सऊदी अरब पर हूती हमलों पर ईयू ने जताई चिंता
नई दिल्ली। सऊदी अरब की रिफाइनरी और हवाई अड्डों समेत बुनियादी ढांचों पर हूती हमलों पर यूरोपीय संघ ने चिंता जाहिर की है। ईयू अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने एक बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि वो इन हमलों की निंदा करती हैं और संघ गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) के साथ हैं।
ईयू चीफ का सोशल मीडिया पर बयान
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपना बयान जारी किया। उर्सुला ने कहा, एक बार फिर, ईरान समर्थित हूती समूह ने सऊदी अरब में रिफाइनरी और हवाई अड्डों समेत बुनियादी ढांचों को निशाना बनाया है।
ग्लोबल एनर्जी सिक्योरिटी पर मंडराता खतरा
ईयू चीफ ने इसे क्षेत्र में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश बताया। पोस्ट में आगे लिखा गया, "इन हमलों से इलाके में अस्थिरता बनी रहती है, हिंसा बढ़ती है और ग्लोबल एनर्जी सिक्योरिटी कमजोर होती है।"
खाड़ी देशों के साथ एकजुटता का संकल्प
खाड़ी देशों के साथ खड़े रहने का संकल्प लेते हुए उन्होंने कहा कि ईयू सऊदी अरब और अपने खाड़ी सहयोगियों के साथ एकजुटता से खड़ा है। स्पष्ट किया कि इस महीने के आखिर में गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल के साथ ईयू की बातचीत में क्षेत्रीय सुरक्षा मुख्य मुद्दा होगी।
सऊदी अरब ने हमलों की कड़ी निंदा की
इससे पहले, सऊदी अरब ने भी यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा नागरिकों और नागरिक एवं आर्थिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने की कड़ी निंदा करते हुए एक बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि इन हमलों से न केवल सऊदी अरब बल्कि पूरे क्षेत्र और दुनिया की सुरक्षा को खतरा पैदा हो रहा है।
पवित्र स्थलों और प्रमुख शहरों को बनाया निशाना
सऊदी विदेश मंत्रालय ने सोमवार को जारी बयान में हूती मिलिशिया पर मक्का और मदीना समेत सऊदी अरब के कई शहरों को निशाना बनाने और दक्षिणी लाल सागर तथा बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में सऊदी जहाजों पर हमले करने का आरोप लगाया।
मंत्रालय ने कहा कि हूतियों ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद के अलावा अबहा, खमिस मुशैत, जजान, नजरान, ताइफ और यानबू जैसे शहरों को भी निशाना बनाया है। मक्का और मदीना को “धरती के सबसे पवित्र स्थलों” के रूप में रेखांकित करते हुए कहा गया कि इन पवित्र स्थलों के खिलाफ बार-बार हमले बेहद गंभीर चिंता का विषय हैं।
राजनीतिक समाधान के बजाय तनाव का रास्ता
सऊदी विदेश मंत्रालय ने कहा कि 2014 में यमन की वैध सरकार के खिलाफ हूती विद्रोहियों के सत्ता पर कब्जे के बाद से सऊदी अरब ने यमन संकट के व्यापक और स्थायी राजनीतिक समाधान के लिए लगातार प्रयास किए हैं।
मंत्रालय के अनुसार, सऊदी अरब ने राजनीतिक समाधान का समर्थन किया, लेकिन हूती मिलिशिया ने शांति के बजाय सैन्य तनाव बढ़ाने का रास्ता चुना। इससे यमन और वहां के लोगों को और अधिक मानवीय तथा आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
बाहरी एजेंडे को थोपने का आरोप
बयान में हूतियों पर बाहरी एजेंडों को आगे बढ़ाने के लिए यमन को संघर्ष में धकेलने का आरोप लगाया गया।
संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा का संकल्प
सऊदी अरब ने अपने क्षेत्र, संसाधनों और संप्रभुता की रक्षा को अपना स्वाभाविक अधिकार बताते हुए कहा कि वह अपने नागरिकों और देश में रह रहे लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप सभी आवश्यक कदम उठाएगा।
यमनी सरकार को समर्थन जारी रखने की प्रतिबद्धता
सऊदी विदेश मंत्रालय ने साथ ही यमन की राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद और यमनी सरकार को अपना पूर्ण राजनीतिक और सैन्य समर्थन जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। मंत्रालय ने कहा कि उसका उद्देश्य हूती नियंत्रण को समाप्त कर यमन के राज्य और उसकी संस्थाओं को बहाल करने में मदद करना है।
एयरपोर्ट और रिफाइनरी पर हमले का हूती दावा
सोमवार को हूती विद्रोहियों ने कहा था कि उन्होंने रियाद के इंटरनेशनल एयरपोर्ट, अरामको रिफाइनरी और सऊदी अरब में कई अन्य जगहों पर हमला किया है।
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