घरेलू क्रिकेट में रनों और विकेटों का पहाड़, फिर भी भारतीय टेस्ट टीम में मौके को तरस रहे ये 5 धाकड़ खिलाड़ी; देखें लिस्ट

भारत के घरेलू क्रिकेट (Ranji Trophy, Duleep Trophy, Irani Cup) को दुनिया के सबसे कठिन और प्रतिस्पर्धी प्रथम श्रेणी टूर्नामेंट्स में गिना जाता है। हर साल कई खिलाड़ी लाल गेंद के क्रिकेट में रनों का अंबार लगाते हैं और अपनी गेंदबाजी से विरोधी टीमों को घुटनों पर ला देते हैं, लेकिन राष्ट्रीय टीम में कड़े कॉम्पिटिशन और स्टार खिलाड़ियों की मौजूदगी के चलते हर किसी को टीम इंडिया की टेस्ट कैप पहनने का मौका नहीं मिल पाता। जानिए इन 5 खिलाड़ियों के आंकड़े, घरेलू क्रिकेट में उनकी निरंतरता और टेस्ट चयन में आ रही चुनौतियों की पूरी विस्तृत रिपोर्ट।

Aug 29, 2026 - 16:06
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घरेलू क्रिकेट में रनों और विकेटों का पहाड़, फिर भी भारतीय टेस्ट टीम में मौके को तरस रहे ये 5 धाकड़ खिलाड़ी; देखें लिस्ट

नई दिल्ली। भारत में घरेलू क्रिकेट के प्रदर्शन को सिलेक्शन का आधार माना जाता है। खासतौर पर टेस्ट क्रिकेट में खिलाड़ियों का सिलेक्शन उनके घरेलू क्रिकेट के प्रदर्शन पर काफी हद तक निर्भर भी करता है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने इंटरनेशनल क्रिकेटर्स को भी खाली समय में घरेलू क्रिकेट में हिस्सा लेने की सलाह दे चुका है। इस कड़ी में ईशान किशन और श्रेयस अय्यर के खिलाफ सख्त कदम भी उठाए जा चुके हैं।  

हालांकि, भारत के घरेलू क्रिकेट में कुछ ऐसे खिलाड़ी भी हैं, जो वर्षों से लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन सिलेक्टर्स का ध्यान अपनी ओर नहीं खींच पा रहे हैं। इन खिलाड़ियों के आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि इन्हें कम से कम टेस्ट टीम में मौका और मैदान पर अपनी काबिलियत दिखाने के लिए टी20 फॉर्मेट से आने वाले खिलाड़ियों के ऊपर तरजीह जरूर मिलनी चाहिए।

अभिमन्यु ईश्वरन: फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में खेले 114 मुकाबलों में 47 की औसत से 8,396 रन बना चुके अभिमन्यु ईश्वरन भारतीय ड्रेसिंग रूम तक तो पहुंच चुके हैं, लेकिन पिछले तीन साल से अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। अनुभव और दमदार रिकॉर्ड होने के बावजूद अभिमन्यु ड्रेसिंग रूम में बैठकर मैदान पर भारत की जर्सी पहनकर उतरने का सपना ही देखते रहे हैं। फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में वह 27 शतक और 36 अर्धशतक भी लगा चुके हैं। अभिमन्यु का फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में डेब्यू 2013 में हुआ था और उनकी उम्र डेब्यू का इंतजार करते-करते 30 साल हो चुकी है।

धर्मेंद्रसिंह जडेजा: 100 फर्स्ट-क्लास मैचों में 423 विकेट। लिस्ट-ए क्रिकेट में 121 विकेट और टी20 में 65 विकेट। यह धर्मेंद्रसिंह जडेजा के बेमिसाल आंकड़े हैं, जिन्होंने साल 2013 में फर्स्ट-क्लास डेब्यू किया था। हालांकि, वह पिछले 13 वर्षों से भारतीय टेस्ट टीम में चुने जाने की आस लगाए बैठे हैं।

शाहबाज अहमद: भारत के लिए 3 वनडे और दो टी20 इंटरनेशनल मुकाबले खेल चुके शाहबाज अहमद लंबे समय से टेस्ट टीम में मौका मिलने की राह देख रहे हैं। शाहबाज बल्ले के साथ-साथ गेंद से भी अहम योगदान दे सकते हैं। 43 फर्स्ट-क्लास मैचों में शाहबाज 146 विकेट निकाल चुके हैं, जबकि बल्लेबाजी में उन्होंने 2,493 रन बनाए हैं। दलीप ट्रॉफी 2026 में भी शाहबाज अपने प्रदर्शन से हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचने में जुटे हुए हैं।

सरफराज खान: सरफराज खान भारतीय टीम के लिए टेस्ट डेब्यू कर चुके हैं। हालांकि, 2024 में डेब्यू करने के बाद पिछले दो वर्षों में उन्हें सिर्फ 6 टेस्ट मैच ही खेलने का मौका मिला है। जिन मुकाबलों में सरफराज को मौका भी मिला, तो लगभग हर पारी में उनका बल्लेबाजी क्रम ही बदलता रहा। फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में 64 की औसत से रन बनाने वाले सरफराज ने अपनी फिटनेस पर काम करते हुए वजन भी घटाया है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें काबिलियत के अनुसार मौके नहीं मिल सके हैं।

शम्स मुलानी: घरेलू क्रिकेट में शम्स मुलानी को मुंबई का स्टार ऑलराउंडर माना जाता है। बल्ले और गेंद दोनों से ही वह किसी भी मैच का रुख पलटने का दमखम रखते हैं। 59 फर्स्ट-क्लास मैचों में मुलानी ने 269 विकेट चटकाए हैं, जबकि बल्लेबाजी में वह 2,577 रन बना चुके हैं। मुलानी एक शतक और 22 अर्धशतक भी लगा चुके हैं। रणजी ट्रॉफी 2025-26 में उन्होंने 7 मुकाबलों में 30 विकेट चटकाए थे। घरेलू क्रिकेट में लगातार दमदार प्रदर्शन के बावजूद वह सिलेक्टर्स की निगाहों में अब तक नहीं आ सके हैं।


इनपुट : आईएएनएस

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