हरजिंदर कौर: कबड्डी छोड़ चुनी वेटलिफ्टिंग, लगातार 2 कॉमनवेल्थ गेम्स में देश के लिए जीते पदक
नई दिल्ली । भारतीय महिला वेटलिफ्टिंग में हरजिंदर कौर का नाम काफी लोकप्रिय है। हरजिंदर ने लगातार दो कॉमनवेल्थ गेम्स में देश के लिए पदक जीते हैं।
हरजिंदर कौर: संघर्ष से सफलता तक का सफर
हरजिंदर कौर का जन्म 14 अक्टूबर 1996 को पंजाब के पटियाला जिले में नाभा के पास मेहास में हुआ था। हरजिंदर का परिवार खेती से जुड़ा रहा है। शुरुआत में हरजिंदर कबड्डी खेला करती थीं और प्रशिक्षण के लिए प्रतिदिन 5 किलोमीटर साइकिल चलाकर सेंटर जाया करती थीं।
परिवार की आर्थिक तंगी के कारण उन्हें प्रशिक्षण छोड़ना पड़ा। वेटलिफ्टिंग में हरजिंदर काफी देर से आईं। 2016 में पटियाला में पंजाबी यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान उन्होंने वेटलिफ्टिंग शुरू की।
राज्य स्तरीय और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में दमदार प्रदर्शन के बाद हरजिंदर कौर को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला। कौर ने 2021 में ताशकंद में आयोजित कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में महिलाओं की 71 किग्रा कैटेगरी में रजत पदक जीता था।
इसके बाद 2022 में बर्मिंघम में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में महिलाओं के 71 किग्रा इवेंट में उन्होंने कांस्य पदक जीता था। हरजिंदर ने हाल ही में ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 69 किग्रा भारवर्ग में रजत पदक जीता है।
हरजिंदर कौर: संघर्ष से सफलता तक का सफर
हरजिंदर एशियन गेम्स 2026 में भारतीय दल का हिस्सा थीं। कड़ी तैयारी के साथ जापान के आइची-नागोया पहुँची हरजिंदर पदक जीतने में सफल नहीं हो सकीं। 69 किग्रा भारवर्ग में वह नौवें स्थान पर रहीं। हरजिंदर ने पदक न जीत पाने पर अफसोस जताया था।
एशियन गेम्स 2026 में वेटलिफ्टिंग में मीराबाई चानू ने गोल्ड मेडल जीता था। हरजिंदर मीराबाई चानू को बेहद पसंद करती हैं और उनके जैसी सफलता हासिल करने के उद्देश्य से आगे बढ़ रही हैं।
पटियाला के एक गरीब परिवार से होने के बावजूद वेटलिफ्टिंग के क्षेत्र में हरजिंदर कौर ने जो सफलता हासिल की है, वह न सिर्फ महिलाओं के लिए बल्कि हर उस युवा के लिए प्रेरणादायी है, जो आर्थिक विपन्नता झेलते हुए जिंदगी में बड़े सपने देखता है और उन्हें हासिल करने के लिए कड़ा संघर्ष करता है।
इनपुट : आईएएनएस
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