अस्पतालों में IV सेट और सीरिंज पर 2,841% तक का भारी मुनाफा; महाराष्ट्र FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे के सर्वे में बड़ा खुलासा

महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के कमिश्नर तुकाराम मुंढे द्वारा कराए गए एक विस्तृत सर्वेक्षण में निजी और कॉरपोरेट अस्पतालों द्वारा चिकित्सा उपकरणों पर वसूले जा रहे भारी-भरकम मुनाफे का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। मुंबई, पुणे और छत्रपति संभाजीनगर के अस्पतालों में की गई जांच में पाया गया कि IV सेट्स, सीरिंज और कैथेटर जैसे आवश्यक उपभोग्य सामग्रियों (Medical Consumables) पर मरीजों से खरीद मूल्य की तुलना में 2,841 प्रतिशत तक अधिक कीमत वसूली जा रही है। जानिए एफडीए जांच, भारी मुनाफे के आंकड़ों और अस्पताल प्रबंधन के तर्कों पर पूरी विस्तृत रिपोर्ट।

Sep 17, 2026 - 11:41
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अस्पतालों में IV सेट और सीरिंज पर 2,841% तक का भारी मुनाफा; महाराष्ट्र FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे के सर्वे में बड़ा खुलासा

मुंबई: देश के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में निजी अस्पतालों द्वारा जीवन रक्षक उपकरणों और उपभोग्य सामग्रियों (Consumables) पर मरीजों से की जा रही बेतहाशा वसूली को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में किए गए एक औचक सर्वेक्षण में सामने आया है कि अस्पताल IV सेट्स (ड्रिप सेट), डिस्पोजेबल सीरिंज और कैथेटर जैसी बुनियादी चीजों पर खरीद मूल्य से 2,841 प्रतिशत तक का भारी मुनाफा (Markup) वसूल रहे हैं।

यह जांच राज्य के प्रमुख चिकित्सा केंद्रों—मुंबई, पुणे और छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) के अस्पतालों के खरीद और बिलिंग रिकॉर्ड्स के विश्लेषण के आधार पर की गई है।

खरीद मूल्य बनाम मरीजों से वसूली: चौंकाने वाले आंकड़े

सर्वेक्षण रिपोर्ट में सामने आए अंतर ने अस्पताल प्रबंधन और मेडिकल डिवाइस सप्लाई चेन की साठगांठ को उजागर कर दिया है:

  • डिस्पोजेबल सीरिंज: अस्पतालों द्वारा थोक में महज ₹6.75 में खरीदी जाने वाली सिरिंज के लिए इन-पेशेंट (भर्ती) मरीजों से बिल में ₹57.20 तक वसूले जा रहे हैं।

  • यूरिनरी कैथेटर: थोक खरीद में जिसकी लागत मात्र ₹29.41 है, उसे मरीज के डिस्चार्ज बिल में ₹310 तक दर्ज किया गया।

  • IV इन्फ्यूजन सेट: इस श्रेणी में सबसे अधिक असमानता दर्ज की गई, जहां कुछ मामलों में थोक खरीद मूल्य की तुलना में अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) और बिलिंग चार्ज में 2,841% तक की भारी बढ़ोतरी पाई गई।

'मरीज के पास विकल्प नहीं होता': तुकाराम मुंढे

कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने इस मुनाफेखोरी को नैतिक और जन-स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर संकट करार दिया है:

  • लाचारी का फायदा: मुंढे ने कहा कि जब कोई मरीज अस्पताल में भर्ती होता है या आईसीयू में जिंदगी और मौत से जूझ रहा होता है, तब वह या उसके परिजन यह तुलना नहीं कर सकते कि कौन सा अस्पताल सीरिंज या ड्रिप सेट किस दर पर लगा रहा है।

  • रेगुलेटरी लूपहोल (नियमों की कमी): उन्होंने रेखांकित किया कि राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) द्वारा आवश्यक दवाओं की कीमतों पर तो सीलिंग (सीमा) तय है, लेकिन अधिकांश मेडिकल डिवाइसेज और डिस्पोजेबल्स ड्रग्स प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO) के कठोर दायरे से बाहर हैं, जिसका फायदा उठाकर कंपनियां मनमाना एमआरपी छापती हैं।

केंद्र सरकार और NPPA को लिखा पत्र

इस बेलगाम ओवरचार्जिंग पर रोक लगाने के लिए महाराष्ट्र एफडीए ने केंद्रीय स्तर पर हस्तक्षेप की मांग की है:

  1. ट्रेड मार्जिन पर कैप: एफडीए ने केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के फार्मास्यूटिकल्स विभाग और NPPA को आधिकारिक पत्र लिखकर अस्पतालों और वितरकों के व्यापारिक मार्जिन (Trade Margins) को तर्कसंगत और सीमित करने के लिए तत्काल राष्ट्रीय दिशानिर्देश जारी करने का आग्रह किया है।

  2. पारदर्शिता की वकालत: रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि अस्पतालों के लिए सभी उपभोग्य सामग्रियों का खरीद मूल्य और अंतिम बिलिंग मूल्य सार्वजनिक डिस्प्ले बोर्ड पर प्रदर्शित करना अनिवार्य किया जाए।

उद्योग और अस्पतालों का पक्ष

एक तरफ जहां जन-अधिकार संगठनों और मरीजों ने इस खुलासे के बाद तुकाराम मुंढे के साहसिक कदम की सराहना की है, वहीं निजी अस्पताल संघों ने अपने बचाव में तर्क दिया है कि अस्पतालों के ऊंचे परिचालन खर्च (Overhead Costs), बायो-मेडिकल वेस्ट निस्तारण, स्टरलाइजेशन और 24 घंटे विशेषज्ञ नर्सिंग स्टाफ के रखरखाव के खर्च को पूरा करने के लिए उपभोग्य सामग्रियों के मार्जिन का उपयोग किया जाता है।

हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट मत है कि यदि बुनियादी उपकरणों पर इस तरह 2,800% से अधिक मुनाफा कमाया जाएगा, तो आम भारतीय के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा हमेशा के लिए पहुंच से बाहर हो जाएगी।

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