अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से लिया संन्यास, मायावती को लिखा पत्र, कहा-दुनिया से बढ़कर आपका आदेश

Sep 10, 2026 - 11:49
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अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से लिया संन्यास, मायावती को लिखा पत्र, कहा-दुनिया से बढ़कर आपका आदेश

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) में जारी सियासी उठापटक के बीच वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सदस्य अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति और सामाजिक जीवन से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने पार्टी सुप्रीमो मायावती को टैग करते हुए 'एक्स' पर एक पत्र लिखा है। 

उन्होंने लिखा, "आपको अवगत कराना है कि मेरे लिए आपका आदेश दुनिया की किसी भी चीज से बढ़कर है। आपके आदेश के आगे मेरे रिश्ते-नाते, परिवार सभी बेहद छोटे हैं। वे पिछले 35 वर्षों से बीएसपी और मान्यवर साहेब कांशीराम और बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के मिशन के लिए समर्पित रहे हैं। आप मेरी राजनीतिक गुरु हैं, मेरी बड़ी बहन हैं। आपने मुझ जैसे अदने से व्यक्ति को क्या कुछ नहीं दिया। आपकी वजह से ही मैं विधान परिषद और राज्यसभा तक का सदस्य रहा हूं। आपने मुझे इस लायक समझा कि मुझ जैसे मामूली कार्यकर्ता को अपने परिवार का सदस्य बनाया। ये आपका ऋण है जो मैं इस जीवन में चुका भी नहीं सकता।"

उन्होंने तथागत भगवान गौतम बुद्ध और कांशीराम की कसम खाते हुए कहा कि उन्होंने कभी पार्टी के हित के खिलाफ कोई काम नहीं किया और मायावती के खिलाफ कुछ करने का तो वे सपने में भी नहीं सोच सकते।

अशोक सिद्धार्थ पर आरोप लग रहे थे कि वे पार्टी पर कब्जा करना चाहते हैं और आकाश आनंद को गुमराह कर रहे हैं। इस पर सफाई देते हुए उन्होंने लिखा, "आकाश आनंद को सलाह देना तो दूर, बीते कई महीनों से मेरी उनसे मुलाकात भी कुछ एक अवसर पर तब हुई, जब उनके कार्यक्रम चुनावी राज्यों में आयोजित किए गए, जिनकी जिम्मेदारी आपने मुझे दी हुई थी।"

उन्होंने कहा कि पार्टी के ही कुछ साथी उन्हें मिले सम्मान के कारण उन पर आरोप लगाते हैं, इसमें लेशमात्र भी सच्चाई नहीं है। यह उनके राजनीतिक विरोधियों की साजिश है जो पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त हैं।

उन्होंने कहा कि उनके संन्यास लेने को आकाश आनंद की वापसी से न जोड़ा जाए। अशोक सिद्धार्थ ने लिखा, "आकाश आनंद मेरे दामाद से पहले आपके भतीजे हैं और आनंद भाईसाहब के बेटे हैं। उन्होंने जीवन के दो दशक आपकी छत्रछाया में बिताए हैं। मेरे जैसा मामूली कार्यकर्ता भला उनको क्या ही गुमराह कर पाएगा।"

बसपा के पूर्व राज्यसभा सदस्य ने लिखा, "आप खुद में त्याग और दया की मूर्ति हैं, जब बात समाज के हित की आई तो आपने मुख्यमंत्री की कुर्सी और राज्यसभा सदस्य पद को भी ठोकर मार दी। आप हमारी मार्गदर्शक ही नहीं हमारी आदर्श भी हैं। अगर आपको लगता है कि मेरे राजनीतिक और सामाजिक जीवन में रहने से हमारे संतों, गुरुओं और महापुरुषों के बनाए हुए बहुजन मिशन को नुकसान पहुंच रहा है तो मैं अभी इसी वक्त राजनीतिक और सामाजिक जीवन से संन्यास ले रहा हूं। मेरा ये जीवन आपका ऋणी है, ऐसे में संन्यास तो बहुत छोटी चीज है। आपके लिए अगर मुझे कभी अपनी जान भी देनी पड़े तो वो भी मेरे लिए फक्र की बात होगी।"

इससे पहले बुधवार को मायावती ने भी 'एक्स' पोस्ट कर अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से संन्यास लेने की सलाह दी थी। मायावती ने लिखा था कि अशोक सिद्धार्थ ने अपने निजी स्वार्थ में आकाश आनंद और बीएसपी मूवमेंट की सही से परवाह नहीं की, जबकि उन्हें पार्टी और समाज के सामने त्याग और कुर्बानी की मिसाल पेश करनी चाहिए थी, लेकिन ठीक इसका उल्टा हुआ।

मायावती ने कहा था कि बीएसपी पार्टी और मूवमेंट के हित के साथ-साथ खुद उनके परिवार और दामाद आकाश आनंद के भविष्य को ध्यान में रखकर अशोक सिद्धार्थ के पास अभी मौका है कि वे अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को त्याग कर निजी स्वार्थ से ऊपर उठकर राजनीति से पूरी तरह संन्यास ले लें, तब आकाश आनंद का फ्री होकर पार्टी में काम करना संभव होगा और तभी पार्टी उन्हें जिम्मेदारियां वापस देने पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी।

इनपुट : आईएएनएस

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