308 पहिए वाला महाबली ट्रक, आखिर क्या है 164.28 मीट्रिक टन वजन की मशीन? 

Sep 30, 2026 - 12:02
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308 पहिए वाला महाबली ट्रक, आखिर क्या है 164.28 मीट्रिक टन वजन की मशीन? 

Highlights

- विशाल ट्रक पर लदी है 164.28 मीट्रिक टन वजन की मशीन,
- बेल्जियम से यूपी के लखीमपुर खीरी तक जा रहा 'Mahabali' truck.
- 6 महीने से भी लगा ज्यादा समय.


'Mahabali' truck News : यूपी की सड़कों पर इन दिनों 308 पहिए वाला एक ऐसा 'महाबली' ट्रक लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, जिसे देखकर हर कोई हैरान है. इस विशाल ट्रक पर 164.28 मीट्रिक टन वजन की मशीन लदी है और इसे बेल्जियम से यूपी के लखीमपुर खीरी तक पहुंचाया जा रहा है. करीब 41 मीटर लंबी इस मशीन को बलरामपुर चीनी मिल के कुंभी स्थित बायोपॉलीमर प्लांट तक पहुंचना है. खास बात यह है कि कई महीनों से जारी इस सफर के बावजूद 'महाबली' अभी अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच पाया है.

बेल्जियम से यूपी के लखीमपुर खीरी जा रहा 'Mahabali' truck 

इस विशाल मशीन की यात्रा अप्रैल में बेल्जियम से शुरू हुई थी. मशीन को समुद्री रास्ते से भारत भेजा गया और करीब एक महीने के सफर के बाद यह ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पहुंची. इसके बाद मशीन को 308 पहियों वाले विशेष ट्रक पर लादा गया और सड़क मार्ग से उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के लिए रवाना किया गया.

पारादीप से निकलने के बाद महाबली ट्रक झारखंड और बिहार होते हुए उत्तर प्रदेश पहुंचा. विशाल आकार और भारी वजन के कारण इसे सामान्य वाहनों की तरह तेज रफ्तार से नहीं चलाया जा सकता. रास्ते में जगह-जगह ऊंचाई, चौड़ाई और सड़क से जुड़े अवरोध सामने आए.

चंदौली में क्यों रुक गया था 'महाबली'?

 25 सितंबर को यह विशाल ट्रक उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले की सीमा में पहुंचा. पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर के पास नेशनल हाईवे-19 पर रिंग रोड के नजदीक पहुंचने के बाद इसे आगे बढ़ने में परेशानी हुई. दरअसल, ट्रक और उस पर लदी मशीन की ऊंचाई और चौड़ाई को देखते हुए आगे का रास्ता पर्याप्त नहीं था. ऐसे में लॉजिस्टिक्स टीम ने संबंधित विभागों और अधिकारियों से अनुमति लेकर वैकल्पिक रास्ता तैयार किया. इसके लिए मौके पर जेसीबी समेत मशीनरी की मदद ली गई. सोमवार दोपहर रास्ता तैयार होने के बाद महाबली ट्रक को आगे वाराणसी की ओर रवाना कर दिया गया.

मंजिल तक नहीं पहुंचा 308 पहिए वाला 'महाबली' ट्रक

308 पहियों वाले ट्रक को देखने उमड़ी भीड़ 'Mahabali' truck जहां से गुजर रहा है, वहां लोगों में इसे देखने को लेकर खासा उत्साह दिखाई दे रहा है. चंदौली में इसके रुकने की खबर मिलते ही आसपास के गांवों के साथ-साथ दूर-दराज के लोग भी मौके पर पहुंच गए. लोग इस विशाल ट्रक और उस पर लदी मशीन के साथ सेल्फी लेते दिखाई दिए. कई कंटेंट क्रिएटर्स ने भी मौके पर पहुंचकर इसके वीडियो बनाए. लोगों के लिए सबसे ज्यादा हैरानी की बात इसके 308 पहिए और विशाल आकार हैं.

अब कहां जाएगा 'महाबली'? 

लॉजिस्टिक्स मैनेजर अनेक भारती के मुताबिक ट्रक को आगे गाजीपुर, गोरखपुर और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के रास्ते लखीमपुर ले जाने की योजना है. रास्ते में आने वाले अवरोधों को संबंधित विभागों से अनुमति लेकर हटाया जा रहा है.

लॉजिस्टिक्स टीम के मुताबिक, अगर आगे का सफर योजना के मुताबिक चलता रहा तो महाबली ट्रक को लखीमपुर खीरी पहुंचने में अभी करीब दो से तीन सप्ताह का समय लग सकता है.

आखिर क्या है मशीन? 

इस विशाल ट्रक पर एक रिएक्टर ले जाया जा रहा है. लॉजिस्टिक्स मैनेजर ने बताया कि मशीन को बायोपॉलीमर प्लांट के लिए ले जाया जा रहा है, हालांकि उन्होंने इसके तकनीकी विवरण के बारे में अधिक जानकारी देने से इनकार किया.

चंदौली पुलिस के मुताबिक, मशीन करीब 41 मीटर लंबी है और इसका वजन 164.28 मीट्रिक टन है. इसे लखीमपुर खीरी के ग्राम कुंभी में बलरामपुर चीनी मिल द्वारा बनाए जा रहे बायोप्लास्टिक प्लांट के लिए ले जाया जा रहा है.

यानी बेल्जियम से शुरू हुआ यह सफर समुद्र के रास्ते भारत पहुंचने के बाद अब सड़कों पर जारी है. 308 पहियों वाला 'महाबली' कई राज्यों और मुश्किल रास्तों को पार कर चुका है, लेकिन लखीमपुर खीरी में अपने अंतिम गंतव्य तक पहुंचने के लिए अभी इसका सफर बाकी है.

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