8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 3.61, 3.833 और 4 को लेकर तेज हुई चर्चा, जानिए कितना बढ़ सकता है वेतन

Aug 30, 2026 - 10:54
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8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 3.61, 3.833 और 4 को लेकर तेज हुई चर्चा, जानिए कितना बढ़ सकता है वेतन
8th Pay Commission

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर उत्सुकता लगातार बढ़ रही है। 3 सितंबर को आयोग के गठन के 10 महीने पूरे होने जा रहे हैं और देशभर में विभिन्न हितधारकों के साथ परामर्श का दौर जारी है। आयोग की अध्यक्षता न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं और इसे अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। वेतन संशोधन, भत्तों, पेंशन और अन्य सेवा संबंधी मामलों के बीच सबसे अधिक चर्चा फिटमेंट फैक्टर को लेकर हो रही है, क्योंकि इसी के आधार पर कर्मचारियों के मूल वेतन और पेंशन में बढ़ोतरी तय होती है। 

फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक होता है जिसके आधार पर वर्तमान मूल वेतन को संशोधित कर नया वेतन तय किया जाता है। वर्तमान में केंद्रीय कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन 18,000 रुपए है, जिसे 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर तय किया गया था। 6वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 1.86 रखा गया था, जबकि 7वें वेतन आयोग में इसे बढ़ाकर 2.57 कर दिया गया था। इसी बदलाव के कारण न्यूनतम मूल वेतन 7,000 रुपए से बढ़कर 18,000 रुपए हो गया था। अब 8वें वेतन आयोग के लिए विभिन्न कर्मचारी और पेंशनभोगी संगठनों ने इससे कहीं अधिक फिटमेंट फैक्टर की मांग की है।

सर्वे ऑफ इंडिया की मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन (एमएसए) ने 3.61 फिटमेंट फैक्टर का प्रस्ताव रखा है। यदि इस प्रस्ताव को स्वीकार किया जाता है तो वर्तमान 18,000 रुपए के न्यूनतम मूल वेतन को बढ़ाकर लगभग 64,980 रुपए, यानी करीब 65,000 रुपए किया जा सकता है। दूसरी ओर, नेशनल काउंसिल-जेसीएम (एनसीजेसीएम) स्टाफ साइड और भारत पेंशनर्स समाज (बीपीएस) ने 3.833 फिटमेंट फैक्टर की मांग की है। इस स्थिति में न्यूनतम मूल वेतन करीब 69,000 रुपए तक पहुंच सकता है।

सबसे अधिक मांग भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ (बीपीएमएस) ने की है, जिसने 4.00 फिटमेंट फैक्टर लागू करने का सुझाव दिया है। यदि सरकार इस प्रस्ताव को स्वीकार करती है, तो न्यूनतम मूल वेतन बढ़कर 72,000 रुपए तक पहुंच सकता है। इसका मतलब है कि 3.61 और 4.00 फिटमेंट फैक्टर वाले प्रस्तावों के बीच ही लगभग 7,020 रुपए प्रति माह का अंतर बनता है।

हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि 65,000 रुपए, 69,000 रुपए और 72,000 रुपए के ये आंकड़े केवल विभिन्न संगठनों द्वारा दिए गए प्रस्तावों पर आधारित अनुमान हैं। इन्हें 8वें वेतन आयोग के तहत तय होने वाली अंतिम न्यूनतम सैलरी नहीं माना जाना चाहिए। वास्तविक वेतन वृद्धि केवल फिटमेंट फैक्टर पर निर्भर नहीं करेगी, बल्कि नए वेतन मैट्रिक्स, महंगाई भत्ते, अन्य भत्तों और आयोग की अंतिम सिफारिशों पर भी निर्भर करेगी।

पेंशनभोगियों के लिए भी फिटमेंट फैक्टर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पेंशन और कई सेवानिवृत्ति लाभ मूल वेतन से जुड़े होते हैं। यदि उच्च फिटमेंट फैक्टर को मंजूरी मिलती है तो इसका सीधा फायदा लाखों पेंशनभोगियों को भी मिल सकता है। हालांकि अंतिम प्रभाव का सही आकलन तभी संभव होगा जब आयोग अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा और उस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

फिलहाल 8वें वेतन आयोग के समक्ष विभिन्न कर्मचारी संगठनों की मांगें पहुंच रही हैं और चर्चा जारी है। ऐसे में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को अभी अंतिम सिफारिशों का इंतजार करना होगा। आयोग की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि फिटमेंट फैक्टर क्या होगा और कर्मचारियों के वेतन तथा पेंशन में वास्तविक बढ़ोतरी कितनी होगी।

इनपुट : आईएएनएस

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