युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर बढ़ रही खाने और ऊर्जा की कीमतें; संयुक्त राष्ट्र में भारत समेत कई देशों ने जताई गहरी चिंता
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के उच्चस्तरीय सत्र के दौरान दुनिया भर में गहराते आर्थिक संकट और महंगाई को लेकर गंभीर चर्चा देखने को मिली। भारत सहित कई विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों ने दुनिया के विभिन्न हिस्सों में चल रहे युद्धों और सैन्य संघर्षों के कारण खाद्य पदार्थों (Food) और ऊर्जा (Energy) की कीमतों में हो रही बेलगाम वृद्धि पर गहरी चिंता व्यक्त की है। जानिए यूएन में महंगाई के मुद्दे पर उठी आवाजों, इसके आर्थिक प्रभावों और भारत के आधिकारिक पक्ष पर पूरी विस्तृत रिपोर्ट।
संयुक्त राष्ट्र (न्यूयॉर्क): दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी सैन्य संघर्षों, भू-राजनीतिक तनाव और व्यापारिक प्रतिबंधों का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ पर साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के सत्र के दौरान भारत सहित कई देशों ने युद्ध के कारण खाद्य पदार्थों (Food) और ऊर्जा (Energy) की कीमतों में हो रही भारी बढ़ोतरी पर अपनी गहरी चिंता जाहिर की है।
वैश्विक मंच पर वक्ताओं ने इस बात को प्रमुखता से रखा कि युद्धों के कारण बाधित हुई आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) का खामियाजा दुनिया भर के गरीब और विकासशील देशों के आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।
वैश्विक दक्षिण पर महंगाई का सबसे बड़ा बोझ
संयुक्त राष्ट्र की बैठकों में विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व करते हुए कई राष्ट्रों ने रेखांकित किया कि पिछले कुछ वर्षों में संघर्षों के चलते दुनिया भर में आर्थिक असमानता और महंगाई रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है:
-
खाद्य सुरक्षा पर संकट: यूक्रेन और मध्य पूर्व जैसे प्रमुख कृषि और ऊर्जा उत्पादक क्षेत्रों में युद्ध के कारण गेहूं, उर्वरक और खाद्य तेलों के निर्यात पर जो विपरीत प्रभाव पड़ा है, उससे कई गरीब देशों में भुखमरी और खाद्य सुरक्षा का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
-
ऊर्जा संकट और ईंधन के दाम: कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बार-बार आ रहे उतार-चढ़ाव ने परिवहन, विनिर्माण और बिजली उत्पादन की लागत को बढ़ा दिया है, जिससे वैश्विक मुद्रास्फीति (Global Inflation) काबू से बाहर हो रही है।
-
केंद्रीय बैंकों की चुनौतियां: विकसित और विकासशील देशों के केंद्रीय बैंकों को महंगाई रोकने के लिए ब्याज दरों को उच्च स्तर पर बनाए रखना पड़ रहा है, जिससे वैश्विक आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी पड़ गई है।
भारत का स्पष्ट संदेश: 'बातचीत और कूटनीति ही एकमात्र समाधान'
संयुक्त राष्ट्र के मंच पर भारत ने अपनी बात रखते हुए स्पष्ट किया कि वर्तमान वैश्विक संकट का एकमात्र स्थायी समाधान युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि कूटनीति और संवाद (Dialogue and Diplomacy) की मेज पर है:
-
आपूर्ति श्रृंखला की बहाली: भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आह्वान किया कि खाद्य, ईंधन और उर्वरकों की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को भू-राजनीतिक संघर्षों से पूरी तरह अलग रखा जाना चाहिए, ताकि किसी भी देश के नागरिकों को बुनियादी जरूरतों के लिए संकट का सामना न करना पड़े।
-
कमजोर अर्थव्यवस्थाओं को संरक्षण: भारत ने विकासशील देशों (Global South) की वित्तीय और खाद्य सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से रियादती मदद और ठोस नीतियों की वकालत की है।
-
बहुपक्षीय सहयोग की आवश्यकता: भारतीय प्रतिनिधियों ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए राष्ट्रों को अपनी संकीर्ण प्राथमिकताओं से ऊपर उठकर संयुक्त राष्ट्र के चार्टर और सामूहिक सहकार की भावना के साथ काम करना होगा।
वैश्विक स्थिरता के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग
संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न मंचों से विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कूटनीतिक स्तर पर युद्धों को समाप्त करने और व्यापारिक बाधाओं को दूर करने के प्रयास नहीं किए गए, तो दुनिया भर में सामाजिक अशांति और गहरी मंदी का खतरा और अधिक बढ़ जाएगा।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)