शहबाज शरीफ के भाषण के दौरान बलूच-पश्तून कार्यकर्ताओं का UN के बाहर विरोध प्रदर्शन
संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के संबोधन के दौरान बलूच और पश्तून कार्यकर्ताओं ने यूएन परिसर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने अपने समुदाय के लोगों की हत्या, जेल में डाले जाने और जबरन गायब किए जाने के कथित मामलों का विरोध किया।
न्यूयॉर्क और जिनेवा दोनों जगह हुए प्रदर्शन
शुक्रवार को अलग-अलग हुए प्रदर्शनों में बलूच नेशनल मूवमेंट (BNM) और पश्तून तहफुज मूवमेंट (PTM) के समर्थकों ने बलूच और पश्तून लोगों पर कथित हमले और उनके दमन को रोकने की मांग की।
न्यूयॉर्क में BNM का विरोध प्रदर्शन ऐसे समय हुआ, जब जिनेवा में संगठन का तीन दिन का सम्मेलन भी चल रहा था।
जिनेवा सम्मेलन में उठे कई गंभीर मुद्दे
इस सम्मेलन में 'बलूचिस्तान में मानवाधिकार की स्थिति, जबरन गायब किए जाने, बिना कानूनी प्रक्रिया के हत्याएं, सामूहिक सजा और राजनीतिक आजादी पर पाबंदियां' जैसे मुद्दे उठाए गए।
BNM की वेबसाइट के मुताबिक, संगठन ने जिनेवा में भी एक रैली की। शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 63वें सत्र के दौरान BNM ने जिनेवा में एक विरोध रैली निकाली। संगठन ने कहा कि इसका मकसद बलूचिस्तान में पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से कथित तौर पर बढ़ते मानवाधिकार उल्लंघनों की ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचना था।
तख्तियों पर लिखे तीखे नारे
प्रदर्शन के दौरान लोगों ने कई तख्तियां ले रखी थीं, जिन पर लिखा था — "वे आम नागरिक थे, निशाना नहीं। यूएन अब कार्रवाई करे और बलूचिस्तान में सामूहिक सजा बंद कराए", "जबरन गायब करना बंद करो" और "बलूचिस्तान पर पाकिस्तान ने कब्जा किया है।" गौरतलब है कि ये सभी नारे और आरोप प्रदर्शनकारियों के अपने दावे थे।
BNM के मुताबिक, जिनेवा के ब्रोकन चेयर स्मारक पर एक फोटो प्रदर्शनी और विरोध कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, जहां प्रदर्शनकारियों ने बलूचिस्तान में कथित तौर पर बिगड़ती मानवाधिकार स्थिति की ओर दुनिया का ध्यान खींचने की कोशिश की।
PTM ने भी पढ़ा प्रस्ताव, जताई गहरी चिंता
पश्तूनों का प्रतिनिधित्व करने वाले पश्तून तहफुज मूवमेंट (PTM) ने अपने प्रदर्शन के दौरान एक प्रस्ताव पढ़ा। इसमें संगठन ने कहा कि वह बिना कानूनी प्रक्रिया के हत्याओं, लोगों को जबरन गायब किए जाने और अपने इलाकों में बिना फटे गोला-बारूद के पड़े होने से जुड़ी विश्वसनीय शिकायतों को लेकर बेहद चिंतित है।
पश्तूनों को ऐसे समुदाय के रूप में बताया गया है, जो अफगानिस्तान और पाकिस्तान को अलग करने वाली डूरंड लाइन के दोनों तरफ रहते हैं। PTM इस सीमा को मनमाने ढंग से खींची गई सीमा मानता है।
तालिबान समर्थन के आरोप, जांच की मांग
PTM ने अफगानिस्तान के अंदर पश्तून इलाकों में पाकिस्तान की ओर से कथित तौर पर किए गए जमीनी और हवाई हमलों की भी निंदा की। संगठन ने पाकिस्तान पर पहले तालिबान का समर्थन करने का आरोप लगाया और पाकिस्तान की ओर से अतीत और वर्तमान में 'हथियारबंद समूहों' को कथित समर्थन की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की।
PTM ने तालिबान से अपनी अलग पहचान पर जोर देते हुए अफगानिस्तान में महिलाओं और लड़कियों की शिक्षा तथा घर से बाहर काम करने पर लगी पाबंदियों की भी निंदा की।
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