'एशियन गेम्स का स्तर बहुत ऊंचा, यहां हर मैच फाइनल जैसा'; ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद बोले भारतीय बैडमिंटन टीम के शटलर्स
एशियन गेम्स की बैडमिंटन टीम स्पर्धा में कांस्य पदक (Bronze Medal) अपने नाम करने के बाद भारतीय बैडमिंटन दल के खिलाड़ियों ने महाद्वीपीय खेलों की प्रतिस्पर्धा और स्तर को लेकर बड़ा बयान दिया है। कड़े सेमीफाइनल मुकाबले में विश्व स्तरीय चुनौती का सामना करने के बाद भारतीय खिलाड़ियों ने कहा कि एशियन गेम्स में बैडमिंटन का स्तर कई मायनों में ओलंपिक या विश्व चैंपियनशिप से भी अधिक कठिन होता है, क्योंकि दुनिया के शीर्ष 10-15 एकल और युगल खिलाड़ी मुख्य रूप से एशियाई देशों (चीन, इंडोनेशिया, जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया) से ही आते हैं। जानिए भारतीय बैडमिंटन टीम के अभियान, खिलाड़ियों की प्रतिक्रिया और व्यक्तिगत मुकाबलों के समीकरणों पर विस्तृत रिपोर्ट।
नागोया/हांगझोउ: एशियन गेम्स की बैडमिंटन स्पर्धा में भारतीय पुरुष बैडमिंटन टीम ने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक (Bronze Medal) अपने नाम कर लिया है। बेहद रोमांचक और चुनौतीपूर्ण नॉकआउट दौर से गुजरने के बाद भारतीय दल ने पोडियम पर अपनी जगह पक्की की।
कांस्य पदक पक्का करने के बाद मीडिया से बातचीत में भारतीय खिलाड़ियों ने एक सुर में स्वीकार किया कि एशियन गेम्स में बैडमिंटन की प्रतिस्पर्धा का स्तर बेहद ऊंचा और मानसिक रूप से थका देने वाला होता है, जहां पहले राउंड से ही दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों से भिड़ंत होती है।
'ओलंपिक से भी कड़ा है मुकाबला': खिलाड़ियों ने बयां की चुनौती
भारतीय दल के वरिष्ठ और युवा खिलाड़ियों ने महाद्वीपीय खेलों की गहराई और कड़े स्तर को रेखांकित किया:
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एशिया में बैडमिंटन की बादशाहत: खिलाड़ियों ने कहा, "बैडमिंटन में दुनिया की शीर्ष शक्तियां—चीन, इंडोनेशिया, दक्षिण कोरिया, जापान, मलेशिया, चीनी ताइपे और थाईलैंड—सभी एशिया में हैं। विश्व रैंकिंग के शीर्ष 10 या 15 खिलाड़ियों में से 80-90% खिलाड़ी इसी महाद्वीप से आते हैं। इसलिए एशियन गेम्स में कभी भी कोई 'हल्का' ड्रॉ या आसान मैच नहीं मिलता।"
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हर अंक के लिए शारीरिक और मानसिक संघर्ष: शटलर्स ने बताया कि टीम इवेंट में हर मैच 70 से 80 मिनट तक खिंचता है, जहां कोर्ट पर गति, हवा (ड्रिफ्ट) का प्रभाव और दर्शकों के दबाव के बीच खुद को शांत रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है।
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ब्रॉन्ज मेडल का महत्व: खिलाड़ियों ने कहा कि भले ही लक्ष्य गोल्ड या सिल्वर का था, लेकिन इस स्तर पर पोडियम तक पहुंचना और देश की झोली में पदक डालना गर्व की बात है।
टीम इवेंट का सफर: क्वार्टर फाइनल में दम, सेमीफाइनल में कड़ा इम्तिहान
भारतीय टीम ने पूरे टूर्नामेंट में बेहतरीन टीम स्पिरिट दिखाई:
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क्वार्टर फाइनल में धमाकेदार प्रदर्शन: भारतीय टीम ने क्वार्टर फाइनल में एक मजबूत एशियाई प्रतिद्वंद्वी को हराकर मेडल राउंड में अपनी जगह सुनिश्चित की थी।
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सेमीफाइनल का कांटे का मुकाबला: सेमीफाइनल मुकाबले में भारतीय टीम को कड़े संघर्ष के बाद हार का सामना करना पड़ा। एकल और युगल दोनों ही मैचों में लंबी रैलियां और कड़े मुकाबले देखने को मिले, लेकिन निर्णायक पलों में विरोधी टीम ने बाजी मार ली।
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कांस्य पदक पक्का: नियमों के मुताबिक सेमीफाइनल में पहुंचने वाली दोनों पराजित टीमों को कांस्य पदक प्रदान किया जाता है, जिसके तहत भारत ने यह पदक अपने नाम किया।
अब व्यक्तिगत (Individual) स्पर्धाओं पर नजर
टीम इवेंट में पदक जीतने के बाद अब भारतीय दल का पूरा ध्यान व्यक्तिगत एकल और युगल स्पर्धाओं पर टिक गया है:
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सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी: भारत की स्टार युगल जोड़ी अपने स्वर्ण पदक के बचाव और नए रिकॉर्ड के लिए कोर्ट पर उतरेगी।
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एकल वर्ग में लक्ष्य सेन और एच.एस. प्रणय: एकल खिलाड़ियों ने कहा कि टीम स्पर्धा के मैचों ने उन्हें कोर्ट की परिस्थितियों और ड्रिफ्ट को समझने में काफी मदद की है, जिसका फायदा उन्हें व्यक्तिगत मुकाबलों में मिलेगा।
खिलाड़ियों ने देशवासियों और बैडमिंटन प्रेमियों को उनके समर्थन के लिए धन्यवाद दिया और विश्वास जताया कि व्यक्तिगत स्पर्धाओं में भी भारत पदकों का रंग और बेहतर करने की पूरी कोशिश करेगा।
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