शिवसेना यूबीटी ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना; कागजों पर जीडीपी में वृद्धि, असलियत में गिर रहा बाजार

Sep 11, 2026 - 16:45
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शिवसेना यूबीटी ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना; कागजों पर जीडीपी में वृद्धि, असलियत में गिर रहा बाजार

मुंबई। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने शुक्रवार को भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर निशाना साधा। पार्टी ने 7.8 प्रतिशत की जीडीपी ग्रोथ रेट के बड़े-बड़े दावों और दूसरी तरफ भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट व लगातार विदेशी पूंजी की निकासी के बीच साफ विरोधाभास पर सवाल उठाए। शिवसेना (यूबीटी) ने अपने मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में कहा, "यह केंद्र सरकार का विकास मॉडल है।" इसमें शेयर बाजार के गिरने, पूंजी के बाहर जाने और महंगाई के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया गया।

ठाकरे गुट ने कहा कि भाजपा सरकार में जीडीपी में 7.8 प्रतिशत की रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है लेकिन न तो शेयर बाजार ऊपर गया, न निवेशकों का फायदा बढ़ा, न महंगाई कम हुई और न ही सरकार की "मुफ्त" अनाज योजना के तहत आने वाले ग़रीब परिवारों की संख्या में कमी आई।

पार्टी ने कहा, "पीएम मोदी जितना ज्यादा जीडीपी ग्रोथ का आंकड़ा बढ़ाते हैं, आम लोगों को शेयर बाजार में होने वाले नुकसान, विदेशी निवेश की निकासी, महंगाई और कीमतों में बढ़ोतरी के आंकड़े भी उतने ही बढ़ते जाते हैं। देश की मौजूदा हालत यह है कि जीडीपी तो बढ़ी, लेकिन भारतीय बाजार गिर गया।"

संपादकीय में कहा गया कि भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का दौर जारी रहा, जिससे निवेशकों की लाखों करोड़ की संपत्ति डूब गई। बुधवार को सेंसेक्स लगातार तीसरे सेशन में 75,000 के स्तर से नीचे गिर गया, जिससे निवेशकों को 4 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। साथ ही, निफ्टी भी तीन महीने के निचले स्तर पर आ गया।

संपादकीय में कहा गया है, "हालांकि सरकार इस गिरावट के लिए ग्लोबल वजहों, जैसे अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाना और अमेरिकी सरकारी बॉन्ड मार्केट में बिकवाली को जिम्मेदार ठहरा सकती है, लेकिन ये सिर्फ कुछ समय के लिए दिए जाने वाले बहाने हैं। असल बात यह है कि बाजार में कमजोरी कई हफ्तों से बनी हुई है।"

संपादकीय में आगे कहा गया है कि विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआईएस) "तेजी से बढ़ती जीडीपी" के आंकड़ों पर भरोसा नहीं दिखा रहे हैं। नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) के डेटा के मुताबिक, एफआईआईएस ने सिर्फ पिछले दस दिनों में 6,000 करोड़ रुपये से अधिक की रकम निकाली है। अकेले सितंबर के पहले चार दिनों में विदेशी निवेशकों ने 7,500 करोड़ रुपये निकाले। चालू वर्ष में कुल विदेशी पूंजी की निकासी 2.32 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जो 2025 में दर्ज की गई निकासी से 1.66 लाख करोड़ रुपये अधिक है।

उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना ने कहा कि अर्थव्यवस्था में "तेज रफ्तार" के दावों के बावजूद, जमीनी स्तर पर अहम संकेत चिंताजनक बने हुए हैं। ठेकेदारों का हज़ारों करोड़ रुपये का बकाया अभी भी नहीं चुकाया गया है। जरूरी चीजों की महंगाई और सामान की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। सरकार की मुफ्त अनाज वितरण योजना पर निर्भर गरीब परिवारों की संख्या में कमी के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं।"

संपादकीय में पूछा गया, "जीडीपी ग्रोथ का ढिंढोरा पीटते हुए पीएम मोदी ने दावा किया था कि भारतीय अर्थव्यवस्था 'गतिशील' हो गई है। शेयर बाजार में वह गतिशीलता कहां गायब हो गई है? विदेशी निवेशक भारत से अपना पैसा निकालने में इतने 'गतिशील' क्यों हो गए हैं?"

ठाकरे गुट ने दावा किया कि देश अभी एक अजीब स्थिति में है, जहां कागजों पर तो जीडीपी बढ़ती है, लेकिन असलियत में भारतीय बाजार गिर जाता है।

पार्टी ने कहा, "जैसे-जैसे सरकार जीडीपी के आंकड़े बढ़ा-चढ़ाकर दिखाती है, वैसे-वैसे आम निवेशकों के नुकसान, विदेशी पूंजी की निकासी और बढ़ती महंगाई के आंकड़े भी उसी रफ्तार से बढ़ते जाते हैं। यही पीएम मोदी का विकास का मॉडल है!"

 इनपुट : आईएएनएस

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