पीओके में पाकिस्तानी सेना की बर्बरता को बीते महीनों, इंसाफ के लिए भटक रहे परिवार: रिपोर्ट

Oct 11, 2026 - 17:39
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पीओके में पाकिस्तानी सेना की बर्बरता को बीते महीनों, इंसाफ के लिए भटक रहे परिवार: रिपोर्ट
Families seeking justice for Pakistani Army's atrocities in PoK

नई दिल्ली। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में बिजली की बढ़ती दरों और जीवन-यापन की लागत को लेकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब इलाके के संवैधानिक और राजनीतिक ढांचे के खिलाफ बड़े आंदोलन में बदल चुका है। स्थानीय जमीनी संगठन 'जॉइंट अवामी एक्शन कमिटी' (जेएएसी) द्वारा 27 जुलाई से 10 अगस्त के बीच चरणबद्ध चुनाव बहिष्कार के आह्वान के बाद पाकिस्तानी सरकार ने संगठन पर कड़े आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत प्रतिबंध लगा दिया।

'द इंडिपेंडेंट' और यूके स्थित मानवाधिकार संगठन 'जम्मू कश्मीर ह्यूमन राइट्स ऑब्जर्वेटरी' (जेकेएचआरओ) की हालिया रिपोर्टों के अनुसार, आंदोलन को दबाने के लिए चलाए गए सुरक्षा अभियानों के दौरान गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन, मनमानी हिरासत और न्यायेतर हत्याओं (एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल किलिंग) के गंभीर आरोप सामने आए हैं।

फहद बरकत का मामला और शव सौंपने पर शर्त

रिपोर्ट में 26 वर्षीय फहद बरकत का प्रमुखता से उल्लेख किया गया है, जो 7 जून को रावलकोट के सैन्य अस्पताल में रक्तदान करने गए थे लेकिन वापस नहीं लौटे। जेकेएचआरओ की 47 पन्नों की रिपोर्ट के मुताबिक, अस्पताल के गेट पर ही उनकी गर्दन में गोली मारी गई थी।

परिजनों और मानवाधिकार संगठन ने आरोप लगाया है कि अधिकारियों ने बरकत का शव तब तक रोके रखा जब तक कि परिवार ने उन्हें "मुठभेड़ में मारा गया आतंकवादी" बताने वाले बयान पर हस्ताक्षर नहीं कर दिए। जेकेएचआरओ ने पारदर्शिता की मांग करते हुए सीसीटीवी फुटेज, ब्लड डोनर रिकॉर्ड, पोस्टमॉर्टम दस्तावेज और दफन से जुड़े रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की अपील की है।

जबरन लापता किए जाने और हिरासत में मौतों के अन्य मामले

रिपोर्ट के अनुसार, बरकत का मामला अकेला नहीं है:

  • शौकत नवाज मीर: 30 जून को धीरकोट से गिरफ्तारी के तीन महीने बीत जाने के बाद भी उनके परिवार को उनके ठिकाने या स्थिति के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।

  • जाबिर मुमताज: दो हफ्ते तक हिरासत में रहने के बाद कथित तौर पर 5 सितंबर को सुरक्षाकर्मियों द्वारा मारे गए। परिजनों द्वारा उन्हें आतंकवादी बताने वाले बयान पर हस्ताक्षर करने से इनकार करने के बाद अधिकारियों ने कथित तौर पर खुद ही उन्हें दफना दिया।

100 से अधिक मौतों का दावा और जांच की मांग

जेएएसी के अनुसार, 5 जून के बाद से जारी कार्रवाई में अब तक 100 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि स्थानीय निवासियों का दावा है कि वास्तविक आंकड़ा इससे कहीं अधिक है। जेकेएचआरओ ने पाकिस्तानी अधिकारियों से हताहतों के रिकॉर्ड, हिरासत विवरण और ऑपरेशनल आदेश सार्वजनिक करने की मांग की है, ताकि उल्लंघनों की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय की जा सके।

इनपुट : आईएएनएस

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