जहरीली हवा में कौन-सा मास्क है असरदार: जानिए एक्यूआई का पूरा गणित

Oct 23, 2026 - 12:08
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जहरीली हवा में कौन-सा मास्क है असरदार: जानिए एक्यूआई का पूरा गणित
air has turned toxic

एजेंसी, नई दिल्ली। ऋतु परिवर्तन और वायु प्रदूषण में वृद्धि के बीच 'वायु गुणवत्ता सूचकांक' (एक्यूआई) आम जनजीवन की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुका है। यह सूचकांक किसी विशेष क्षेत्र के वायुमंडल की स्वच्छता और उसमें घुले हानिकारक तत्वों की स्थिति दर्शाने वाला मानक पैमाना है, जिसके आधार पर स्वास्थ्य सावधानियां तय की जाती हैं।

कैसे तय होता है वायु गुणवत्ता स्तर?

वातावरण में मौजूद मुख्य प्रदूषक तत्वों के आधार पर इस सूचकांक की गणना की जाती है:

  • प्रमुख प्रदूषक तत्व: इसमें फेफड़ों में सीधे प्रवेश करने वाले अति-सूक्ष्म कण (पीएम 2.5), सूक्ष्म धूल कण (पीएम 10), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड शामिल हैं।

  • सूचकांक का नियम: यह संख्या जितनी अधिक होती है, वायु उतनी ही अधिक विषाक्त होती है और स्वास्थ्य पर उसका प्रतिकूल प्रभाव उतना ही गहरा पड़ता है।

वायु गुणवत्ता की छह प्रमुख श्रेणियां

  • उत्कृष्ट (0 से 50): वायु पूर्णतः शुद्ध मानी जाती है। इसमें स्वास्थ्य संबंधी कोई जोखिम नहीं होता और खुली हवा में व्यायाम या भ्रमण सबसे सुरक्षित रहता है।

  • संतोषजनक / मध्यम (51 से 100): वायु की गुणवत्ता स्वीकार्य रहती है। सामान्य नागरिकों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता, किंतु सांस के अति-संवेदनशील रोगियों को हल्की असुविधा हो सकती है।

  • संवेदनशील वर्ग के लिए अस्वास्थ्यकर (101 से 150): दमा या हृदय रोग से पीड़ित व्यक्तियों, बच्चों और वृद्धों को सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है।

  • अस्वास्थ्यकर (151 से 200): संवेदनशील समूहों को सांस लेने में कठिनाई होने लगती है और सामान्य लोगों को भी लंबे समय तक बाहर भारी श्रम से बचने की सलाह दी जाती है।

  • गंभीर (201 से 300): स्वास्थ्य पर व्यापक दुष्प्रभाव पड़ता है और हर वर्ग के लिए श्वसन संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

  • अति-गंभीर व खतरनाक (301 से अधिक): यह स्वास्थ्य आपातकाल जैसी स्थिति होती है, जहां स्वस्थ व्यक्तियों के फेफड़े भी प्रभावित हो सकते हैं।

कौन-सा मास्क कब है सबसे अधिक प्रभावी?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्य कपड़े या चिकित्सीय (सर्जिकल) मास्क अति-सूक्ष्म कणों (पीएम 2.5) को रोकने में असमर्थ होते हैं। अतः प्रदूषण स्तर के अनुसार सही मास्क का चयन अनिवार्य है:

  • सूचकांक 0 से 50: किसी भी प्रकार के मास्क की आवश्यकता नहीं होती।

  • सूचकांक 51 से 100: सामान्य लोगों के लिए मास्क जरूरी नहीं है; हालांकि धूल से एलर्जी या दमा के मरीज एहतियातन साधारण आवरण का प्रयोग कर सकते हैं।

  • सूचकांक 101 से 150: बुजुर्गों, बच्चों और श्वसन रोगियों को बाहर निकलते समय एन95 अथवा केएन95 श्रेणी का मास्क लगाना आरंभ कर देना चाहिए।

  • सूचकांक 151 से 300: सभी नागरिकों को बाहर जाते समय बिना वाल्व वाला एन95 मास्क पहनना चाहिए, जो 95 प्रतिशत तक सूक्ष्म कणों को छानने में सक्षम है।

  • सूचकांक 301 से अधिक: इस स्तर पर यथासंभव घर के भीतर ही रहने की सलाह दी जाती है। अत्यधिक आवश्यक होने पर केवल चेहरे पर पूरी तरह बैठने वाला उच्च स्तरीय एन99 अथवा सटीक फिटिंग वाला एन95 मास्क ही उपयोग में लाना चाहिए।

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