पीएम ई-ड्राइव योजना: जून 2026 तक 26.59 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री
नई दिल्ली। पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत जून 2026 तक 26.59 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की बिक्री संभव हुई है। इससे देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में तेजी आई है, चार्जिंग बुनियादी ढांचे का विस्तार हुआ है और घरेलू विनिर्माण इकोसिस्टम मजबूत हुआ है। यह जानकारी सरकार की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में दी गई। 11,900 करोड़ रुपए के बजटीय आवंटन वाली इस योजना की अवधि बढ़ाकर मार्च 2028 तक कर दी गई है। यह योजना इलेक्ट्रिक वाहनों की विभिन्न श्रेणियों और उनसे जुड़े बुनियादी ढांचे को समर्थन देती है। सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, योजना के तहत 28.30 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इसके अलावा ई-बसों, चार्जिंग स्टेशनों और परीक्षण सुविधाओं को भी समर्थन दिया जा रहा है, जिससे पूरे भारत में स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन को बढ़ावा मिल रहा है।
ई-बसों की तैनाती: 7 प्रमुख शहरों के लिए 4,391 करोड़ रुपए का आवंटन
पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत 14,028 ई-बसों की तैनाती के लिए करीब 4,391 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। इनमें से अगस्त 2026 तक 14,000 ई-बसों का आवंटन किया जा चुका है। करीब 13,800 ई-बसें सात शहरों—दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, मुंबई, अहमदाबाद, पुणे और सूरत—को आवंटित की गई हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों के सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों (ईवी पीसीएस) और परीक्षण एजेंसियों के अपग्रेड के लिए भी अनुदान सहायता उपलब्ध है।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और परीक्षण एजेंसियों के आधुनिकीकरण के लिए फंड
देशभर में ईवी सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों के लिए करीब 2,000 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं। 28 सितंबर 2026 तक तीन तेल विपणन कंपनियों और 10 राज्यों में 8,147 चार्जर लगाने के लिए 851 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं। इसके अलावा, वाहन परीक्षण एजेंसियों के आधुनिकीकरण और उन्नयन के लिए 780 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। लक्षित नीतियों, वित्तीय प्रोत्साहनों और सहायक उपायों के चलते देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी तेजी से आगे बढ़ रही है।
योजना के दायरे में शामिल वाहन श्रेणियां
यह योजना विभिन्न वाहन श्रेणियों और उनसे जुड़े घटकों के लिए मांग आधारित प्रोत्साहन और बुनियादी ढांचे से जुड़ी सहायता प्रदान करती है। इस योजना के दायरे में ई-2 व्हीलर (ई-2डब्ल्यू), ई-3 व्हीलर (ई-3डब्ल्यू), जिनमें पंजीकृत ई-रिक्शा और ई-कार्ट तथा एल5 श्रेणी के वाहन, ई-एम्बुलेंस, ई-ट्रक, ई-बस, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और परीक्षण एजेंसियों का उन्नयन शामिल हैं।
ई-2डब्ल्यू और ई-3डब्ल्यू श्रेणियों के लिए वित्तीय प्रोत्साहन और लक्ष्य
पंजीकृत ई-2डब्ल्यू के लिए 2,500 रुपए प्रति किलोवाट-घंटा का प्रोत्साहन दिया जाता है, जिसकी अधिकतम सीमा 5,000 रुपए प्रति वाहन है। यह लाभ 1.5 लाख रुपए तक की एक्स-फैक्ट्री कीमत वाले वाहनों पर लागू होता है। इसके लिए कुल 2,767 करोड़ रुपए का फंड आवंटित किया गया है। योजना का लक्ष्य 45.79 लाख से अधिक पंजीकृत ई-2डब्ल्यू को समर्थन देना है। सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, पंजीकृत ई-3डब्ल्यू (एल5) के लिए निर्धारित बिक्री लक्ष्य हासिल कर लिया गया है और इस श्रेणी को 26 दिसंबर 2025 को बंद कर दिया गया। वहीं, ई-3डब्ल्यू (ई-रिक्शा और ई-कार्ट) के लिए समर्थन मार्च 2028 तक जारी रहेगा।
इनपुट : आईएएनएस
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