UNHRC में भारत ने उठाया PoK में बिगड़ते हालात का मुद्दा; कहा—जून से हो रही आम नागरिकों की मौतें और छात्रों की गिरफ्तारी
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के सत्र में भारत ने पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में बिगड़ती मानवाधिकार स्थिति और नागरिक अशांति का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाया है। जिनेवा में भारतीय राजनयिक क्षितिज त्यागी ने 'राइट ऑफ रिप्लाई' का उपयोग करते हुए पाकिस्तान को बेनकाब किया। जानिए संयुक्त राष्ट्र में भारत के कूटनीतिक प्रहार और PoK के जमीनी हालात पर पूरी विस्तृत रिपोर्ट।
जिनेवा/नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 57वें नियमित सत्र में भारत ने पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में मानवाधिकारों के घोर हनन और पाकिस्तानी हुकूमत की दमनकारी नीतियों को बेनकाब किया है। भारत ने पाकिस्तान द्वारा कश्मीर पर अनर्गल प्रलाप का कड़ा जवाब देते हुए कहा कि PoK में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं, जहां जून के महीने से शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों और नागरिकों की जान जा रही है तथा छात्रों को मनमाने ढंग से सलाखों के पीछे डाला जा रहा है।
जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव/राजनयिक क्षितिज त्यागी ने 'राइट ऑफ रिप्लाई' (Right of Reply) का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान के झूठे प्रोपेगैंडा की धज्जियां उड़ाईं।
PoK में राज्य-प्रायोजित हिंसा और दमन का खुलासा
भारतीय राजनयिक ने परिषद को अवगत कराया कि पाकिस्तान के गैर-कानूनी कब्जे वाले क्षेत्र में नागरिक जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है:
-
नागरिकों की मौत और पुलिस बर्बरता: PoK में बुनियादी सुविधाओं, महंगाई और राजनीतिक अधिकारों को लेकर शुरू हुए जन-आंदोलनों पर पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स ने बर्बर बल प्रयोग किया। जून के बाद से कई नागरिकों की मौतों और सैकड़ों के घायल होने की घटनाएं सामने आई हैं।
-
छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी: अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की आवाज उठाने वाले युवा छात्रों, 'ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) से जुड़े व्यापारी नेताओं और वकीलों को गैर-कानूनी रूप से हिरासत में लिया गया है और उन पर आतंकवाद-रोधी कड़े कानून थोपे जा रहे हैं।
-
इंटरनेट बैन और अभिव्यक्ति की आजादी पर रोक: स्थानीय आबादी के गुस्से को दबाने के लिए लगातार इंटरनेट सेवाएं बंद रखी जा रही हैं और मीडिया पर पूर्ण पाबंदी लगाई गई है।
"जो खुद आतंक का पोषक है, वह न्याय की मांग कर रहा"
भारत ने पाकिस्तान के दोहरे चरित्र को उजागर करते हुए यूएन में तीखा प्रहार किया:
-
आतंकवाद का केंद्र: भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि पाकिस्तान ने दशकों तक आतंकवाद को राज्य नीति के रूप में पाला-पोसा है। सीमा पार से भेजे गए आतंकियों ने हर धर्म के निर्दोष कश्मीरियों का कत्लेआम किया। यह विडंबना ही है कि आतंकवाद को प्रायोजित करने वाला देश आज मानवाधिकार परिषद से जांच और न्याय की मांग कर रहा है।
-
विकास पर ध्यान देने की सलाह: भारत ने स्पष्ट कहा कि पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंचों का दुरुपयोग कर भारत के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण प्रचार करने के बजाय अपनी ढहती अर्थव्यवस्था, भुखमरी और PoK में नागरिकों की बदहाली को दूर करने पर ध्यान देना चाहिए।
"जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग था, है और रहेगा"
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में अपने संप्रभु रुख को एक बार फिर दोहराते हुए कहा कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न, अविभाज्य और संप्रभु हिस्सा हैं।
भारत ने स्पष्ट किया कि वास्तविक समस्या पाकिस्तान द्वारा भारतीय भूभाग पर किया गया अवैध और जबरन कब्जा (PoK) है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आह्वान किया कि वह PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान में मानवाधिकारों के हनन और असहमति की आवाजों को कुचलने के लिए पाकिस्तान की जवाबदेही तय करे।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)