असम में इसरो के 'एडवांस्ड रडार सेंटर' का शिलान्यास; 2000 किमी दूर से ट्रैक करेगा 10 सेमी का अंतरिक्ष मलबा
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अंतरिक्ष में देश की सुरक्षा और निगरानी क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए असम में 'एडवांस्ड रडार रिसर्च सेंटर' की आधारशिला रखी है। गुवाहाटी के पास चंद्रपुर में पुराने थर्मल पावर प्लांट की 124 एकड़ भूमि पर स्थापित होने वाला यह अत्याधुनिक केंद्र 2,000 किलोमीटर की दूरी तक मात्र 10 सेंटीमीटर जितने छोटे मलबे और कक्षीय वस्तुओं को ट्रैक करने में सक्षम होगा। जानिए इस प्रोजेक्ट की मारक निगरानी क्षमता, प्रोजेक्ट नेत्रा और पूर्वोत्तर के लिए इसके रणनीतिक महत्व पर पूरी विस्तृत रिपोर्ट।
गुवाहाटी: भारत की अंतरिक्ष संपत्तियों की सुरक्षा और वैश्विक अंतरिक्ष निगरानी तंत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि जुड़ गई है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने असम में अपने अत्याधुनिक 'एडवांस्ड रडार रिसर्च सेंटर' (Advanced Radar Research Centre) की आधारशिला रख दी है।
गुवाहाटी के निकटवर्ती इलाके चंद्रपुर में पुराने थर्मल पावर प्लांट की 124 एकड़ जमीन पर इस विशाल केंद्र का निर्माण किया जा रहा है। असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा ने इस अवसर को राज्य और समूचे पूर्वोत्तर के लिए एक अभूतपूर्व मील का पत्थर करार दिया।
2,000 किमी दूर 10 सेमी की वस्तु पर भी अचूक नजर
चंद्रपुर में बनने वाले इस रडार केंद्र की तकनीकी क्षमताएं वैश्विक स्तर की होंगी:
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अत्यंत सूक्ष्म मलबे की ट्रैकिंग: यह अत्याधुनिक रडार प्रणाली पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में 2,000 किलोमीटर की दूरी तक मात्र 10 सेंटीमीटर आकार की वस्तुओं, निष्क्रिय उपग्रहों और अंतरिक्षीय मलबे (Space Debris) को सटीकता से ट्रैक करने में सक्षम होगी।
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उपग्रहों की सुरक्षा: अंतरिक्ष में बढ़ते सैटेलाइट ट्रैफिक और मलबे के टकराने के खतरों के बीच यह रडार भारतीय सक्रिय उपग्रहों को समय पूर्व चेतावनी (Collision Avoidance) देकर सुरक्षित रखेगा।
प्रोजेक्ट नेत्रा (Project NETRA) का अहम स्तंभ
यह रडार स्टेशन इसरो के महत्वाकांक्षी 'प्रोजेक्ट नेत्रा' (Network for space object Tracking and Analysis) का एक प्रमुख घटक होगा:
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डेटा संप्रभुता और आत्मनिर्भरता: अब तक भारत को अंतरिक्ष में मलबे और विदेशी उपग्रहों की स्थिति की निगरानी के लिए काफी हद तक अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी (NASA/NORAD) के सार्वजनिक डेटा पर निर्भर रहना पड़ता था। इस केंद्र के सक्रिय होने के बाद भारत के पास अपनी स्वतंत्र 'स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस' (SSA) क्षमता होगी।
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रणनीतिक निगरानी: यह केंद्र न केवल नागरिक उपग्रहों की रक्षा करेगा, बल्कि भारतीय हवाई और अंतरिक्ष सीमा के ऊपर से गुजरने वाले सैन्य और जासूसी उपग्रहों पर भी 24 घंटे नजर रखने में देश की सामरिक क्षमताओं को मजबूती देगा।
पूर्वोत्तर के युवाओं के लिए अवसर; टेक हब बनेगा असम
इसरो का यह केंद्र केवल वैज्ञानिक निगरानी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह क्षेत्र के शैक्षिक और औद्योगिक परिदृश्य को भी नई दिशा देगा:
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पूर्वोत्तर के छात्रों को इंटर्नशिप: 124 एकड़ में फैले इस कैंपस में पूर्वोत्तर राज्यों के इंजीनियरिंग और साइंस के मेधावी छात्रों के लिए विशेष इंटर्नशिप और रिसर्च फेलोशिप प्रोग्राम चलाए जाएंगे।
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हाई-टेक हब के रूप में असम का उभार: असम पहले ही सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी (टाटा ग्रुप के सहयोग से) स्थापित कर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुका है। अब स्पेस टेक के इस बड़े प्रोजेक्ट के आने से राज्य की साख ग्लोबल टेक हब के रूप में और मजबूत होगी।
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