14 अक्टूबर का पंचांग: मां के चौथे स्वरूप कूष्मांडा की पूजा
नई दिल्ली । हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है, जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है।
14 अक्टूबर 2026 को आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि रात 1:13 बजे तक रहेगी। इसके बाद पंचमी तिथि शुरू हो जाएगी। बुधवार को सुबह 6:27 बजे सूर्योदय और शाम 5:58 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं, सुबह 9:36 बजे चंद्रोदय और रात 8:21 बजे चंद्रास्त होगा।
14 अक्टूबर 2026 (मंगलवार) को शारदीय नवरात्र का चौथा दिन है। इस दिन मां कूष्मांडा की आराधना की जाती है। देवी कूष्मांडा की पूजा करने से आयु, यश, बल और स्वास्थ्य बढ़ता है। मां कुष्मांडा की आठ भुजाएं हैं, जिसके कारण इन्हें 'अष्टभुजा देवी' भी कहते हैं। इनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल का पुष्प, अमृत से भरा कलश, चक्र, गदा और जप की माला है। मां की सवारी सिंह (बाघ) है।
इस दिन सूर्य देव चित्रा नक्षत्र में रहेंगे। ज्योतिष के अनुसार, जब सूर्य देव चित्रा नक्षत्र में प्रवेश करते हैं या इस नक्षत्र में स्थित होते हैं, तो इसके विशेष और गहरे प्रभाव देखने को मिलते हैं। चित्रा नक्षत्र के स्वामी मंगल ग्रह हैं, जिन्हें सूर्य का मित्र माना जाता है। सूर्य और मंगल के इस मेल से व्यक्ति के भीतर गजब का आत्मविश्वास, साहस, पराक्रम और ऊर्जा बढ़ती है। नौकरीपेशा लोगों के काम की उच्च अधिकारियों द्वारा सराहना होती है। प्रशासन, उच्च पदों या प्रबंधन से जुड़े लोगों को विशेष लाभ, नई जिम्मेदारी या प्रमोशन मिल सकते हैं।
मंगलवार को रात 8:38 बजे तक आयुष्मान योग रहेगा। ज्योतिष के अनुसार, आयुष्मान योग एक अत्यंत शुभ और तीसरा नित्य योग है, जिसका अर्थ 'लंबी आयु' या 'चिरंजीवी' होता है। जब सूर्य और चंद्रमा की दूरियों की गणना के अनुसार उनका योग 26 अंश 40 कला से 40 अंश 00 कला के बीच होता है, तब यह योग बनता है। इस योग के अधिष्ठाता देवता चंद्रमा (सोम) हैं और इसका प्रमुख ग्रह केतु माना जाता है।
इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:43 से दोपहर 12:30 बजे तक रहेगा। मंगलवार को शाम 4:37 से 6:23 बजे तक अमृतकाल रहेगा। इस दिन राहुकाल दोपहर 12:12 बजे से 1:39 बजे तक रहेगा। मंगलवार को गुलिक काल सुबह 10:46 से दोपहर 12:12 बजे तक रहेगा।
इस दिन यमगंड काल सुबह 7:53 से 9:20 बजे तक रहेगा। यह समय मृत्यु के देवता यमराज से जुड़ा हुआ माना जाता है। इस समय के दौरान स्वास्थ्य, दीर्घायु, या सामान्य दुर्भाग्य से संबंधित बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। इस काल को नए कार्यों की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है। नया व्यापार या नया काम शुरू करने से बचना चाहिए। इस दौरान किसी यात्रा पर भी निकलने और पैसों के लेनदेन से भी बचना चाहिए।मंगलवार को सूर्य देव कन्या राशि में स्थित रहेंगे। इस दिन चंद्रमा वृश्चिक राशि में रहेगा।
मंगलवार को दिशाशूल उत्तर दिशा में रहेगा। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, दिशाशूल उस दिशा को कहते हैं, जिसमें किसी खास दिन यात्रा करना या निकलना अशुभ माना जाता है।
इनपुट : आईएएनएस
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