भारत-इटली संबंधों का बढ़ा दायरा, व्यापार से रक्षा और आईएमईसी तक साझेदारी पर जोर

Sep 20, 2026 - 18:01
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भारत-इटली संबंधों का बढ़ा दायरा, व्यापार से रक्षा और आईएमईसी तक साझेदारी पर जोर
India Italy Ties

रोम। भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता हस्ताक्षर की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसी बीच भारत और इटली के संबंध भी एक ऐसे चरण में प्रवेश कर गए हैं, जहां दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को ठोस नतीजों में बदलने की उत्सुकता बढ़ रही है।

इटली की राजधानी रोम स्थित जॉन कैबोट यूनिवर्सिटी (जेसीयू) ने हाल में भारत-इटली संबंधों पर पहले ट्रैक 1.5 संवाद का आयोजन किया। ग्वारिनी इंस्टीट्यूट फॉर पब्लिक अफेयर्स की ओर से आयोजित इस संवाद में दोनों देशों के संबंधों में पिछले कुछ वर्षों में आए बदलाव और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा की गई।

डिकोड39 की रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोपीय संघ भारत के साथ अपने जुड़ाव को तेजी से आगे बढ़ा रहा है, वहीं रोम और नई दिल्ली के द्विपक्षीय संबंध भी हाल के वर्षों में तेजी से बदले हैं।

भारत और इटली ने 2023 में रणनीतिक साझेदारी स्थापित की थी। इसके बाद 2024 में दोनों देशों ने 2025 से 2029 की अवधि के लिए संयुक्त रणनीतिक कार्ययोजना अपनाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मई में इटली यात्रा के दौरान दोनों देशों के संबंधों को विशेष रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया गया।

नए ढांचे के तहत विदेश मंत्रियों की अगुवाई वाला तंत्र संयुक्त रणनीतिक कार्ययोजना के क्रियान्वयन की निगरानी करेगा और दोनों देशों के संबंधों को रणनीतिक दिशा देगा।

रोम में आयोजित पहले भारत-इटली ट्रैक 1.5 संवाद के सार्वजनिक कार्यक्रम में इटली में भारत की राजदूत वाणी राव ने भी हिस्सा लिया। चर्चा चाथम हाउस नियम के तहत हुई, जिसमें दोनों देशों के बीच संबंधों के बदलते स्वरूप पर विचार किया गया। भारत और इटली 2027 में राजनयिक संबंधों की 80वीं वर्षगांठ मनाने जा रहे हैं।

संवाद में दोनों देशों के आर्थिक संबंधों की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और इटली के बीच आर्थिक सहयोग की क्षमता मौजूदा बुनियादी ढांचे और व्यापार से कहीं अधिक है। वित्तीय संस्थान दोनों देशों के बीच व्यापार को सुविधाजनक बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि गैर-टैरिफ बाधाएं और नियामकीय अंतर अभी भी आर्थिक एकीकरण को गहरा करने में चुनौती बने हुए हैं।

रक्षा क्षेत्र में भी भारत-इटली सहयोग का दायरा लगातार बढ़ा है। दोनों देशों के बीच मिलिट्री एक्सचेंज, रक्षा खरीद, अनुसंधान एवं विकास तथा औद्योगिक साझेदारी शामिल हो चुकी है। भारतीय और इतालवी नौसेनाओं के बीच पोर्ट कॉल और प्रशिक्षण गतिविधियां भी होती रही हैं।

भारत और इटली की भौगोलिक स्थिति भी दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को खास महत्व देती है। दोनों देश उस व्यापक समुद्री क्षेत्र से जुड़े हैं, जो हिंद-प्रशांत को मध्य पूर्व और यूरोप से जोड़ता है। इस क्षेत्र में समुद्री मार्गों की सुरक्षा दोनों देशों के लिए आर्थिक और सुरक्षा हितों से जुड़ी है।

इसी संदर्भ में भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (आईएमईसी) महत्वपूर्ण हो जाता है। इटली के लिए आईएमईसी हिंद-प्रशांत में उसके बढ़ते जुड़ाव और भूमध्यसागर में उसकी पारंपरिक भूमिका के बीच एक भौगोलिक संपर्क प्रदान करता है। वहीं भारत के लिए यह खाड़ी और भूमध्यसागर के रास्ते यूरोपीय बाजारों के साथ संपर्क मजबूत करने का एक अतिरिक्त माध्यम है।

डिकोड39 की रिपोर्ट में ग्वारिनी इंस्टीट्यूट के इमानुएल रॉसी ने कहा कि 2027 में राजनयिक संबंधों की 80वीं वर्षगांठ और सांस्कृतिक पर्यटन को समर्पित वर्ष दोनों देशों को मौजूदा आधार को और व्यापक बनाने का अवसर देंगे। उन्होंने कहा कि ग्वारिनी इंस्टीट्यूट अगले साल जॉन कैबोट यूनिवर्सिटी में पहले ट्रैक 1.5 संवाद के आधार पर एक बड़ी पहल शुरू करने की योजना बना रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत-इटली संबंधों के सामने अब केवल दोस्ती और सहयोग की प्रतिबद्धता दोहराने की चुनौती नहीं है, बल्कि विशेष रणनीतिक साझेदारी को व्यवहार में ठोस उपलब्धियों में बदलने की चुनौती है। दोनों देशों ने 2029 तक की संयुक्त रणनीतिक कार्ययोजना बनाई है और द्विपक्षीय व्यापार के लिए 20 अरब यूरो का लक्ष्य रखा है। इसके साथ रक्षा सहयोग, भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते और आईएमईसी जैसे बड़े आर्थिक एवं रणनीतिक मुद्दे भी संबंधों के व्यापक ढांचे का हिस्सा हैं।

इनपुट : आईएएनएस

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