उत्तर कोरिया का गंभीर आरोप; 'दक्षिण कोरिया और जापान को परमाणु पनडुब्बी के लिए उकसा रहा है अमेरिका'

उत्तर कोरिया ने अमेरिका पर एशिया-प्रशांत क्षेत्र में परमाणु हथियारों के प्रसार को बढ़ावा देने और दक्षिण कोरिया व जापान को 'परमाणु ऊर्जा चालित पनडुब्बियां' (Nuclear-powered Submarines) हासिल करने के लिए उकसाने का गंभीर आरोप लगाया है। जानिए उत्तर कोरिया के इन आरोपों, ऑकस विस्तार की आशंकाओं और कोरियाई प्रायद्वीप में बढ़ते तनाव पर विस्तृत रिपोर्ट।

Sep 16, 2026 - 11:17
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उत्तर कोरिया का गंभीर आरोप; 'दक्षिण कोरिया और जापान को परमाणु पनडुब्बी के लिए उकसा रहा है अमेरिका'

सोल। उत्तर कोरिया ने बुधवार को अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह दक्षिण कोरिया और जापान को परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियां हासिल करने के लिए उकसा रहा है। उत्तर कोरिया ने इस मुद्दे को अपनी परमाणु क्षमता बढ़ाने के पक्ष में एक तर्क के रूप में भी इस्तेमाल किया। 

उत्तर कोरिया की यह प्रतिक्रिया उस समय आई जब अमेरिकी नौसेना के एक अधिकारी ने पिछले गुरुवार को हवाई में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दक्षिण कोरिया और जापान की परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियां हासिल करने की योजनाओं पर टिप्पणी की थी।

योनहाप समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारी ने कहा था कि दक्षिण कोरिया को ऐसी पनडुब्बियों की जरूरत के लिए स्पष्ट सैन्य और रणनीतिक कारण बताने चाहिए, न कि उन्हें सिर्फ एक 'प्रतिष्ठा के प्रतीक' के रूप में देखना चाहिए। वहीं, उन्होंने जापान की इस दिशा में कोशिशों को अपेक्षाकृत अधिक सकारात्मक नजरिए से देखा।

उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए (केसीएनए) में प्रकाशित एक टिप्पणी में अंतरराष्ट्रीय मामलों के एक विश्लेषक ने दावा किया कि यह चर्चा दक्षिण कोरिया और जापान को परमाणु पनडुब्बियां हासिल करने के लिए 'उकसाने' की कोशिश थी। उन्होंने अमेरिका को 'दुनिया में परमाणु प्रसार का सबसे बड़ा सूत्रधार' बताया।

विश्लेषक ने आरोप लगाया कि अमेरिका 'ऑकस' सुरक्षा साझेदारी के जरिए अपने सहयोगी देशों, जैसे दक्षिण कोरिया और जापान, तक परमाणु पनडुब्बी तकनीक पहुंचाने की कोशिश कर रहा है।

उन्होंने लिखा, "हकीकत यह दिखाती है कि अमेरिका की 'ऑकस 2.0' योजना, जिसके तहत गैर-परमाणु सहयोगी देशों को सैन्य उपयोग की परमाणु तकनीक देने की बात है, अब बड़े पैमाने पर विस्तार के चरण में पहुंच चुकी है।"

'ऑकस' एक सुरक्षा साझेदारी है जिसमें अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। इसकी घोषणा 2021 में हुई थी और 2024 में इस पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते ने ऑस्ट्रेलिया के लिए अमेरिकी तकनीक की मदद से परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियां हासिल करने का रास्ता खोला। कई विशेषज्ञ इसे दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच भविष्य में होने वाले किसी संभावित समझौते के लिए एक मॉडल के रूप में भी देखते हैं।

उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया और जापान की ओर से परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियां हासिल करने की कोशिशों को 'लापरवाह कदम' बताया। उसका कहना है कि इससे यह साफ दिखता है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपने प्रतिद्वंद्वी देशों को रोकने के लिए अमेरिका अपने सहयोगियों को एक तरह की अग्रिम सैन्य ताकत के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।

विश्लेषक ने इसे वैश्विक परमाणु अप्रसार व्यवस्था के लिए खतरा बताते हुए कहा कि उत्तर कोरिया को अपनी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को संख्या और गुणवत्ता, दोनों स्तरों पर लगातार मजबूत करते रहना चाहिए।


इनपुट : आईएएनएस

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