₹2,000 से अधिक के पेट्रोल-डीजल भुगतान पर ₹5 शुल्क से भड़के पेट्रोल पंप डीलर्स,UPI बंद कर केवल 'कैश' लेने की दी चेतावनी
देशभर के पेट्रोल पंप डीलरों ने 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के यूपीआई (UPI) ट्रांजैक्शन पर लगने वाले ₹5 के मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। डीलरों का कहना है कि वर्ष 2017 से उनका डीलर कमीशन ₹2.40 से ₹3.40 प्रति लीटर पर अटका हुआ है, ऐसे में बड़े डिजिटल लेन-देन पर ₹5 की अतिरिक्त कटौती से प्रत्येक पेट्रोल पंप को प्रतिदिन ₹230 से ₹250 का सीधा वित्तीय नुकसान उठाना पड़ेगा। जानिए पेट्रोल डीलर्स की मांग, नए यूपीआई नियमों और आम वाहन चालकों पर पड़ने वाले असर की पूरी रिपोर्ट।
नई दिल्ली: देश भर में डिजिटल भुगतान की रीढ़ बन चुके यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आगामी 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक राशि वाले यूपीआई लेन-देन पर लागू होने वाले ₹5 के फ्लैट मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के फैसले का पेट्रोल पंप एसोसिएशनों ने कड़ा विरोध शुरू कर दिया है।
पेट्रोल पंप संचालकों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि ईंधन खरीद को इस नए नियम के दायरे से बाहर नहीं रखा गया, तो वे ₹2,000 से अधिक के तेल बिलों के लिए यूपीआई भुगतान लेना बंद कर देंगे और ग्राहकों से केवल 'नकद' (Cash Only) लेन-देन की मांग करेंगे।
डीलरों की मुख्य चिंता: स्थिर मार्जिन और बढ़ता खर्च
'फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया पेट्रोलियम ट्रेडर्स' (FAIPT) और संबंधित डीलर संगठनों के अनुसार, यह नया शुल्क उनके पहले से दबाव में चल रहे मुनाफे पर सीधा प्रहार है:
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2017 से स्थिर कमीशन: डीलरों का कहना है कि तेल विपणन कंपनियों (OMCs) द्वारा दिया जाने वाला डीलर मार्जिन वर्ष 2017 के बाद से संशोधित नहीं हुआ है, जो वर्तमान में प्रति लीटर महज ₹2.40 से ₹3.40 के बीच सीमित है।
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दैनिक ₹250 तक का सीधा नुकसान: चार पहिया वाहनों, एसयूवी और वाणिज्यिक गाड़ियों में आम तौर पर ₹2,000 से अधिक का पेट्रोल-डीजल भरवाया जाता है। डीलरों का अनुमान है कि इस नए शुल्क के चलते प्रत्येक आउटलेट को रोजाना ₹230 से ₹250 का सीधा घाटा झेलना पड़ेगा।
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छूट की मांग: एसोसिएशन ने केंद्रीय वित्त मंत्रालय और पेट्रोलियम मंत्रालय को पत्र लिखकर मांग की है कि पेट्रोल पंपों पर होने वाले सभी डिजिटल लेन-देन को इस शुल्क से पूरी तरह छूट (Exemption) दी जाए।
सरकार का तर्क: इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिरता जरूरी
वित्त मंत्रालय और नीति निर्माताओं ने नए शुल्क ढांचे का बचाव करते हुए स्थिति स्पष्ट की है:
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छोटे लेन-देन पूरी तरह मुफ्त: सरकार का कहना है कि आम नागरिकों, दोपहिया वाहन चालकों और दैनिक जरूरतों के लिए किए जाने वाले ₹2,000 तक के छोटे खुदरा लेन-देन पूर्ववत 100% निशुल्क बने रहेंगे।
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डिजिटल इकोसिस्टम का खर्च: बड़े मूल्य के भुगतानों पर नाममात्र ₹5 का शुल्क डिजिटल बैंकिंग सर्वर, साइबर सुरक्षा और वित्तीय तंत्र के परिचालन खर्च (Operational Cost) को वहन करने के लिए आवश्यक है, ताकि यूपीआई का विकास बिना किसी रुकावट के जारी रह सके।
राजनीतिक घमासान और आम जनता पर संभावित असर
इस फैसले के सामने आते ही सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है:
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विपक्ष का कड़ा विरोध: विपक्षी दलों ने सरकार के इस कदम की आलोचना करते हुए इसे 'डिजिटल इंडिया के नाम पर आम जनता पर थोपा गया अप्रत्यक्ष कर' करार दिया है और इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है।
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ग्राहकों की परेशानी का डर: यदि 15 अक्टूबर से पेट्रोल पंपों पर ₹2,000 से अधिक के डिजिटल भुगतान रोके जाते हैं, तो कारों और भारी वाहनों के चालकों को भारी मात्रा में नकद लेकर चलना पड़ेगा, जिससे फ्यूल स्टेशनों पर लंबी कतारें लगने और विवाद बढ़ने की आशंका है।
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