पत्रकार हर्ष यादव का बड़ा दावा: CEC विरोध प्रदर्शन की कवरेज रोकने के लिए होटल में पहुंची पुलिस
नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन की रिपोर्टिंग करने दिल्ली पहुंचे मीडियाकर्मियों और दिल्ली पुलिस के बीच टकराव की खबरें सामने आई हैं। स्वतंत्र पत्रकार हर्ष यादव सहित कई मीडियाकर्मियों ने आरोप लगाया है कि कनॉट प्लेस स्थित 'द पार्क' होटल में ठहरे पत्रकारों को पुलिस द्वारा कथित रूप से प्रताड़ित किया गया और जबरन चेक-आउट (Force Checkout) कराया गया।
क्या है पूरा मामला?
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आयोजित विरोध प्रदर्शन को कवर करने के लिए स्वतंत्र पत्रकार हर्ष यादव दिल्ली के 'द पार्क' होटल में रुके हुए थे। यादव के अनुसार, वह प्रदर्शन स्थल पर रिपोर्टिंग के लिए जाने ही वाले थे कि अचानक दिल्ली पुलिस के जवान होटल पहुंच गए और उनके कमरे के बाहर तैनात हो गए।
सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में हर्ष यादव ने दावा किया कि:
* पुलिस ने बिना किसी वैध अरेस्ट वारंट या कानूनी आधार के उन्हें हिरासत में लेने/गिरफ्तार करने का प्रयास किया।
* होटल में मौजूद कई अन्य पत्रकारों के कमरों के बाहर भी पुलिसकर्मी तैनात थे और उन्हें होटल खाली करने के लिए दबाव बनाया गया।
* यादव ने यह गंभीर आरोप भी लगाया कि पुलिस की एक टीम उनके घर पर भी पहुंची थी।
* प्रशासन ने प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने से रोकने के लिए होटल प्रबंधन और मीडियाकर्मियों पर दबाव डालकर उनका जबरन चेक-आउट कराया।
जंतर-मंतर पर भी टकराव
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम के दौरान जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बेहद कड़ी कर दी गई थी। प्रदर्शन के दौरान भी पुलिसकर्मियों और प्रेस कार्ड दिखाए जाने के बावजूद स्वतंत्र पत्रकारों को हिरासत में लेने की कोशिशों के वीडियो सामने आए हैं।
प्रेस की आजादी पर उठे सवाल
इस घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया और पत्रकारिता जगत में प्रेस की स्वतंत्रता और रिपोर्टिंग के अधिकार को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई है।
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