उत्तर कोरिया ने पूर्वी सागर में दागीं दो संदिग्ध बैलिस्टिक मिसाइलें; जापान और दक्षिण कोरिया में हाई अलर्ट
उत्तर कोरिया ने रविवार को अपने पूर्वी तटीय शहर वोनसान (Wonsan) क्षेत्र से पूर्वी सागर (जापान सागर) की ओर दो संदिग्ध कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण कर कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव को फिर बढ़ा दिया है। जापानी रक्षा मंत्रालय और दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ (JCS) के अनुसार, पहली मिसाइल ने करीब 60 किमी की अधिकतम ऊंचाई पर 440 किमी की दूरी तय की, जबकि दूसरी मिसाइल 600 किमी से अधिक उड़कर समुद्र में जा गिरी। जानिए उत्तर कोरिया के मिसाइल परीक्षण, मिसाइल रेंज और तीनों देशों की सामरिक तैयारियों पर पूरी विस्तृत रिपोर्ट।
सियोल/टोक्यो: उत्तर कोरिया ने रविवार तड़के एक बार फिर कोरियाई प्रायद्वीप में रणनीतिक तनाव को बढ़ाते हुए अपने पूर्वी तटीय क्षेत्र से दो संदिग्ध बैलिस्टिक मिसाइलों का प्रक्षेपण किया है। दक्षिण कोरियाई सेना और जापानी रक्षा अधिकारियों के अनुसार, दोनों मिसाइलें वोनसान (Wonsan) इलाके से पूर्वी सागर (Sea of Japan) की दिशा में दागी गईं, जो निर्धारित दूरी तय करने के बाद खुले समुद्र में गिरीं।
इस महीने प्योंगयांग द्वारा की जा रही निरंतर हथियारों की टेस्टिंग के बीच हुए इस ताजा प्रक्षेपण के बाद पूरे क्षेत्र में निगरानी तंत्र को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
मिसाइल परीक्षण के तकनीकी आंकड़े और रेंज
दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ (JCS) और जापान के रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी संयुक्त विश्लेषण में मिसाइलों के उड़ान पथ का ब्योरा दिया गया:
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पहली मिसाइल: इसने पूर्वोत्तर दिशा में लगभग 60 किलोमीटर की अधिकतम ऊंचाई (Apogee) हासिल की और करीब 450 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद जापानी विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) से बाहर समुद्र में गिरी।
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दूसरी मिसाइल: कुछ ही अंतराल के बाद दागी गई दूसरी मिसाइल ने 600 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की, जो दक्षिण कोरिया के संपूर्ण मुख्य भूभाग को अपनी जद में लेने की क्षमता दर्शाती है।
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शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (SRBM): प्रारंभिक रक्षा आकलनों से संकेत मिलता है कि ये उत्तर कोरिया की ठोस-ईंधन (Solid-Fuel) चालित केएन-सीरीज (KN-series) की आधुनिक कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें हो सकती हैं, जिन्हें त्वरित तैनाती के लिए डिजाइन किया गया है।
जापान और दक्षिण कोरिया में आपातकालीन अलर्ट
प्रक्षेपण दर्ज होते ही जापानी प्रधानमंत्री कार्यालय के संकट प्रबंधन केंद्र ने तुरंत आपातकालीन निर्देश जारी किए:
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विमानों और पोतों के लिए चेतावनी: जापान कोस्ट गार्ड ने पूर्वी सागर से गुजरने वाले सभी नागरिक विमानों और व्यापारिक जहाजों को नेविगेशनल चेतावनी (Navigational Warnings) जारी कर सुरक्षित दूरी बनाए रखने के निर्देश दिए। हालांकि, किसी भी पोत को नुकसान पहुंचने की कोई खबर नहीं है।
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यूएनएससी प्रस्तावों का खुला उल्लंघन: टोक्यो ने बीजिंग स्थित राजनयिक चैनलों के माध्यम से प्योंगयांग के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया। जापानी रक्षा अधिकारियों ने कहा कि उत्तर कोरिया का यह कदम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रासंगिक प्रस्तावों का खुला उल्लंघन है और यह क्षेत्रीय शांति व अंतरराष्ट्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है।
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अमेरिका-सियोल-टोक्यो त्रिपक्षीय समन्वय: दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान ने रियल-टाइम मिसाइल वार्निंग डेटा साझा किया और संयुक्त रक्षा तंत्र के तहत प्योंगयांग की संभावित अगली गतिविधियों पर 24 घंटे निगरानी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।
कोरियाई प्रायद्वीप में बढ़ता गतिरोध
यह परीक्षण ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका और उसके सहयोगी दक्षिण कोरिया व जापान लगातार संयुक्त सैन्य अभ्यास कर रहे हैं, जिसे उत्तर कोरिया अपने ऊपर आक्रमण का पूर्वाभ्यास मानता है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर कोरिया अपने मिसाइल परीक्षणों के जरिए न केवल अपनी मारक क्षमता को धार दे रहा है, बल्कि अमेरिका और क्षेत्रीय शक्तियों पर भू-राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति पर भी काम कर रहा है।
दक्षिण कोरियाई सेना ने स्पष्ट किया है कि वह वाशिंगटन के साथ मजबूत संयुक्त रक्षा मुद्रा (Combined Defence Posture) बनाए रखे हुए है और किसी भी उकसावे का निर्णायक जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
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