भारत में मैन्युफैक्चरिंग लीजिंग में जबरदस्त उछाल, 2021 से 49 प्रतिशत की सीएजीआर दर्ज

Sep 09, 2026 - 15:28
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भारत में मैन्युफैक्चरिंग लीजिंग में जबरदस्त उछाल, 2021 से 49 प्रतिशत की सीएजीआर दर्ज
India manufacturing

नई दिल्ली। भारत का विनिर्माण क्षेत्र तेजी से विस्तार के दौर से गुजर रहा है और इसका सीधा असर औद्योगिक रियल एस्टेट बाजार पर दिखाई दे रहा है। वाणिज्यिक रियल एस्टेट सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनी जेएलएल की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2021 के बाद से भारत में सकल मैन्युफैक्चरिंग लीजिंग बढ़कर 6.9 करोड़ वर्ग फुट तक पहुंच गई है। इस दौरान क्षेत्र ने 49 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) दर्ज की है, जो देश में विनिर्माण गतिविधियों के तेजी से विस्तार को दर्शाती है। 

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का विनिर्माण क्षेत्र एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है और वर्ष 2030 तक औद्योगिक रियल एस्टेट बाजार में मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़कर 40 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। इस तेजी के साथ विनिर्माण क्षेत्र अब थर्ड पार्टी लॉजिस्टिक्स (3पीएल) के बाद औद्योगिक परिसंपत्तियों का दूसरा सबसे बड़ा उपयोगकर्ता बन गया है। इसे भारत के औद्योगिक रियल एस्टेट ढांचे में एक महत्वपूर्ण संरचनात्मक बदलाव माना जा रहा है।

आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में सकल अवशोषण 1.92 करोड़ वर्ग फुट तक पहुंच गया था, जबकि 2026 की पहली छमाही में ही यह 1.02 करोड़ वर्ग फुट दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 19 प्रतिशत अधिक है। बढ़ती मांग यह संकेत देती है कि देश में विनिर्माण कंपनियां नए उत्पादन केंद्र और आधुनिक औद्योगिक सुविधाएं तेजी से स्थापित कर रही हैं।

रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि वर्ष 2030 तक मैन्युफैक्चरिंग लीजिंग अवशोषण लगभग 4.6 करोड़ वर्ग फुट तक पहुंच सकता है। यह प्रवृत्ति भारत के वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने की दिशा में बढ़ते कदमों और विजन 2047 के लक्ष्यों के अनुरूप मानी जा रही है।

जेएलएल इंडिया के औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक्स कारोबार के प्रबंध निदेशक योगेश शेवाड़े ने कहा कि विनिर्माण रियल एस्टेट क्षेत्र की वृद्धि दो अलग लेकिन एक-दूसरे की पूरक रणनीतियों के कारण हो रही है। एक ओर टियर-1 शहरों में निर्माता तेज बाजार पहुंच और कम पूंजीगत लागत की रणनीति के तहत तेजी से ग्रेड-ए औद्योगिक परिसंपत्तियों को लीज पर ले रहे हैं। वहीं दूसरी ओर टियर-2 शहरों में कंपनियां भूमि खरीदने को प्राथमिकता दे रही हैं ताकि उन्हें अधिक अनुकूलन और दीर्घकालिक परिचालन नियंत्रण मिल सके।

उन्होंने कहा कि चाहे कंपनियां लीजिंग मॉडल अपनाएं या भूमि का स्वामित्व हासिल करें, दोनों ही स्थितियां भारत में विनिर्माण गतिविधियों के मजबूत विस्तार का संकेत हैं। इससे स्पष्ट होता है कि वैश्विक और घरेलू निर्माता भारत को अपने उत्पादन केंद्र के रूप में तेजी से चुन रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में कुल मैन्युफैक्चरिंग लीजिंग का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा ग्रेड-ए परिसंपत्तियों में दर्ज किया गया। यह दर्शाता है कि कंपनियां अब बेहतर गुणवत्ता वाले भवनों, उन्नत सुरक्षा मानकों, स्वच्छता प्रोटोकॉल और आधुनिक बुनियादी सुविधाओं से युक्त औद्योगिक परिसरों को प्राथमिकता दे रही हैं।

इसके साथ ही कई उभरते औद्योगिक बाजारों में भी गतिविधियां तेज हुई हैं। लखनऊ, जयपुर, चंडीगढ़ ट्राइसिटी, भुवनेश्वर, गुवाहाटी, सूरत, नागपुर, नासिक, गोवा, इंदौर, संभाजीनगर, तूतीकोरिन, कोयंबटूर और विशाखापत्तनम जैसे लगभग 14 उभरते शहरों में निर्माता लीजिंग की बजाय भूमि खरीद को अधिक महत्व दे रहे हैं। यह विभिन्न क्षेत्रों में स्थानीय आवश्यकताओं और परिचालन रणनीतियों के अनुसार अपनाए जा रहे अलग-अलग कारोबारी मॉडलों को दर्शाता है।

इनपुट : आईएएनएस

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