मेरठ में सेंट्रल मार्केट मामले में व्यापारियों की टूट गई आखिरी उम्मीद, कोर्ट से नहीं मिली राहत; अगली सुनवाई 9 दिसंबर को
सुप्रीम कोर्ट में शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट मामले की सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और के. विश्वनाथन की पीठ ने मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) के जोन ए में चिन्हित 16,726 अवैध इमारतों को सील करने का आदेश दिया। इन इमारतों में व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं। कोर्ट ने जोन बी, सी और डी में भी इस तरह की संपत्तियों को चिन्हित करने के निर्देश दिए हैं। अब इस मामले की अगली सुनवाई 9 दिसंबर को होगी।
- आवासीय भूखंड का अस्तेमाल अगर कामर्शियल में किया जा रहा है तो वह अवैध है: सुप्रीम कोर्ट
- अवैध संपत्तियों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- आवास विकास के साथ अब मेडा भी एक्शन ले।
- मेरठ विकास प्राधिकरण के जोन ए में चिन्हित 16,726 अवैध इमारतों को सील करने का आदेश।
मेरठ। सेंट्रल मार्केट ध्वस्तीकरण मामले में व्यापारियों की आखिरी उम्मीद भी टूट गई है। सोमवार 21 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट मामले की सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और के. विश्वनाथन की पीठ ने मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) के जोन ए में चिन्हित 16,726 अवैध इमारतों को सील करने का आदेश दिया। इन इमारतों में व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं। कोर्ट ने जोन बी, सी और डी में भी इस तरह की संपत्तियों को चिन्हित करने के निर्देश दिए हैं। अब इस मामले की अगली सुनवाई 9 दिसंबर को होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर पर आदेश कर दिया है कि आवासीय भूखंड का अस्तेमाल अगर कामर्शियल में किया जा रहा है तो वह अवैध है और जल्द से जल्द उसको बंद कराया जाना है। ऐसे में अभी तक जो मामला सिर्फ आवास विकास और शास्त्रीनगर क्षेत्र तक था वह अब मेडा में भी आ गया है।
आवास एवं विकास परिषद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नवीन पहवा ने पक्ष रखा। प्रदेश सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पैरवी की। उन्होंने कोर्ट को बताया कि ईडब्ल्यूएस और एलआईजी वर्ग के 486 आवासों के लिए पुनर्वास नीति लाई जा रही है। परिषद की ओर से 14 जुलाई को दिए गए आदेश की अनुपालन रिपोर्ट भी कोर्ट में प्रस्तुत की गई।
कोर्ट ने जोन ए, बी, सी और डी के अवैध अतिक्रमण चिन्हित करने के आदेश दिया है। जोन ए के 16726 अवैध निर्माण होंगे सील। सिर्फ सेंट्रल मार्किट नही अब विकास प्रधिकरण का जोन ए में चलेगा बुलडोजर। जानिए जोन ए में क्या आता है। समझिए...हापुड़ रोड बिजली बंबा बाईपास पुलिस चौंकी से शुरू होगा जोन ए। वहां से मेरठ शहर की तरफ चलते हुए बाइ तरफ का हिस्सा आएगा। यानी हापुड़ रोड की बाई साइड के जाकिर कालोनी, के हापुड़ अड्डा तक, वहां से. शाहपीर गेट, बच्चा पार्क, एम प्राकश नर्सिमग होम वाली साइड होकर बेगमपुल से जगत सिनेमा हाल के साने से सोतीगंज साइड दिल्ली रोड, बसल सिनेमा, रोडवेज साइड, जली कोठी, केसरगंज, फुटबाल चौक, मेवला फाटक, उससे आगे माधमपुरम वाले मंदिर के सामने से यानी लगभग पूरा पुराना शहर।
उल्देपुर की अवैध कॉलोनियों पर भी सवाल : उल्देपुर में अवैध कॉलोनियां विकसित किए जाने के मामले में कोर्ट ने प्रमुख सचिव पी. गुरु प्रसाद से सवाल किया कि ये कॉलोनियां कैसे अस्तित्व में आईं। पी. गुरु प्रसाद सुनवाई के दौरान ऑनलाइन मौजूद रहे। कोर्ट ने कहा कि प्रत्येक कॉलोनी को ध्वस्त किया जाए।
व्यापारियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. सूरत सिंह ने पैरवी की। उन्होंने ध्वस्तीकरण से पहले पुनर्वास और तब तक यथास्थिति बनाए रखने की मांग की। इस पर कोर्ट ने कहा कि इस मामले को आवास एवं विकास परिषद देखेगा।
छह भवनों पर कार्रवाई हो चुकी है: सुप्रीम कोर्ट के 14 जुलाई के आदेश के बाद आवास एवं विकास परिषद ने सील की गई 44 संपत्तियों के संबंध में कार्रवाई शुरू की थी। परिषद के अनुसार, इन संपत्तियों का आवासीय उपयोग निर्धारित था, लेकिन वहां व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं। कोर्ट ने अनधिकृत निर्माण हटाने के निर्देश दिए थे।
आदेश के बाद परिषद ने संपत्तियों की सील खोलकर सर्वे कराया। आवंटियों को नोटिस देकर 15 दिन में अनधिकृत निर्माण हटाने के लिए कहा गया था। तय अवधि में कार्रवाई नहीं होने पर परिषद ने 16 सितंबर को छह भवनों को ध्वस्त किया। इनमें पांच कॉम्प्लेक्स और एक बैंक्वेट हॉल शामिल था।
सभी 44 भवनों को करें सील : कोर्ट को बताया गया कि 44 आवासीय भवनों में व्यावसायिक निर्माण के मामले में छह भवन ऐसे थे, जो बिना नक्शे के बनाए गए थे। इन्हें पूरी तरह ध्वस्त किया जा चुका है। वहीं 38 संपत्तियों के पास आवासीय स्वीकृति है, लेकिन इनमें अतिरिक्त निर्माण कर व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है। इन 44 संपत्तियों में से 24 के अवैध निर्माण को आवंटियों की ओर से पूरी तरह ध्वस्त किया जा चुका है, जबकि बाकी 20 में ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया चल रही है। कोर्ट ने सभी 44 सील भवनों को ध्वस्त कर नए सिरे रिपोर्ट पेश करने को कहा।
201 संपत्ति के सेटबैक में अवैध निर्माण: परिषद की ओर से दाखिल की गई रिपोर्ट में बताया गया कि 201 संपत्तियां ऐसी पाई गई थीं, जिनमें सेटबैक में अवैध निर्माण था। इनमें से 63 संपत्तियों के अवैध निर्माण पूरी तरह हटा दिए गए हैं जबकि शेष 138 पर कार्रवाई की जा रही है। खंडपीठ ने प्रमुख सचिव आवास एवं शहर नियोजन, चेयरमैन आवास एवं विकास परिषद तथा प्रमुख सचिव नगर विकास पी. गुरु प्रसाद को स्पष्ट निर्देश दिए और कहा कि वे कार्रवाई की निगरानी करें। मामले में 9 दिसंबर की तारीख तय करते हुए नए सिरे से अनुपालन आख्या दाखिल करने के आदेश दिए गए।
आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना के अधिवक्ता तुषार जैन ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता को लगातार धमकियां मिल रही हैं और उसे जान का खतरा है। इस पर कोर्ट ने उन्हें पुलिस स्टेशन जाने को कहा। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि सुरक्षा का खतरा है तो वे शहर छोड़ दें। इस पर छोटे व्यवसाय की दलील दी गई। इसके बाद कोर्ट ने प्रदेश सरकार को लोकेश खुराना की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
14 जुलाई के आदेश का करें पालन: याचिकाकर्ता के अधिवक्ता की ओर से बताया गया कि सील किए गए अवैध निर्माणों पर पूरी तरह से कार्रवाई नहीं हुई है। इस पर खंडपीठ ने स्पष्ट कहा कि 44 सील भवनों को ध्वस्त किया जाए। साथ ही पूर्व में 14 जुलाई को दिए गए आदेश का अनुपालन कराने के निर्देश दिए। ईडब्ल्यूएस और एलआईजी मकानों के संबंध में भी कोर्ट ने कहा कि सरकार इनके लिए पुनर्वास की नीति बनाए।
इसी बीच व्यापारियों के अधिवक्ता सूरत सिंह की ओर से भी पक्ष रखने की गुहार लगाई गई, जिसे कोर्ट ने सुनने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान रविंद्र गुर्जर, एडवोकेट अंजनेय सिंह, एडवोकेट राहुल मलिक, नितेष पंवार आदि भी मौजूद रहे। उप आवास आयुक्त अनिल कुमार सिंह का कहना है कि अदालत के आदेश का अनुपालन कराया जाएगा।
बेगमपुल, लिसाड़ीगेट, ब्रह्मपुरी सभी जद में आएंगे : सेंट्रल मार्केट मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। केवल एक ही जोन की रिपोर्ट दाखिल करने पर खंडपीठ ने नाराजगी जताई। इस रिपोर्ट में बताया गया कि बेगमपुल, लिसाड़ीगेट, ब्रह्मपुरी, भगवतपुरा, तारापुरी समेत कई इलाकों में 16,726 भवन अनाधिकृत हैं, जिन्हें सील करने के आदेश दिए गए।
शास्त्रीनगर में चल रही ध्वस्तीकरण और सीलिंग की कार्रवाई अब केवल सेंट्रल मार्केट तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरा शहर इसकी जद में आ सकता है। सेंट्रल मार्केट मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने अवैध निर्माण को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा कि अवैध निर्माण 25 साल पुराना हो या 50 साल पुराना, वह अवैध ही रहेगा।
पूरे शहर पर ही मंडराया खतरा : मेडा की ओर से सुनवाई के दौरान जोन ए की सर्वे रिपोर्ट दाखिल की गई। रिपोर्ट में बताया गया कि शहर के जोन ए (बेगमपुल, लिसाड़ीगेट, ब्रह्मपुरी, भगवतपुरा, तारापुरी समेत कई इलाके) में 16,726 भवन अनाधिकृत हैं। इस पर जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की खंडपीठ ने इन सभी निमार्ण को सील करने के आदेश दिए।
वहीं, बाकी तीन जोन बी, सी और डी की रिपोर्ट दाखिल नहीं किए जाने पर अदालत ने मेडा सचिव अर्पित गुप्ता पर नाराजगी जताई। मामले में 9 दिसंबर की तारीख तय करते हुए तब तक अनुपालन आख्या दाखिल करने के निर्देश दिए गए।
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