एसआईआर विवाद के बीच रिजिजू ने शेयर किया केजरीवाल का 2015 का वीडियो, उठाए सवाल
नई दिल्ली। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने रविवार को आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल का 2015 का एक वीडियो शेयर किया। इस वीडियो में केजरीवाल दिल्ली की वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों और फर्जी या डुप्लीकेट नामों के कारण वोटर लिस्ट में व्यापक सुधार की मांग करते हुए दिख रहे हैं।
इस वीडियो के सामने आने से मतदाता सूची के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (एसआईआर) को लेकर जारी राजनीतिक खींचतान और तेज हो गई है। सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इस प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के आरोपों का जवाब देने के लिए विपक्षी नेताओं के पुराने बयानों का सहारा ले रही है।
रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पुराना वीडियो साझा करते हुए केजरीवाल और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा वोटर लिस्ट में आमूलचूल बदलाव की पुरानी मांग, इस प्रक्रिया पर विपक्ष के मौजूदा रुख के बिल्कुल विपरीत है।
रिजिजू ने अपनी पोस्ट में लिखा, "कपिल सिब्बल के बाद एक बार फिर केजरीवाल का पुराना वीडियो सामने आया है जिसमें उन्होंने एसआईआर (वोटर लिस्ट में सुधार) की मांग की थी। इससे वे और राहुल गांधी खुद ही बेनकाब हो गए हैं।"
2015 में केजरीवाल और 'आप' की मांगें
जनवरी 2015 में दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले केजरीवाल और 'आप' ने मतदाता सूची में गंभीर विसंगतियों को लेकर सार्वजनिक रूप से चिंता जताई थी:
डुप्लीकेट वोटर आईडी: उस समय केजरीवाल ने दावा किया था कि लगभग 3.96 लाख से 4 लाख लोगों के पास करीब 11.5 लाख वोटर कार्ड मौजूद थे, यानी कई मतदाताओं के पास दो से चार कार्ड थे।
पड़ोसी राज्यों से समानता: पार्टी ने दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की मतदाता सूचियों में समानता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया था कि इससे चुनाव के दौरान फर्जी मतदान के लिए अंतरराज्यीय आवाजाही आसान हो सकती है।
चुनाव आयोग को साक्ष्य: इन विसंगतियों के खिलाफ अभियान के तहत 'आप' ने निर्वाचन आयोग को संदिग्ध डुप्लीकेट वोटर एंट्री से जुड़ा डेटा और सीडी सौंपी थी।
भाजपा का पलटवार: पहले मांग, अब विरोध क्यों?
रिजिजू का यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस और 'आप' समेत विपक्षी दल वर्तमान में जारी एसआईआर प्रक्रिया को 'वोट चोरी' करार दे रहे हैं। विपक्ष इस प्रक्रिया को रद्द करने, पुरानी मतदाता सूची बहाल करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है।
भाजपा का तर्क है कि जो नेता पहले फर्जी वोटरों को हटाने और मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण की मांग करते थे, वे ही अब मतदाता सूची को अपडेट और सत्यापित करने की कानूनी प्रक्रिया का राजनीतिक विरोध कर रहे हैं।
कपिल सिब्बल के पुराने भाषण का भी दिया हवाला
इससे पहले रिजिजू ने पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल के संसद में दिए गए एक पुराने भाषण का वीडियो भी साझा किया था।
कानूनी प्रक्रिया का हवाला: सिब्बल के भाषण का संदर्भ देते हुए रिजिजू ने कहा था कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया स्थापित नियमों के तहत होती है, और यदि किसी पात्र मतदाता का नाम कटता है तो उसके पास पंजीकरण के लिए अधिकारियों से संपर्क करने का कानूनी विकल्प उपलब्ध रहता है।
विपक्ष का रुख: इसके विपरीत, विपक्षी दल निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, निष्पक्षता और योग्य मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका को लेकर लगातार सवाल खड़े कर रहे हैं।
इनपुट : आईएएनएस
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