आईसीएसआई स्थापना दिवस पर उपराष्ट्रपति का आह्वान

Oct 04, 2026 - 17:47
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आईसीएसआई स्थापना दिवस पर उपराष्ट्रपति का आह्वान
Vice President's call on ICSI Foundation Day

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने रविवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया (आईसीएसआई) के 58वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित किया। उन्होंने आईसीएसआई परिवार को शुभकामनाएं देते हुए पारदर्शी, नैतिक और समावेशी कॉर्पोरेट गवर्नेंस को मजबूत करने की दिशा में संस्थान की लगभग छह दशकों की यात्रा की सराहना की।

कॉर्पोरेट पारदर्शिता और विकास में अहम भूमिका

सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि संस्थान का रूपांतरण पेशे के विकास को दर्शाता है, जो आज कॉर्पोरेट पारदर्शिता, निवेशकों के विश्वास और वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

एआई के दौर में कंपनी सचिवों की जिम्मेदारी

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), उन्नत डेटा विश्लेषण और तेजी से विकसित हो रहे व्यावसायिक मॉडलों के इस युग में उपराष्ट्रपति ने कंपनी सचिवों से, 'शासन के संरक्षक' के रूप में, भारत की कंपनियों की कानूनी, रणनीतिक और नैतिक नींव को बनाए रखने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा, "प्रौद्योगिकी सूचना उत्पन्न करने और निर्णयों का समर्थन करने के तरीके को बदल सकती है, लेकिन सत्यनिष्ठा, जवाबदेही, पारदर्शिता और जिम्मेदारी मानवीय ही रहती है।"

अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार: भरोसा और पारदर्शिता

सीपी राधाकृष्णन ने विश्वास, पारदर्शिता और कॉर्पोरेट गवर्नेंस को आधुनिक अर्थव्यवस्था का 'अदृश्य ढांचा' बताते हुए कहा कि सतत आर्थिक प्रगति के लिए निवेशकों का विश्वास आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कंपनी सचिव इस ढांचे के केंद्र में हैं और उद्यमों, स्टार्टअप्स, पारिवारिक व्यवसायों और सूचीबद्ध कंपनियों को जिम्मेदारी से विकसित होने में सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

विकसित भारत 2047 के प्रमुख स्तंभ

राधाकृष्णन ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में मजबूत संस्थान और सुशासन भौतिक और डिजिटल बुनियादी ढांचे जितने ही महत्वपूर्ण होंगे। उन्होंने भारत के 2047 तक के विकसित भारत के सफर में आईसीएआई, आईसीएमएआई और आईसीएसआई की पूरक भूमिका पर जोर देते हुए इन पेशेवर संस्थानों को एक मजबूत कॉर्पोरेट और आर्थिक पारिस्थितिकी तंत्र का प्रमुख स्तंभ बताया।

एमएसएमई कैलेंडर 2027 और नई पहलों की शुरुआत

उपराष्ट्रपति ने युवाओं को इस पेशे में प्रवेश करने के अधिक अवसर प्रदान करने का आह्वान करते हुए आईसीएसआई की शुल्क माफी पहलों की सराहना की और छात्रों तक निरंतर पहुंच बनाए रखने का आग्रह किया। उन्होंने एमएसएमई अनुपालन कैलेंडर 2027 का शुभारंभ किया और आईसीएसआई एमएसएमई और स्टार्ट-अप कैटलिस्ट सहित एमएसएमई और स्टार्टअप के लिए आईसीएसआई की पहलों की प्रशंसा की।

रक्षा कोष में योगदान की सराहना

उन्होंने शहीद की बेटी पहल के तहत राष्ट्रीय रक्षा कोष और रक्षा मंत्रालय के सशस्त्र सेना ध्वज दिवस कोष में आईसीएसआई के योगदान की भी सराहना करते हुए कहा, "जब इरादा अच्छा होता है, तो सब कुछ अच्छा होता है।"

उपराष्ट्रपति ने आईसीएसआई से इस पेशे में रखे गए विश्वास को बनाए रखने और एक मजबूत, आत्मनिर्भर और 2047 तक के विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।

सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य

उन्होंने कहा कि भारत को विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य रखना चाहिए, न कि दूसरों पर शर्तें थोपने के लिए, बल्कि इसलिए कि कोई भी हम पर अवांछित शर्तें न थोप सके। उन्होंने 'सत्यम वदा, धर्मम चर' के चिरपरिचित सिद्धांत का आह्वान किया और आईसीएसआई के स्थापना दिवस पर सभी सदस्यों को शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम में गणमान्य हस्तियां रहीं मौजूद

इस अवसर पर आईसीएसआई के अध्यक्ष, सीएस पवन चंदक; राज्यसभा की पूर्व सांसद, डॉ. सोनल मानसिंह; और आईसीएसआई के सचिव, सीएस आशीष मोहन सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

इनपुट : आईएएनएस

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