न्यूयॉर्क में भारत-कैरिकॉम विदेश मंत्रियों की बैठक; संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की उम्मीदवारी को मिला 15 देशों का खुला समर्थन
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के उच्च स्तरीय सत्र के इतर न्यूयॉर्क में भारत और कैरेबियाई समुदाय (CARICOM) के विदेश मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और कैरिकॉम देशों के उनके समकक्षों के बीच हुई इस बैठक में भारत को एक बड़ी कूटनीतिक जीत हासिल हुई है। जानिए भारत-कैरिकॉम बैठक, सुरक्षा परिषद की उम्मीदवारी और प्रमुख कूटनीतिक फैसलों पर पूरी विस्तृत रिपोर्ट।
न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के वार्षिक उच्च स्तरीय सत्र के दौरान भारत के कूटनीतिक प्रभाव का दायरा और अधिक विस्तृत हुआ है। न्यूयॉर्क में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की सह-अध्यक्षता में भारत-कैरिकॉम (CARICOM - कैरेबियाई समुदाय) के विदेश मंत्रियों की एक अहम बैठक संपन्न हुई।
इस बैठक का सबसे बड़ा और निर्णायक परिणाम यह रहा कि कैरेबियाई क्षेत्र के 15 सदस्य देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की उम्मीदवारी का औपचारिक और सर्वसम्मत समर्थन करने का ऐलान किया।
UNSC में भारत की दावेदारी को मिला भारी संबल
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की भूमिका को लेकर कैरिकॉम देशों का यह कदम बेहद रणनीतिक माना जा रहा है:
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सर्वसम्मत समर्थन: कैरिकॉम के सह-अध्यक्ष और समूह के सभी सदस्य देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सदस्यता के लिए भारत के मजबूत और न्यायसंगत दावे पर पूरा भरोसा जताया।
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सुधारों की वकालत: दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि 21वीं सदी की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का विस्तार और व्यापक सुधार अपरिहार्य हो चुका है।
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ग्लोबल साउथ का आभार: विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने इस ऐतिहासिक समर्थन के लिए कैरेबियाई देशों के नेताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत वैश्विक मंचों पर विकासशील और छोटे द्वीपीय राष्ट्रों की प्राथमिकताओं को हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता देगा।
विकास साझेदारी और डिजिटल तकनीक पर हुआ मंथन
मंत्रिस्तरीय बैठक में भारत और कैरिकॉम देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी सहयोग के कई महत्वपूर्ण स्तंभों की समीक्षा की गई:
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डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI): भारत के सफल 'इंडिया स्टैक' और डिजिटल पेमेंट सिस्टम (UPI) को कैरेबियाई देशों के वित्तीय और प्रशासनिक ढांचे में अपनाने पर सहमति बनी।
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जलवायु लचीलापन और आपदा प्रबंधन: चक्रवात और बढ़ते समुद्री जलस्तर के खतरों से निपटने के लिए भारत ने 'आपदा-रोधी अवसंरचना गठबंधन' (CDRI) और 'अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन' (ISA) के तहत तकनीकी और ढांचागत मदद का विस्तार करने का आश्वासन दिया।
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स्वास्थ्य और क्षमता निर्माण: जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति, चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता और भारतीय तकनीकी व आर्थिक सहयोग (ITEC) कार्यक्रम के तहत कैरेबियाई युवाओं व पेशेवरों के प्रशिक्षण को बढ़ावा दिया जाएगा।
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व्यापार और खाद्य सुरक्षा: बाजरा (Millets) की खेती, समुद्री संसाधनों (Blue Economy) के सतत उपयोग और कृषि तकनीक में संयुक्त परियोजनाओं पर चर्चा हुई।
ऐतिहासिक संबंधों को मिला आधुनिक आयाम
भारत और कैरेबियाई देशों के बीच संबंध केवल राजनयिक स्तर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि 19वीं सदी से वहां बसे जीवंत भारतीय मूल के समुदाय (Indian Diaspora) के कारण दोनों क्षेत्रों में गहरे भावनात्मक और सांस्कृतिक रिश्ते हैं।
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि हाल के वर्षों में भारत और कैरिकॉम के बीच संवाद में अभूतपूर्व तेजी आई है। यह बैठक दोनों पक्षों के साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था और समावेशी विकास की दिशा में एक और बड़ा मील का पत्थर साबित हुई है।
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