कलबुर्गी में सिद्धारमैया की मूर्ति हटाने पर बोले मंत्री अजय सिंह—'इसमें कोई राजनीतिक पहलू नहीं
कर्नाटक के कलबुर्गी में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की नौ फीट ऊंची प्रतिमा को नगर निगम द्वारा हटाए जाने के बाद उपजे राजनीतिक विवाद पर राज्य सरकार के लघु सिंचाई मंत्री अजय सिंह ने सफाई दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रतिमा को हटाने के पीछे कोई राजनीतिक मंशा या अंतर्कलह नहीं है, बल्कि इसे संबंधित विभाग की वैधानिक अनुमति के बिना रातोंरात स्थापित किया गया था। जानिए इस पूरे घटनाक्रम, अजय सिंह के बयान और कलबुर्गी प्रशासन की कार्रवाई से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट।
मंगलुरु (कर्नाटक)। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की नौ फुट ऊंची मूर्ति को हटाने के मामले को लेकर राज्य के सिंचाई मंत्री अजय सिंह की प्रतिक्रिया सामने आई है। अजय सिंह ने शुक्रवार को कहा कि उनकी मूर्ति हटाना इसलिए जरूरी था क्योंकि इसे बिना जरूरी मंजूरी के लगाया गया था और इस घटना के पीछे कोई राजनीतिक मकसद नहीं था।
लगभग तीन वर्ष पहले पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की एक और मूर्ति लगाई गई थी, जिसे उस समय अधिकारियों ने हटा दिया था। मंत्री अजय सिंह कलबुर्गी जिले से हैं और वे पूर्व मुख्यमंत्री एन. धर्म सिंह के बेटे हैं।
पत्रकारों से बात करते हुए अजय सिंह ने कहा, "किसी भी मूर्ति को लगाने के लिए नियम होते हैं। सिद्धारमैया की मूर्ति इसी वजह से हटाई गई थी। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के कलबुर्गी दौरे और मूर्ति हटाने के बीच कोई संबंध नहीं है।"
उन्होंने कहा कि शिवकुमार ने बार-बार कहा है कि सिद्धारमैया उनके नेता हैं और उन्होंने मूर्ति हटाने को मुख्यमंत्री के दौरे से जोड़ने वाली अटकलों को खारिज कर दिया। अजय सिंह ने यह भी कहा कि सिद्धारमैया या शिवकुमार में से किसी को भी मूर्ति लगाने के बारे में पता नहीं था। उन्होंने कहा, "इस मामले को लेकर कोई भ्रम नहीं है। मूर्ति बिना अनुमति के लगाई गई थी और नियमों के अनुसार हटा दी गई।"
कलबुर्गी में हाईकोर्ट सर्कल पर सिद्धारमैया के समर्थकों ने रातों-रात उनकी नौ फीट ऊंची मूर्ति लगाई थी। बाद में, कलबुर्गी सिटी कॉरपोरेशन ने गुरुवार को कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच मूर्ति को हटा दिया क्योंकि अधिकारियों को पता चला कि जिला प्रशासन या सिटी कॉरपोरेशन से जरूरी अनुमति नहीं ली गई थी।
अधिकारियों के अनुसार, मूर्ति लगाने में कुरुबा समुदाय के सदस्यों सहित लगभग 8 से 10 लोग शामिल थे। बताया जा रहा है कि यह समूह मांग कर रहा था कि हाईकोर्ट सर्कल का नाम सिद्धारमैया के नाम पर रखा जाए। इसी समूह ने कथित तौर पर लगभग तीन वर्ष पहले इसी जगह पर सिद्धारमैया की मूर्ति लगाई थी। अधिकारियों ने उस समय भी उसे हटा दिया था।
ताजा मूर्ति उस रास्ते पर लगाई गई थी जहां से शिवकुमार कलबुर्गी के दौरे और आगे गनागापुरा मंदिर की यात्रा के दौरान गुजरे थे, जिससे इस कार्रवाई के समय को लेकर अटकलें लगने लगीं। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि मूर्ति को सिर्फ इसलिए हटाया गया क्योंकि इसे जरूरी अनुमति के बिना लगाया गया था। मूर्ति हटाने के दौरान कानून-व्यवस्था की कोई समस्या न हो, इसके लिए मौके पर पुलिस तैनात की गई थी।
इनपुट : आईएएनएस
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