गुटनिरपेक्ष आंदोलन की 65वीं वर्षगांठ पर बेलग्रेड में ऐतिहासिक उच्चस्तरीय बैठक; केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू करेंगे भारत का नेतृत्व

गुटनिरपेक्ष आंदोलन (Non-Aligned Movement - NAM) के गठन की ऐतिहासिक 65वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में सर्बिया की राजधानी बेलग्रेड में एक विशेष उच्चस्तरीय स्मारक बैठक आयोजित की जा रही है। इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करने और भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने के लिए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू बेलग्रेड पहुंच रहे हैं। जानिए एनएएम की 65वीं वर्षगांठ बैठक, भारत की कूटनीतिक प्राथमिकताओं और बेलग्रेड सम्मेलन से जुड़ी पूरी विस्तृत रिपोर्ट।

Aug 29, 2026 - 11:59
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गुटनिरपेक्ष आंदोलन की 65वीं वर्षगांठ पर बेलग्रेड में ऐतिहासिक उच्चस्तरीय बैठक; केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू करेंगे भारत का नेतृत्व

नई दिल्ली। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू सर्बिया की राजधानी बेलग्रेड में 31 अगस्त से 1 सितंबर तक होने वाली एक उच्चस्तरीय कमेमोरेटिव (स्मृति) बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने शनिवार को बताया कि  यह बैठक गुटनिरपेक्ष आंदोलन (एनएएम) शिखर सम्मेलन की 65वीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित की जा रही है। 

विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह बैठक एनएएम के पहले राष्ट्राध्यक्ष/सरकार प्रमुखों के सम्मेलन की 65वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित की जा रही है।

बैठक की थीम 'द लिगेसी ऑफ नॉन अलाइनमेंट: लेसंस फॉर टुडेस वर्ल्ड' यानी 'गुटनिरपेक्षता की विरासत: आज की दुनिया के लिए सबक' रखी गई है।

विदेश मंत्रालय ने कहा, "भारत इस आंदोलन का संस्थापक सदस्य है। एनएएम, ऐतिहासिक महत्व के इस मंच पर 121 विकासशील देशों को एक साथ लाता है और भारत आंदोलन के सिद्धांतों एवं मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध है।"

एनएएम की शुरुआत 1955 में इंडोनेशिया के बांडुंग में आयोजित एशियाई-अफ्रीकी सम्मेलन से मानी जाती है। इस सम्मेलन में एशिया और अफ्रीका के देशों ने संप्रभुता, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व, एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने और उपनिवेशवाद के विरोध जैसे सिद्धांतों को आगे बढ़ाया था।

इसके छह वर्ष बाद 1961 में बेलग्रेड में आयोजित पहले शिखर सम्मेलन में गुटनिरपेक्ष आंदोलन औपचारिक रूप से अस्तित्व में आया। आज भी एनएएम बहुपक्षवाद और विकासशील देशों के हितों, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र प्रणाली में उनकी आवाज को मजबूत करने की दिशा में काम करता है।

इससे पहले अक्टूबर 2025 में युगांडा की राजधानी कंपाला में आयोजित 19वीं एनएएम मध्यावधि मंत्रिस्तरीय बैठक में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने सीमा पार आतंकवाद के साझा खतरे से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया था।

सिंह ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा था कि आतंकवाद एक साझा खतरा है, जिसका मुकाबला केवल व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए किया जा सकता है। उन्होंने कहा था कि भारत दशकों से सीमा पार आतंकवादी हमलों का शिकार रहा है और 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में निर्दोष पर्यटकों की हत्या इसका ताजा उदाहरण है।

उन्होंने कहा था कि जब कोई देश आतंकवाद को अपनी राज्य नीति बना ले, आतंकवादी ठिकानों को बिना किसी दंड के फलने-फूलने दिया जाए और किसी राज्य के अधिकारी आतंकवादियों का महिमामंडन करें, तो ऐसे कृत्यों की स्पष्ट और बिना किसी शर्त निंदा होनी चाहिए।

सिंह ने कहा था कि एनएएम के लगभग सभी सदस्य देश आतंकवाद की चुनौती से परिचित हैं और इसके खिलाफ लड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

पाकिस्तान का परोक्ष रूप से उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा था कि यह गहरी चिंता का विषय है कि जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने पहलगाम आतंकी हमले पर विचार किया, तब एक सदस्य देश ने कथित तौर पर हमले के जिम्मेदार संगठन 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' का बचाव किया और उसके सार्वजनिक उल्लेख को हटाने की मांग तक की।

उन्होंने कहा था कि गुटनिरपेक्ष आंदोलन को आतंकवाद के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' का रुख अपनाना चाहिए। आतंकवाद को प्रायोजित करने, समर्थन देने, उसका औचित्य साबित करने या उसे छिपाने की किसी भी कोशिश का अंततः खामियाजा भुगतना पड़ेगा।


इनपुट : आईएएनएस

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