बिहार : गयाजी में पितृपक्ष की आस्था अब पर्यावरण से जुड़ी, पितृवाटिका में ‘एक पेड़ पूर्वजों के नाम’ की पहल

Sep 27, 2026 - 16:10
0 0
बिहार : गयाजी में पितृपक्ष की आस्था अब पर्यावरण से जुड़ी, पितृवाटिका में ‘एक पेड़ पूर्वजों के नाम’ की पहल
Bihar Faith

गयाजी । 'मोक्षस्थली' के रूप में चर्चित बिहार के गयाजी में पितृपक्ष केवल धार्मिक अनुष्ठानों और पिंडदान तक सीमित नहीं रह गया है। पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और स्मरण की इस परंपरा को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने की एक अनोखी पहल शुरू की गई है। इसी सोच के साथ जिला प्रशासन और वन विभाग, गया की ओर से पितृवाटिका में 'एक पेड़ पूर्वजों के नाम’ अभियान चलाया जा रहा है। ब्रह्मयोनि पहाड़ी क्षेत्र में विकसित की जा रही पितृवाटिका श्रद्धा, स्मृति और प्रकृति संरक्षण को एक साथ जोड़ने का प्रयास है।  

खटकाचक में पितृवाटिका: पूर्वजों की स्मृति और हरियाली का संगम

पितृपक्ष महासंगम-2026 के अवसर पर शनिवार को पितृवाटिका के निर्धारित स्थल खटकाचक में पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान परिसर में कुल 41 पौधे लगाए गए। इन पौधों को केवल हरियाली बढ़ाने के साधन के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इन्हें पूर्वजों की स्मृति को जीवित रखने और आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति के प्रति जिम्मेदार बनाने के प्रतीक के तौर पर विकसित करने की योजना है। गयाजी में हर वर्ष देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने पूर्वजों के मोक्ष और उनकी आत्मा की शांति के लिए पिंडदान तथा तर्पण करने पहुंचते हैं। 

पितृवाटिका: आस्था और पर्यावरण का अनूठा संगम

धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण ब्रह्मयोनि पहाड़ी क्षेत्र भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में इसी क्षेत्र में पितृवाटिका की अवधारणा पितृपक्ष की परंपरा को एक नए पर्यावरणीय संदेश से जोड़ती है। इसका उद्देश्य यह संदेश देना है कि पूर्वजों का स्मरण केवल धार्मिक कर्मकांड तक सीमित न रहे, बल्कि उनकी स्मृति में प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा का संकल्प भी लिया जाए। गया के जिलाधिकारी शशांक शुभंकर ने बताया कि ‘एक पेड़ पूर्वजों के नाम’ की अवधारणा के तहत श्रद्धालुओं और आम नागरिकों को अपने पूर्वजों की स्मृति में पौधा लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि यदि पितृपक्ष के दौरान गया आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु अपने पूर्वजों की स्मृति में एक पौधा लगाने तो आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र हरियाली के बड़े केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है। 

स्थायी विरासत: श्रद्धा और पर्यावरण का भविष्य

प्रशासन का कहना है कि पितृपक्ष की परंपरा को पर्यावरणीय जिम्मेदारी से जोड़ना आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्थायी विरासत तैयार करने की दिशा में सार्थक कदम है। ‘एक पेड़ पूर्वजों के नाम’ का संदेश केवल एक पौधा लगाने तक सीमित नहीं है। यह उस विचार को आगे बढ़ाता है कि पूर्वजों की स्मृति को प्रकृति की हरियाली के साथ जोड़ा जाए और श्रद्धा का यह भाव आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, हरा-भरा और सुरक्षित पर्यावरण छोड़ने के संकल्प में बदल सके। 

बता दें कि गयाजी की पहचान में ब्रह्मयोनि पहाड़ का विशेष स्थान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पितृ पक्ष के दौरान यहां दर्शन और पूजा-अर्चना का अपना महत्व है। पहाड़ की ऊंचाई से गयाजी का विस्तृत दृश्य दिखाई देता है और यह क्षेत्र प्राकृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में ब्रह्मयोनि पहाड़ी क्षेत्र में पितृवाटिका विकसित करने की पहल धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण को जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यहां लगाए जा रहे पौधे आने वाले समय में क्षेत्र की हरियाली बढ़ाने के साथ श्रद्धालुओं के लिए पूर्वजों की स्मृति और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का स्थायी संदेश भी देंगे। 

इनपुट : आईएएनएस

 

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0
KNOCKOUT NEWZ DIGITAL

Welcome to Knockout Newz Website. - Knockout Newz brings you the latest Breaking News, India News, Uttar Pradesh News, cities news, Politics, Trending, Sports, Entertainment, Business and Technology updates. Stay informed with fast, accurate and reliable journalism.

Comments (0)

User