता को झिंझोड़ता और लताड़ता एक ऐसा शख्स देखा जो गुस्सैल होने के साथ मुंहफट भी था। जो पत्थर से अपना और दूसरे का हाथ कुचलकर चुनौती दे रहा था कि कहां फर्क है हिंदू खून और मुस्लिम खून में। यह क्रांतिवीर लोगों के दिल में बस गया।
नाना ने अमिताभ बच्चन व अमरीशपुरी से लेकर कई फिल्मी सितारों के साथ काम किया। अपने दमदार अभिनय और संवादों से नाना हमेशा अपने सामने के कलाकारों पर भारी पड़े। उनके कई डायलाग आम आदमी की जुबां पर मुहावरे की तरह चढ़े हुए हैं।
थोड़ा रूमानी हो जाएं में अनूठे किरदार में दिखे थे नाना
अमोल पालेकर की फिल्म थोड़ा रूमानी हो जाएं में अपनी छवि से इतर अलग ही अंदाज में नाना दिखे थे। सपने बेचने वाले एक कवि हृदय किरदार में। एक ऐसा शख्स जो लोगों के दुख खरीदकर उनके होठों पर हंसी लाने का काम करता है। मुर्झाए चेहरों और मायूस निगाहों को उम्मीद की नई रोशनी देता है। इस फिल्म में उनके द्वारा बोली गई बारिश वाली कविता लोगों को खूब भाई थी। केबीसी में अमिताभ बच्चन के सामने हॉट सीट पर बैठकर नाना ने अपने मन और दिल की बात बताई थी। उनका मन ठेठ गंवई था।
मराठी संस्कृति के बड़े संवाहक थे नाना
सिर पर मराठी टोपी, कंधे पर अंगोछा, आधी बाजू की कमीज पहने नाना मराठी संस्कृति के बड़े हिमायती थे। जमीन पर रखे लकड़ी के पीढ़े पर बैठकर कांसे के चौड़े पाट वाली थाली में भोजन करना उन्हें पसंद था। बॉलीवुड की चमक-दमक में उनका मराठीपन ताउम्र कायम रहा। नाना को पद्म, फिल्मफेयर जैसे अनेक सम्मान और पुरस्कार मिले। लेकिन आम दर्शकों के दिलों में उन्होंने जो जगह बनाई , वैसा उदाहरण बहुत कम देखने को मिलता है। इस एंग्री कॉमन मैन को सिनेमाप्रेमी बरसों-बरस याद रखेंगे।
- ( लेखिका स्वतंत्र पत्रकार हैं )
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