बाजार की पाठशाला: इन लोगों के लिए 31 अगस्त है आईटीआर फाइल करने की डेडलाइन, जानिए किसके लिए कौन-सा फॉर्म होगा सही

Aug 29, 2026 - 11:54
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बाजार की पाठशाला: इन लोगों के लिए 31 अगस्त है आईटीआर फाइल करने की डेडलाइन, जानिए किसके लिए कौन-सा फॉर्म होगा सही
Income Tax

नई दिल्ली। अगर आप नौकरी के साथ कारोबार, पेशे या स्वतंत्र रूप से काम करके कमाई करते हैं, तो आपके लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख नजदीक आ गई है। बिना कर ऑडिट वाली कारोबारी या पेशेवर आय रखने वाले करदाताओं को 31 अगस्त 2026 तक अपना आयकर रिटर्न दाखिल करना होगा। वहीं, जिन कारोबारियों और पेशेवरों के खातों का कर ऑडिट जरूरी है, उनके लिए रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर 2026 है। ऐसे करदाताओं के लिए रिटर्न दाखिल करने से पहले यह समझना जरूरी है कि उनकी आय और वित्तीय स्थिति के आधार पर कौन-सा रिटर्न फॉर्म लागू होगा। 

आयकर विभाग के अनुसार, 31 जुलाई की अंतिम तारीख तक 6.5 करोड़ से अधिक आयकर रिटर्न दाखिल किए जा चुके थे, जिनमें वेतनभोगी लोगों, पेंशनभोगियों, छात्रों की आय वाले करदाताओं और अलग-अलग स्रोतों से आय प्राप्त करने वाले लोगों के रिटर्न शामिल हैं। इनमें कारोबार (बिजनेस) और पेशे (प्रोफेशन) से आय वाले बड़ी संख्या में करदाता भी शामिल रहे। अब बिना कर ऑडिट वाले कारोबार या पेशे से आय रखने वाले बाकी करदाताओं के लिए 31 अगस्त की तारीख महत्वपूर्ण है।

बिजनेस या प्रोफेशन से आय होने पर आम तौर पर आईटीआर-3 या आईटीआर-4 में से किसी एक फॉर्म का इस्तेमाल किया जाता है। सही फॉर्म का चुनाव करदाता की आय, कारोबार की प्रकृति और कर व्यवस्था पर निर्भर करता है। गलत फॉर्म में रिटर्न दाखिल करने से बाद में कर विभाग की ओर से परेशानी या स्पष्टीकरण की जरूरत पड़ सकती है।

आईटीआर-3 उन व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों (एचयूएफ) के लिए होता है, जिनकी आय बिजनेस या प्रोफेशन से होती है और जो प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन यानी अनुमानित कर व्यवस्था का विकल्प नहीं चुनते हैं। 

अगर टैक्सपेयर नियमित रूप से अकाउंट बुक्स मेंटेन करता है, उसकी कुल आय 50 लाख रुपये से अधिक है या वह फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस यानी एफएंडओ ट्रेडिंग करता है, तो कई मामलों में आईटीआर-3 लागू हो सकता है।

आईटीआर-3 के जरिए वे टैक्सपेयर्स वेतन या पेंशन, हाउस प्रॉपर्टी, बिजनेस या प्रोफेशन, कैपिटल गेन्स और अन्य स्रोतों से होने वाली आय की जानकारी दे सकते हैं। आम तौर पर यह फॉर्म उन व्यक्तियों या एचयूएफ के लिए इस्तेमाल होता है, जो आईटीआर-1, आईटीआर-2 या आईटीआर-4 के तहत रिटर्न दाखिल करने के योग्य नहीं हैं।

वहीं, आईटीआर-4 यानी सुगम उन व्यक्तियों, एचयूएफ और फर्म के लिए है, जो प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम के तहत बिजनेस या प्रोफेशनल इनकम घोषित करते हैं और जिनकी कुल आय निर्धारित सीमा के भीतर है। सामान्य तौर पर इसमें 50 लाख रूपये तक की कुल आय वाले पात्र टैक्सपेयर्स शामिल हो सकते हैं।

इसमें बिजनेस या प्रोफेशन से होने वाली आय के अलावा वेतन या पेंशन, अधिकतम दो हाउस प्रॉपर्टी से आय और ब्याज, फैमिली पेंशन तथा डिविडेंड जैसी अन्य स्रोतों से आय भी शामिल की जा सकती है। निर्धारित शर्तों के तहत कृषि आय 5,000 रूपये तक और सेक्शन 112ए के तहत आने वाले कुछ लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स भी इसमें रिपोर्ट किए जा सकते हैं।

हालांकि, हर टैक्सपेयर आईटीआर-4 का इस्तेमाल नहीं कर सकता। अगर सेक्शन 112ए के तहत शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स या निर्धारित सीमा से अधिक लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स है, अनलिस्टेड इक्विटी शेयर हैं, विदेशी संपत्ति या विदेश से आय है, घाटे को आगे कैरी फॉरवर्ड करना है, या ऐसी आय है जिस पर विशेष दर से टैक्स लगता है, तो आईटीआर-4 का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। कंपनी के डायरेक्टर भी इस फॉर्म के जरिए रिटर्न दाखिल नहीं कर सकते।

विशेषज्ञों के अनुसार, आयकर रिटर्न दाखिल करने से पहले करदाताओं को फॉर्म 26एएस, वार्षिक सूचना विवरण यानी एआईएस, करदाता सूचना सारांश यानी टीआईएस, फॉर्म 16 और फॉर्म 16ए की जानकारी जांच लेनी चाहिए।

साथ ही बैंक खाते और कर भुगतान से जुड़े चालान भी तैयार रखने चाहिए। कारोबारियों को बिक्री-खरीद का रिकॉर्ड, लाभ-हानि खाता, बैलेंस शीट, बिल और चालान, जीएसटी रिटर्न तथा भुगतान माध्यमों से मिले डिटेल्स का भी मिलान करना चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर करदाता ने शेयर बाजार में निवेश या ट्रेडिंग की है, तो ब्रोकरेज स्टेटमेंट, कॉन्ट्रैक्ट नोट, डीमैट स्टेटमेंट और कैपिटल गेन्स से जुड़ी पूरी जानकारी तैयार रखनी चाहिए। इनका मिलान एआईएस और बैंक रिकॉर्ड से करना जरूरी है। इसी तरह, किराये से आय पाने वाले प्रॉपर्टी मालिकों को रेंट एग्रीमेंट, नगर निगम टैक्स की रसीद, प्रॉपर्टी के मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज और होम लोन के ब्याज का सर्टिफिकेट संभालकर रखना चाहिए।

टैक्सपेयर्स को लागू होने पर टैक्स ऑडिट रिपोर्ट, फॉर्म 10-आईईए की अनॉलेजमेंट और विभिन्न डिडक्शन का दावा करने के समर्थन में जरूरी दस्तावेज भी तैयार रखने चाहिए। रिटर्न दाखिल करते समय जल्दबाजी के बजाय एआईएस, टीआईएस, फॉर्म 26एएस , बैंक स्टेटमेंट और अन्य रिकॉर्ड को अच्छी तरह मिलाना जरूरी है।

इसके अलावा, इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने से पहले सबसे महत्वपूर्ण बात सही आईटीआर फॉर्म का चुनाव करना है। गलत फॉर्म में रिटर्न दाखिल करने पर बाद में परेशानी हो सकती है। इसलिए अपनी आय के स्रोत, बिजनेस या प्रोफेशन की प्रकृति, कैपिटल गेन्स, विदेशी संपत्ति, शेयर बाजार की ट्रेडिंग और लागू टैक्स व्यवस्था को ध्यान में रखकर ही आईटीआर-3 या आईटीआर-4 का चुनाव करें। 

इसके साथ ही विशेषज्ञों का कहना हैं कि आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर कई जानकारियां पहले से भरी हुई मिलती हैं, लेकिन उन्हें बिना जांचे स्वीकार नहीं करना चाहिए। रिटर्न जमा करने के बाद ई-सत्यापन पूरा करना भी जरूरी है।

जटिल आय या कई स्रोतों से कमाई होने की स्थिति में रिटर्न दाखिल करने से पहले चार्टर्ड अकाउंटेंट या योग्य टैक्स एक्सपर्ट की सलाह लेना भी उपयोगी हो सकता है।

  इनपुट : आईएएनएस

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