यूपीआई और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को ग्लोबल साउथ तक ले जाने की तैयारी, फिनटेक निर्यात बढ़ाने पर भारत का जोर: वाणिज्य सचिव

Sep 09, 2026 - 15:37
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यूपीआई और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को ग्लोबल साउथ तक ले जाने की तैयारी, फिनटेक निर्यात बढ़ाने पर भारत का जोर: वाणिज्य सचिव
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मुंबई। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बुधवार को कहा कि भारत को अपनी फिनटेक क्षमताओं, विशेष रूप से यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) के अनुभव का उपयोग करते हुए वैश्विक बाजारों में विस्तार करना चाहिए। 

मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में बोलते हुए अग्रवाल ने कहा कि भारत के पास विशेष रूप से ग्लोबल साउथ के देशों में अपनी डिजिटल भुगतान और वित्तीय प्रौद्योगिकी सेवाओं का विस्तार करने का बड़ा अवसर है।

उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर फिनटेक सेवाओं का बाजार तेजी से बढ़ रहा है और यदि भारत इस व्यापार में केवल 10 प्रतिशत हिस्सेदारी भी हासिल कर लेता है, तो देश का फिनटेक सेवा निर्यात मौजूदा 8 अरब डॉलर से बढ़कर 60 से 80 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।

राजेश अग्रवाल ने कहा, "फिनटेक सेवाओं के क्षेत्र में वैश्विक व्यापार तेजी से बढ़ रहा है। यदि हम इसमें 10 प्रतिशत योगदान भी हासिल करते हैं, तो यह 8 अरब डॉलर से 60-80 अरब डॉलर के निर्यात तक पहुंचने की यात्रा हो सकती है।"

उन्होंने बताया कि भारत पहले से ही अपने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना मॉडल को अन्य देशों तक पहुंचाने की दिशा में काम कर रहा है। इस उद्देश्य से भारत ने अब तक लगभग 23 देशों के साथ डीपीआई सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।

इसके अलावा, सरकार कई देशों के साथ भुगतान प्रणालियों को परस्पर जोड़ने की दिशा में भी काम कर रही है, विशेष रूप से उन देशों में जहां भारतीय प्रवासियों की बड़ी आबादी रहती है।

अग्रवाल ने कहा, "हमने डीपीआई सहयोग के लिए लगभग 23 देशों के साथ समझौते किए हैं। हम जिन भी मुक्त व्यापार समझौतों पर बातचीत करते हैं, उनमें भुगतान प्रणालियों के समन्वय पर भी चर्चा करते हैं, खासकर उन देशों के साथ जहां भारतीय मूल के लोगों की बड़ी संख्या मौजूद है।"

उन्होंने आगे कहा कि प्रौद्योगिकी वित्तीय सेवाओं की लागत कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। विशेष रूप से प्रेषण (रेमिटेंस), ऋण वितरण और भुगतान सेवाओं को अधिक सस्ता एवं सुलभ बनाने के लिए डिजिटल भुगतान प्रणालियों और भारत की फिनटेक क्षमताओं का वैश्विक स्तर पर विस्तार किया जा सकता है।

वाणिज्य सचिव ने फिनटेक क्षेत्र के विकास में मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत विभिन्न व्यापार समझौतों के दौरान वित्तीय विनियमन, दूरसंचार, सीमा-पार डेटा प्रवाह, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), निवेश और पेशेवरों की आवाजाही से संबंधित बाधाओं को दूर करने का प्रयास करता है, ताकि फिनटेक क्षेत्र के लिए अधिक अनुकूल वातावरण तैयार किया जा सके।

उन्होंने कहा, "जब हम एफटीए पर बातचीत करते हैं, तो वित्तीय विनियमन, दूरसंचार, डेटा प्रवाह, एआई, निवेश और पेशेवरों की आवाजाही से जुड़ी बाधाओं को कम करने का प्रयास करते हैं, ताकि फिनटेक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिल सके।"

अग्रवाल ने कहा कि सेवा व्यापार एफटीए वार्ताओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, जिसके तहत वित्तीय सेवाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। भारत यह सुनिश्चित करने का प्रयास करता है कि विदेशी बैंकों को भारत में अवसर मिलने के साथ-साथ भारतीय बैंक और वित्तीय संस्थान भी अन्य देशों में विस्तार कर सकें।

उन्होंने कहा, "पिछले चार से पांच वर्षों में भारत नौ मुक्त व्यापार समझौते कर चुका है, जिनके दायरे में आने वाले देशों की संयुक्त अर्थव्यवस्था का आकार लगभग 60 ट्रिलियन डॉलर है।"

इनपुट : आईएएनएस

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