ईरान ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शांति सिद्धांतों का किया समर्थन
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और संघर्ष के बीच ईरान ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के चार-सूत्रीय शांति प्रस्ताव और सुरक्षा सिद्धांतों का खुला समर्थन किया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और शीर्ष नेतृत्व ने बीजिंग के 'शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व', संप्रभुता के सम्मान और अंतरराष्ट्रीय कानून पर आधारित दृष्टिकोण की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रस्ताव क्षेत्र में एक टिकाऊ और संतुलित सुरक्षा व्यवस्था बनाने का आधार बन सकता है। जानिए शी जिनपिंग के चार शांति सिद्धांतों, ईरान के समर्थन और वैश्विक कूटनीति पर इसके असर की पूरी विस्तृत रिपोर्ट।
नई दिल्ली। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बताए शांति के चार सिद्धांतों को बहुत ही अहम बताया। अपनी चीन यात्रा के दौरान अराघची ने वहां के सहयोगियों के साथ हुई बातचीत को भी सफल बताया।
अराघची ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''चीन में हमारे सहयोगियों के साथ सफल बातचीत हुई। ईरान उस रणनीतिक साझेदारी को अहमियत देता है जो हमने समय के साथ बनाई है। आज लिए गए फैसले इस क्षेत्र में भविष्य के रणनीतिक संतुलन को तय करेंगे और इनके दूरगामी असर होंगे। राष्ट्रपति शी की ओर से शांति के लिए बताए गए चार सिद्धांत बहुत अहम हैं।''
इससे पहले चीन के विदेश मंत्री और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) की सेंट्रल कमेटी के पॉलिटिकल ब्यूरो सदस्य वांग यी ने बुधवार को अराघची से मुलाकात की।
चीनी विदेश मंत्रालय के हवाले से ईरानी न्यूज एजेंसी मेहर ने बताया कि चीन की राजधानी में अराघची से मुलाकात के दौरान वांग ने कहा, "ईरान के साथ बातचीत और सहयोग को मजबूत करने और ईरान के जायज अधिकारों और हितों की रक्षा करने को चीन तैयार है।"
चीन के विदेश मंत्री ने ईरानी समकक्ष के साथ बैठक में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने का भी आग्रह किया। रिपोर्ट के अनुसार, चीनी विदेश मंत्रालय ने बताया कि बीजिंग में बुधवार को चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने अपने ईरानी समकक्ष से कहा कि चीन चाहता है कि ईरान और अमेरिका को आपसी चिंता के मुद्दों पर ठोस बातचीत करने के लिए तैयार हों।
वांग ने कहा, "हम सभी पक्षों से आग्रह करते हैं कि वे होर्मुज स्ट्रेट को जल्द से जल्द फिर से खोलने के लिए प्रभावी कदम उठाएं।" उन्होंने कहा कि चीन नहीं चाहता कि क्षेत्रीय तनाव बढ़े और यमन तथा लाल सागर तक फैल जाए।
इनपुट : आईएएनएस
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