Rupee vs Dollar: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 96 के पार; फेड रेट हाइक और कच्चे तेल में उछाल से दबाव
विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार (Forex Market) में गुरुवार सुबह भारतीय रुपये में भारी गिरावट दर्ज की गई और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 16 पैसे टूटकर 96 के ऐतिहासिक स्तर को पार कर गया। जानिए रुपये में गिरावट के मुख्य कारणों, घरेलू अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर और विशेषज्ञों के दृष्टिकोण पर पूरी रिपोर्ट।
मुंबई: वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और अमेरिकी केंद्रीय बैंक के कड़े फैसलों के बीच भारतीय मुद्रा में गुरुवार को जोरदार गिरावट देखने को मिली। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार (Interbank Forex Market) में शुरुआती कारोबार के दौरान भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 16 पैसे कमजोर होकर 96 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया।
एक महीने से अधिक समय में यह पहला मौका है जब रुपये ने 96 के स्तर को छुआ है। हालांकि, गिरावट गहराने के बाद भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा डॉलर की आपूर्ति बढ़ाने के लिए बाजार में संभावित हस्तक्षेप के चलते रुपया नुकसान की भरपाई करते हुए 96.07 से 96.10 के स्तर पर स्थिर हुआ।
रुपये पर दबाव के प्रमुख कारण
विदेशी मुद्रा बाजार के विश्लेषकों के अनुसार, रुपये में आई इस तेज गिरावट के पीछे तीन प्रमुख वैश्विक और घरेलू कारक जिम्मेदार हैं:
-
अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर में वृद्धि: अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने अपनी नीतिगत दरों में 25 बेसिस पॉइंट्स (0.25%) का इजाफा किया है। इस फैसले से अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़ी है और डॉलर इंडेक्स उछलकर एक महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है, जिससे उभरते बाजारों (Emerging Markets) की मुद्राओं पर बिकवाली का दबाव बढ़ गया।
-
कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में तेजी: ब्रेंट क्रूड की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में $100 प्रति बैरल के स्तर से ऊपर बनी हुई हैं। चूंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का 85% से अधिक आयात करता है, इसलिए महंगे तेल के भुगतान के लिए डॉलर की भारी मांग पैदा हो रही है।
-
विदेशी पूंजी की निकासी (FII Outflows): अमेरिकी बॉन्ड यील्ड आकर्षक होने के चलते विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय शेयर और ऋण बाजार से लगातार पूंजी निकाल रहे हैं, जिसका सीधा असर घरेलू मुद्रा पर पड़ रहा है।
RBI का मोर्चा और बाजार का रुख
मुद्रा व्यापारियों के अनुसार, जब रुपया 96 के पार फिसला, तो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के जरिए डॉलर की बिक्री देखी गई, जो कि स्पष्ट रूप से केंद्रीय बैंक का हस्तक्षेप था:
-
अस्थिरता रोकने पर जोर: विश्लेषकों का कहना है कि आरबीआई का लक्ष्य रुपये के किसी तय स्तर को बचाना नहीं, बल्कि मुद्रा में अचानक आने वाले उतार-चढ़ाव (High Volatility) को सीमित करना है।
-
मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार: भारत का विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत स्थिति में होने के कारण बाजार को भरोसा है कि आरबीआई के पास अत्यधिक गिरावट को रोकने के लिए पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं।
-
शॉर्ट-टर्म रेंज: विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले कारोबारी सत्रों में रुपया 95.75 से 96.20 के सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है।
सोशल मीडिया पर मीम्स और आर्थिक चिंताएं
रुपये के 96 के स्तर को छूने का समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन (17 सितंबर) के साथ मेल खाने के कारण सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई:
-
राजनीतिक तंज और मीम्स: विपक्षी नेताओं और सोशल मीडिया यूजर्स ने पुराने बयानों को याद करते हुए और रुपये के स्तर को उम्र के आंकड़ों से जोड़ते हुए कई मीम्स साझा किए।
-
अर्थव्यवस्था पर असर: जानकारों का मानना है कि रुपये के अवमूल्यन से आयात महंगे होंगे, जिससे इलेक्ट्रॉनिक्स, कच्चा तेल और विदेश में पढ़ाई महंगी हो सकती है। इसके साथ ही देश में आयातित महंगाई (Imported Inflation) बढ़ने का जोखिम भी बढ़ जाता है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)