ट्रंप-शी शिखर वार्ता से पहले अमेरिका-चीन में AI सुरक्षा को लेकर बड़ी बातचीत
अमेरिका के टॉप अधिकारियों और चीन के बीच एक नए "नोटिफिकेशन मैकेनिज्म" यानी सूचना-तंत्र को लेकर बातचीत हुई है, जिसके ज़रिए राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करने वाली किसी भी AI घटना की जानकारी समय रहते साझा की जा सकेगी। यह जानकारी अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने रविवार को पत्रकारों को दी।
बेसेंट ने यह बयान न्यूयॉर्क में चीन के उप-प्रधानमंत्री हे लाइफेंग के साथ हुई बातचीत के बाद दिया, जिसे उन्होंने "सफल" करार दिया।
यह मुलाकात ऐसे वक्त हुई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच इसी हफ्ते वॉशिंगटन में एक शिखर बैठक होने वाली है।
पिछले कुछ दिनों में AI तकनीक सुर्खियों में रही है, क्योंकि शोधकर्ताओं ने इससे जुड़े संभावित खतरों को लेकर चेतावनी दी है, और इंडस्ट्री की कई बड़ी हस्तियों ने डेवलपर्स से ज़्यादा सतर्कता बरतने की अपील की है।
बातचीत के बाद पत्रकारों से बात करते हुए बेसेंट ने कहा, "जैसे किसी भी सीमा-पार गतिविधि में होता है, वैसे ही हमें लगता है कि दुनिया की नंबर एक और नंबर दो AI ताकतों के बीच अपारदर्शिता को पीछे छोड़कर ज़्यादा पारदर्शिता की ओर बढ़ना बेहद ज़रूरी है।"
उन्होंने बताया कि इस मुलाकात में कुछ और मुद्दों पर भी चर्चा हुई, जिनमें 'बोर्ड ऑफ ट्रेड' नाम की एक प्रक्रिया को अमल में लाने की योजना शामिल है इसका मकसद यह पता लगाना है कि किन वस्तुओं पर टैरिफ में कटौती की जा सकती है।
दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच चल रहे टैरिफ युद्ध पर लगी अस्थायी रोक 10 नवंबर को खत्म होने वाली है।
बीबीसी ने इस मामले पर अमेरिका में मौजूद चीनी दूतावास से भी प्रतिक्रिया मांगी है।
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच आर्थिक और व्यापार से जुड़े अहम मुद्दों पर खुलकर, गहराई से और रचनात्मक तरीके से बातचीत हुई, जिसमें AI का मुद्दा भी शामिल रहा।
बेसेंट ने रविवार को अपने X (पूर्व में ट्विटर) पोस्ट में लिखा कि यह बातचीत "राष्ट्रपति ट्रंप को अमेरिका के आर्थिक हितों को आगे बढ़ाने और अमेरिकी जनता के लिए नतीजे देने की दिशा में ज़मीन तैयार करने" में मददगार साबित होगी।
गौरतलब है कि अमेरिका और चीन, दोनों AI और टेक्नोलॉजी सेक्टर में दुनिया में सबसे आगे निकलने की होड़ में हैं।
हाल के दिनों में वॉशिंगटन पर यह दबाव भी बढ़ा है कि वह AI के विकास की रफ्तार धीमी करे, क्योंकि इंसानियत पर इसके संभावित नकारात्मक असर को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं।
हालांकि, ट्रंप इन चिंताओं को ज़्यादातर खारिज करते आए हैं। उनका कहना है कि AI को लेकर पहले से ही पर्याप्त नीतियां मौजूद हैं, और अमेरिका किसी भी सूरत में चीन के आगे अपनी बढ़त नहीं गंवा सकता। इसी महीने की शुरुआत में उन्होंने कहा था, "जो भी AI की रेस जीतेगा, वही असली जीत हासिल करेगा।"
बता दें कि मई में जब शी जिनपिंग ने बीजिंग में ट्रंप की मेज़बानी की थी, तब भी AI पर सहयोग बढ़ाने के तरीकों को लेकर दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुई थी। उस मुलाकात के बाद एक समझौता हुआ था, जिसके तहत चीन ने कम टैरिफ के बदले अमेरिका से बोइंग विमान और कृषि उत्पाद खरीदने पर सहमति जताई थी।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)