एफिल टॉवर पर BAPS हिंदू प्रतिनिधिमंडल के दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को हटाने पर बवाल

फ्रांस की राजधानी पेरिस में स्थित दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित स्मारकों में से एक एफिल टॉवर (Eiffel Tower) को सोमवार को कर्मचारियों की अचानक हड़ताल के कारण पर्यटकों के लिए बंद करना पड़ा। यह विवाद शनिवार को हिंदू धार्मिक और आध्यात्मिक संगठन बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) के लगभग 100 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के दौरे के दौरान सामने आया। जानिए एफिल टॉवर विवाद, कर्मचारी हड़ताल और फ्रांस में मचे राजनीतिक घमासान की पूरी विस्तृत रिपोर्ट।

Sep 08, 2026 - 12:12
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एफिल टॉवर पर BAPS हिंदू प्रतिनिधिमंडल के दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को हटाने पर बवाल

पेरिस: फ्रांस की राजधानी पेरिस का विश्वप्रसिद्ध ऐतिहासिक स्मारक एफिल टॉवर (Eiffel Tower) सोमवार को अचानक कर्मचारियों की हड़ताल के चलते पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया।

यह विवाद हिंदू धार्मिक संगठन बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) के एक 100 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के निजी दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों के साथ हुए कथित लैंगिक भेदभाव को लेकर भड़का है।

क्या है पूरा मामला?

शनिवार को पेरिस उपनगर में एक नए स्वामीनारायण मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के सिलसिले में आए BAPS प्रतिनिधिमंडल के करीब 100 सदस्यों ने एफिल टॉवर का दौरा किया था:

  • महिला कर्मियों को हटने का निर्देश: कर्मचारी संघ (यूनियन) की प्रतिनिधि डियाने दावोइन के अनुसार, प्रबंधन ने प्रतिनिधिमंडल के आगमन पर ड्यूटी पर तैनात महिला कर्मचारियों को उनके वर्कस्टेशन से हटने और अन्य स्थानों पर चले जाने का निर्देश दिया ताकि उनकी जगह पुरुष कर्मचारियों को लगाया जा सके।

  • 'अदृश्य रहने' का कथित फरमान: कर्मचारियों का आरोप है कि कॉन्ट्रैक्ट और नियमित महिला स्टाफ को प्रतिनिधिमंडल के रास्ते से दूर रहने और कुछ हिस्सों में आवाजाही न करने को कहा गया।

  • अपमान का आरोप और हड़ताल: कर्मचारियों ने इसे सीधे तौर पर 'लिंग आधारित भेदभाव' और महिला कर्मचारियों का घोर अपमान करार दिया। सप्ताहांत में तनाव बढ़ने के बाद सोमवार सुबह कर्मचारियों ने काम रोक दिया और आपात बैठक कर हड़ताल की घोषणा कर दी, जिससे मुख्य द्वार पर ताले लग गए।

एफिल टॉवर संचालक (SETE) का बयान

एफिल टॉवर का संचालन करने वाली कंपनी Société d'Exploitation de la tour Eiffel (SETE) ने मामले पर अपनी गलती स्वीकार की है:

  • शर्त मानना गलत था: SETE ने पुष्टि की कि प्रतिनिधिमंडल की ओर से महिलाओं के साथ 'बातचीत/संपर्क को सीमित करने' का अनुरोध किया गया था।

  • मूल्यों के खिलाफ: कंपनी ने स्पष्ट बयान में कहा, "यह अनुरोध स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए था। यह स्थिति एफिल टॉवर के सिद्धांतों, फ्रांसीसी गणतांत्रिक मूल्यों और स्त्री-पुरुष समानता के मानकों के पूरी तरह विपरीत है।"

  • अध्यक्ष ने मांगी माफी: SETE के अध्यक्ष एरियल वील ने कर्मचारियों से खेद व्यक्त करते हुए मामले के सभी पहलुओं की आंतरिक जांच कराने का आश्वासन दिया है।

    BAPS संगठन ने जारी किया स्पष्टीकरण

    विवाद तूल पकड़ने के बाद BAPS पेरिस ने सोशल मीडिया मंच 'X' पर आधिकारिक स्पष्टीकरण और खेद व्यक्त किया:

    • पूर्व समन्वय से दौरा: संगठन ने कहा कि यह दौरा सामान्य खुलने के समय टॉवर प्रबंधन की टीमों के साथ पहले से समन्वय करके आयोजित किया गया था ताकि अन्य पर्यटकों को असुविधा न हो।

    • रोकने की जानकारी नहीं: BAPS ने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार किसी भी कर्मचारी को कार्यस्थल से हटाने या किसी आगंतुक को रोकने की उन्हें कोई सीधी जानकारी नहीं थी।

    • असुविधा के लिए माफी: संगठन ने कहा, "हम उठाई गई चिंताओं को गंभीरता से लेते हैं। इस घटना से किसी को भी हुई असुविधा या मानसिक ठेस के लिए हम निष्कपट रूप से क्षमा चाहते हैं। हम आपसी सम्मान और सेवा के सार्वभौमिक मूल्यों में विश्वास रखते हैं।"

    फ्रांस में राजनीतिक हलचल और जांच के आदेश

    घटना के सामने आते ही फ्रांस के राजनीतिक गलियारों में कड़ा आक्रोश देखा गया:

    • पेरिस के मेयर का जांच आदेश: पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोइरे ने कर्मचारियों के गुस्से को जायज बताते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि पेरिस में महिला और पुरुष की समानता पर कोई समझौता नहीं हो सकता और यह नियम ऐतिहासिक धरोहरों पर भी सख्ती से लागू होगा।

    • नेताओं की कड़ी प्रतिक्रिया: नेशनल असेंबली की अध्यक्ष याएल ब्रौन-पिवेट ने कहा कि विदेशी मेहमानों के अनुरोध पर महिलाओं को पीछे हटने के लिए कहना किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। वहीं पूर्व प्रधानमंत्री गैब्रियल अत्तल और विपक्षी नेता मरीन ले पेन ने भी दो टूक कहा कि फ्रांस में किसी भी आस्था या परंपरा के नाम पर महिलाओं की सार्वजनिक उपस्थिति को सीमित नहीं किया जा सकता।

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