भारत और कनाडा के बीच अहम व्यापार वार्ता शुरू
ओटावा। भारत और कनाडा सोमवार को एक व्यापक व्यापार समझौते के लिए बातचीत का अहम पांचवां दौर शुरू करेंगे। दोनों देश अपने आर्थिक संबंधों को तेजी से बढ़ा रहे हैं, जो हाल ही में लंबे समय तक चले राजनयिक तनाव से बाहर निकले हैं। इस समझौते को साल के अंत तक पूरा करने की कोशिशें तेज की जा रही हैं। ग्लोबल अफेयर्स कनाडा के अनुसार, कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (सीईपीए) यानी व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते के लिए बातचीत 5 से 9 अक्टूबर तक चलेगी।
जी20 बैठक के बाद बातचीत को मिली गति
यह नया दौर पिछले सप्ताह मिल्वौकी में जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के दौरान वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू के बीच हुई बातचीत के बाद हो रहा है। दोनों मंत्रियों ने बातचीत में हुई प्रगति की समीक्षा की और ओटावा में होने वाले अगले दौर पर चर्चा की। ग्लोबल अफेयर्स कनाडा ने बैठक के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि सिद्धू ने 2026 के अंत तक दोनों देशों के लिए फायदेमंद समझौता करने की दिशा में काम करने के महत्व पर जोर दिया।
2030 तक व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य
यह बातचीत भारत और कनाडा के बीच आर्थिक संबंधों को नए सिरे से मजबूत करने के अहम दौर में हो रही है। दोनों सरकारें व्यापार को काफी बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं और साथ ही ऊर्जा, जरूरी मिनरल्स, एयरोस्पेस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों की पहचान कर रही हैं जिनमें गहरे सहयोग की संभावना है। कनाडा का कहना है कि भारत के साथ दोनों तरफ से होने वाला वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार 2025 में 30.4 अरब डॉलर तक पहुंच गया और उसने 2030 तक इस व्यापार को दोगुना करके सालाना 70 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। सीईपीए बातचीत के चार दौर पहले ही पूरे हो चुके हैं और पिछला दौर 18 सितंबर को नई दिल्ली में खत्म हुआ था। कनाडा के अधिकारियों ने कहा है कि वार्ताकार इस साल के अंत से पहले बातचीत पूरी करने के साझा लक्ष्य के साथ गति बनाए रखने और बचे हुए मतभेदों को कम करने के लिए काम कर रहे हैं।
'टीम कनाडा ट्रेड मिशन' का भारत दौरा
पांचवें दौर के ठीक बाद कनाडा की तरफ से भारत में व्यापार को बढ़ावा देने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया जाएगा। सिद्धू 12 से 17 अक्टूबर तक भारत में 'टीम कनाडा ट्रेड मिशन' का नेतृत्व करेंगे। इस मिशन में प्रमुख क्षेत्रों के व्यवसायों से लगभग 300 कनाडाई प्रतिनिधि शामिल होंगे। सिद्धू और गोयल ने मिल्वौकी में अपनी बैठक के दौरान इस मिशन पर चर्चा की। कनाडा का कहना है कि इसका मकसद नए अवसर पैदा करना और दोनों देशों के व्यवसायों के बीच व्यापारिक संबंधों को बढ़ाना है। सिद्धू और गोयल ने मिल्वौकी में अपनी मुलाकात के दौरान इस मिशन पर चर्चा की। कनाडा का कहना है कि इसका मकसद नए मौके पैदा करना और दोनों देशों के व्यवसायों के बीच कमर्शियल संबंधों को बढ़ाना है।
ऊर्जा और एआई जैसे क्षेत्रों में सहयोग की उम्मीद
कनाडा के मंत्री ने ऊर्जा, अहम खनिजों और अन्य सामानों के लिए भारत की बढ़ती ज़रूरतों को पूरा करने के लिए अपने देश को एक संभावित लॉन्ग-टर्म सप्लायर के तौर पर भी पेश किया है। पिछले महीने मुंबई में गोयल से मिलने के बाद सिद्धू ने कहा, "इस हफ्ते मंत्री गोयल के साथ मेरी बातचीत एक ऐसे समझौते की दिशा में वास्तविक प्रगति कर रही है जो 2030 तक हमारे आपसी व्यापार को दोगुना करके 70 अरब डॉलर तक पहुंचा देगा।" उन्होंने कहा, "भारत की तेजी से होती तरक्की और ऊर्जा, जरूरी खनिजों, एयरोस्पेस, एआई और अन्य क्षेत्रों में कनाडा की बढ़त का मतलब है कि हमारे व्यवसायों और कामगारों के लिए बहुत अधिक संभावनाएं हैं।"
अमेरिका पर निर्भरता कम करने की रणनीति
कनाडा साथ ही अपने अंतरराष्ट्रीय व्यापार में विविधता लाने और अमेरिका पर अपनी बहुत ज्यादा निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है। ओटावा का कहना है कि वह अगले दशक में अमेरिका के बाहर के बाजारों में निर्यात दोगुना करना चाहता है, जिससे तेजी से बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था उसकी व्यापार विविधता रणनीति का एक अहम हिस्सा बन गई है।
व्यापार और सेवाओं के मौजूदा आंकड़े
आर्थिक आंकड़े इस रिश्ते के दायरे को दिखाते हैं। कनाडाई सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में दोनों देशों के बीच सामान का व्यापार 13.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया। भारत को कनाडा का निर्यात 3.9 अरब डॉलर का था, जिसमें सब्जियां, खनिज ईंधन और तेल और लकड़ी की लुगदी मुख्य थे। भारत से सामान का आयात 9.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें कीमती पत्थर और धातुएं, मशीनरी और दवाएं मुख्य श्रेणियां थीं। सेवाएं इस रिश्ते का और भी बड़ा हिस्सा हैं। 2025 में कनाडा के सेवा निर्यात का मूल्य 15.2 अरब डॉलर था, जिसमें शिक्षा से जुड़ी यात्रा का सबसे बड़ा हिस्सा था।
इनपुट : आईएएनएस
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