जनरल धीरज सेठ ने रूस की मिखाइलोव्स्काया आर्टिलरी एकेडमी का दौरा किया, सेंट पीटर्सबर्ग में दागी परंपरागत तोप
भारत और रूस के बीच सैन्य रिश्तों को नई मजबूती देते हुए भारतीय सेना प्रमुख (COAS) जनरल धीरज सेठ ने अपने रूस दौरे के दौरान सेंट पीटर्सबर्ग स्थित मिखाइलोव्स्काया मिलिट्री आर्टिलरी एकेडमी का दौरा किया। यह मुलाकात दोनों देशों के बीच पेशेवर सैन्य सहयोग को और गहरा करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
एकेडमी में हुई खास बातचीत
इस प्रतिष्ठित सैन्य संस्थान में जनरल सेठ ने वहां के फैकल्टी सदस्यों से मुलाकात की। इस दौरान ट्रेनिंग के तरीकों, आधुनिक सैन्य शिक्षा और आर्टिलरी यानी तोपखाने के आधुनिकीकरण को लेकर दोनों पक्षों के बीच विस्तार से चर्चा हुई। यह मौका दोनों देशों के लिए अपने-अपने अनुभव साझा करने और तोपखाने की ट्रेनिंग व क्षमता विकास को लेकर आगे की रणनीति पर बात करने का भी रहा।
पीटर एंड पॉल फोर्ट्रेस में तोप दागने का सम्मान
दौरे का सबसे यादगार पल तब आया जब भारतीय सेना प्रमुख को सेंट पीटर्सबर्ग के ऐतिहासिक पीटर एंड पॉल फोर्ट्रेस में परंपरागत तोप दागने का खास सम्मान दिया गया। यह एक दुर्लभ सांकेतिक सम्मान माना जाता है, जो आमतौर पर विशिष्ट मेहमानों को ही दिया जाता है।
तीन दिन का अहम दौरा
जनरल सेठ का यह एकेडमी दौरा उनके 16 से 18 सितंबर 2026 तक चले आधिकारिक रूस दौरे का हिस्सा था। रक्षा मंत्रालय पहले ही स्पष्ट कर चुका था कि सेना प्रमुख की इन गतिविधियों का मकसद भारत-रूस के पुराने रक्षा साझेदारी को और मजबूत करना और सेना-दर-सेना सहयोग को बढ़ाना है जिसमें पेशेवर आदान-प्रदान और साझा ट्रेनिंग प्रोग्राम भी शामिल हैं।
एकेडमी में हुई इस बातचीत ने एक बार फिर यह दिखाया कि किस तरह दोनों देशों के सैन्य प्रशिक्षण संस्थानों के बीच सीधा संस्थागत जुड़ाव सर्वश्रेष्ठ प्रैक्टिस साझा करने और आपसी रिश्ते गहरे करने में अहम भूमिका निभाता है।
वरिष्ठ अधिकारियों से भी हुई मुलाकात
अपने पूरे दौरे के दौरान सेना प्रमुख ने रूस के कई वरिष्ठ सैन्य और रक्षा अधिकारियों से भी मुलाकात की। इन बैठकों में पेशेवर सैन्य सहयोग, ट्रेनिंग, क्षमता विकास और द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को आगे बढ़ाने के तमाम रास्तों पर चर्चा हुई।
कुल मिलाकर, सेंट पीटर्सबर्ग की यह यात्रा एक बार फिर इस बात को रेखांकित करती है कि भारत और रूस दोनों ही अपने व्यापक रक्षा संबंधों के तहत सेना-दर-सेना संवाद और पेशेवर सैन्य आदान-प्रदान को कितनी अहमियत देते हैं।
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