उच्च शिक्षा में भारत की बड़ी छलांग, एक दशक में नामांकन 4.50 करोड़ तक पहुंचा; छात्राओं की भागीदारी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी

Aug 31, 2026 - 11:18
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उच्च शिक्षा में भारत की बड़ी छलांग, एक दशक में नामांकन 4.50 करोड़ तक पहुंचा; छात्राओं की भागीदारी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी
Higher Education

नई दिल्ली। भारत में उच्च शिक्षा का दायरा लगातार बढ़ रहा है और पिछले एक दशक में इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। एक आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, वर्ष 2014-15 में 3.42 करोड़ छात्रों का उच्च शिक्षा संस्थानों में नामांकन था, जो बढ़कर 2023-24 में 4.50 करोड़ हो गया, जो लगभग 31.5 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। 

उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) भी लगातार बेहतर हुआ है। वर्ष 2014-15 में जीईआर 23.7 प्रतिशत था, जो 2022-23 में 29.5 प्रतिशत और 2023-24 में 30 प्रतिशत तक पहुंच गया। यह वृद्धि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी 2020) के उस लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जिसके तहत वर्ष 2035 तक उच्च शिक्षा में जीईआर को 50 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।

शिक्षा मंत्रालय द्वारा प्रतिवर्ष जारी की जाने वाली अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण (एआईएसएचई) रिपोर्ट के अनुसार, देश में उच्च शिक्षा संस्थानों का नेटवर्क भी तेजी से विस्तारित हुआ है। वर्ष 2014-15 में देश में 760 विश्वविद्यालय थे, जिनकी संख्या बढ़कर 2023-24 में 1,289 हो गई, जो लगभग 69.6 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। इसी अवधि में कॉलेजों की संख्या 38,498 से बढ़कर 48,246 हो गई, जो 25.3 प्रतिशत की वृद्धि है। जबकि स्वतंत्र संस्थानों की संख्या 12,276 से बढ़कर 15,221 तक पहुंच गई, जिसमें लगभग 24 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

इस दौरान, महिला शिक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। उच्च शिक्षा में छात्राओं का नामांकन पिछले दस वर्षों में 42.2 प्रतिशत बढ़कर 1.57 करोड़ से 2.24 करोड़ हो गया। यह वृद्धि कुल नामांकन वृद्धि दर से भी अधिक है, जो यह दर्शाती है कि उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है।

इस प्रगति का असर लैंगिक समानता सूचकांक (जीपीआई) में भी दिखाई देता है। वर्ष 2014-15 में जीपीआई 0.92 था, जो बढ़कर 2023-24 में 1.08 हो गया। इसका अर्थ है कि उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी अब पुरुषों के बराबर ही नहीं, बल्कि कई श्रेणियों में उनसे अधिक हो रही है।

सामाजिक रूप से वंचित वर्गों में भी उच्च शिक्षा की पहुंच बढ़ी है। अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग का नामांकन हिस्सा 13.44 प्रतिशत से बढ़कर 15.5 प्रतिशत हो गया। वहीं अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग की हिस्सेदारी 4.8 प्रतिशत से बढ़कर 6.4 प्रतिशत तक पहुंची। अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का नामांकन हिस्सा 32.8 प्रतिशत से बढ़कर 40.1 प्रतिशत हो गया, जो सभी सामाजिक वर्गों में सबसे बड़ी वृद्धि है।

फैक्टशीट में यह भी बताया गया है कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) विषयों में विद्यार्थियों की रुचि लगातार बढ़ रही है। इन क्षेत्रों में नामांकन 91.5 लाख से बढ़कर 1.02 करोड़ हो गया है, जो लगभग 11.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। यह भारत की तकनीकी और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था के विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इनपुट : आईएएनएस

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