मॉस्को पर यूक्रेन का सबसे बड़ा हमला सैकड़ों ड्रोन दागे, तेल रिफाइनरी और रिहायशी इमारत बनी निशाना
रूस-यूक्रेन जंग में एक बार फिर बड़ा मोड़ आया है। यूक्रेन ने मॉस्को क्षेत्र पर अब तक का अपना सबसे बड़ा ड्रोन हमला किया है, जिसमें शहर की प्रमुख तेल रिफाइनरी और एक रिहायशी इमारत को निशाना बनाया गया। मॉस्को के मेयर सर्गेई सोब्यानिन ने बताया कि राजधानी की ओर बढ़ रहे 450 ड्रोन को मार गिराया गया, और इसे उन्होंने "अब तक का सबसे बड़ा" हमला बताया। क्षेत्रीय गवर्नर के मुताबिक इस हमले में कम से कम दो लोगों की मौत हुई और 20 लोग घायल हुए हैं।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने भी इस हमले की पुष्टि करते हुए बताया कि कीव ने ड्रोन और मिसाइलों के जरिए रूस की एक "अहम" तेल सुविधा और एक लॉजिस्टिक्स साइट को निशाना बनाया है, जो उनके मुताबिक "अरबों डॉलर की उस मशीनरी का हिस्सा है जो रूस की जंग को चलाए रखती है।"
कीव और सुमी में भी रूसी हमलों से नौ लोगों की मौत
इस बीच यूक्रेनी अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को कीव और सुमी क्षेत्रों में हुए रूसी हमलों में नौ लोगों की जान चली गई, जिनमें तीन बच्चे भी शामिल हैं। हाल के दिनों में रूस और यूक्रेन दोनों ने ही एक-दूसरे पर हमले और तेज कर दिए हैं, और खासतौर पर ऊर्जा उत्पादन केंद्रों, ट्रांसपोर्ट सुविधाओं और बड़े लॉजिस्टिक्स हब को निशाना बनाया जा रहा है।
रूस के सोफ्यीनो इलाके में रविवार को एक ड्रोन हमले में तीन मंजिला रिहायशी इमारत को निशाना बनाया गया, जिसमें 44 साल की एक महिला की मौत हो गई। क्षेत्रीय प्रमुख आंद्रेई वोरोब्योव के मुताबिक इस हमले में दो बच्चों समेत पांच और लोग घायल हुए। इसके अलावा ओरेखोवो-जुयेवो जिले में एक निजी घर पर हमले में एक बुजुर्ग व्यक्ति की भी मौत हो गई।
सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो सामने आए हैं जिनमें मॉस्को के आसमान में रात के वक्त धमाके और एक गोदाम में लगी आग दिखाई दे रही है, हालांकि इन वीडियो की पुष्टि नहीं हो सकी है।
तेल रिफाइनरी पर हमला रूस की सैन्य सप्लाई को झटका
मेयर सोब्यानिन के मुताबिक एक ड्रोन ने राजधानी के एक बुलेवार्ड के पास स्थित इमारत के साथ-साथ तेल रिफाइनरी को भी निशाना बनाया, जहां यूक्रेनी सैन्य अधिकारियों के अनुसार तीन अहम यूनिट्स को नुकसान पहुंचा है। कीव के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक यह रिफाइनरी मॉस्को क्षेत्र की एक-तिहाई से ज्यादा ईंधन जरूरतें पूरी करती है, और इसका पेट्रोल, डीजल व विमान ईंधन का कुछ हिस्सा सीधे रूसी सेना तक पहुंचता है। यूक्रेन के रक्षा मंत्री ने कहा कि ऐसी सुविधाओं पर हमला "दुश्मन की आक्रामक जंग जारी रखने और अपनी सैन्य टुकड़ियों को सप्लाई करने की क्षमता को सीधे कमजोर करता है।"
चुनाव के बीच हमला रूस का आरोप
मेयर सोब्यानिन ने इस बड़े हमले को रूस के संसदीय चुनाव को बाधित करने की कोशिश करार दिया, जो रविवार को अपने तीसरे दिन में था। यह चुनाव क्रेमलिन के सख्त नियंत्रण में हुआ है और आलोचक इसे न तो स्वतंत्र, न निष्पक्ष और न ही पारदर्शी मानते हैं।
रूसी सरकारी मीडिया ने यह भी दावा किया कि रविवार को यूक्रेन के खेरसॉन क्षेत्र के रूस-नियंत्रित हिस्से में एक बस पर हुए ड्रोन हमले में मारे गए दो लोगों में से एक चुनाव अधिकारी था, यह जानकारी रूस के चुनाव आयोग प्रमुख के हवाले से दी गई।
इस बीच मॉस्को के सबसे बड़े एयरपोर्ट शेरेमेत्येवो ने यात्रियों को रातभर के लिए "अस्थायी प्रतिबंधों" की चेतावनी दी, जबकि राजधानी के वनूकोवो एयरपोर्ट पर सभी आगमन और प्रस्थान पूरी तरह रोक दिए गए थे। रविवार सुबह तक दोनों एयरपोर्ट्स पर पाबंदियां हटा ली गईं, हालांकि कुछ फ्लाइट्स में देरी की आशंका जताई गई है।
यूक्रेन में भी मासूमों की जान गई
इससे पहले शनिवार को कीव के फास्तिव शहर में एक रूसी हमले में एक मां और उसके दो छोटे बच्चों एक बेटा और एक बेटी की मौत हो गई थी, यह जानकारी क्षेत्रीय प्रमुख तिमुर टकाचेंको ने दी। उन्होंने बताद में बताया कि कीव के उत्तर में स्थित वैशहोरोद में हुए एक अलग हमले में घायल हुए एक बच्चे की भी अस्पताल में मौत हो गई।
उत्तर-पूर्वी सुमी क्षेत्र में एक रूसी ड्रोन ने एक गाड़ी को निशाना बनाया, जिसमें सवार चार लोगों की मौत हो गई यह जानकारी स्थानीय अधिकारी ओलेह ह्रिहोरोव ने दी। इसके अलावा राष्ट्रपति जेलेंस्की के मुताबिक शनिवार को रूस ने खेरसॉन क्षेत्र में एक मठ पर भी ड्रोन हमला किया, जिसमें एक धर्मगुरु की मौत हो गई और चार अन्य घायल हुए।
ट्रंप के दावे के बावजूद जारी हैं हमले
गौरतलब है कि पिछले एक हफ्ते में रूस और यूक्रेन दोनों ने ही एक-दूसरे के ऊर्जा ढांचे को लगातार निशाना बनाया है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया था कि दोनों पक्षों में ऐसा न करने पर सहमति बनी थी। शुक्रवार को ट्रंप ने एक प्रतिबंध बिल पर भी दस्तखत किए, जिसका मकसद रूस के तेल और गैस के सबसे बड़े खरीदारों जिनमें चीन और भारत भी शामिल हैं पर टैरिफ लगाकर रूस की अर्थव्यवस्था को निशाना बनाना है। इस कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूसी ऊर्जा के बड़े खरीदारों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल गया है।
बता दें कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर हमला शुरू किया था, और तब से यह जंग लगातार जारी है।
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