रोहित, सूर्या, शुभमन और श्रेयस की सोच 'टीम फर्स्ट' पर आधारित; मुख्य कोच गौतम गंभीर ने की लीडरशिप ग्रुप की जमकर तारीफ
भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने टीम इंडिया के कोर लीडरशिप ग्रुप—रोहित शर्मा, सूर्यकुमार यादव, शुभमन गिल और श्रेयस अय्यर—की खेल भावना और कार्यशैली की खुलकर सराहना की है। एक विस्तृत साक्षात्कार में गंभीर ने कहा कि भारतीय क्रिकेट में व्यक्तिगत उपलब्धियों और व्यक्तिगत रिकॉर्ड्स का दौर अब पीछे छूट चुका है और मौजूदा लीडरशिप ग्रुप की सोच पूरी तरह 'टीम फर्स्ट' (Team First) के सिद्धांत पर केंद्रित है। जानिए टीम कल्चर, कप्तानों के तालमेल और गंभीर के विजन पर पूरी विस्तृत रिपोर्ट।
नई दिल्ली: भारतीय राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने ड्रेसिंग रूम की कार्यसंस्कृति (Team Culture) और नेतृत्व समूह की मानसिकता को लेकर बड़ा बयान दिया है। गंभीर ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि भारतीय टीम के चार प्रमुख स्तंभ—रोहित शर्मा, सूर्यकुमार यादव, शुभमन गिल और श्रेयस अय्यर—पूरी तरह 'टीम फर्स्ट' (Team First) दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रहे हैं और उनके लिए व्यक्तिगत आंकड़े या रिकॉर्ड्स कोई मायने नहीं रखते।
एक विशेष खेल कार्यक्रम के दौरान गंभीर ने कहा कि किसी भी टीम की पहचान उसके लीडर्स की सोच से तय होती है। जब टीम के शीर्ष खिलाड़ी अपने निजी 50 या 100 रनों की चिंता छोड़ केवल इस बात पर ध्यान देते हैं कि टीम को जीत कैसे दिलाई जाए, तभी टीम सही मायने में अजेय बनती है।
'व्यक्तिगत रिकॉर्ड्स का दौर खत्म': गंभीर का दो-टूक रुख
गंभीर ने भारतीय क्रिकेट में लंबे समय से चली आ रही 'माइलस्टोन संस्कृति' पर अपने विचार रखते हुए चारों खिलाड़ियों की भूमिका की सराहना की:
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रोहित शर्मा का निस्वार्थ दृष्टिकोण: गंभीर ने वनडे और टेस्ट में रोहित शर्मा की कप्तानी और उनकी आक्रामक शुरुआत की मिसाल देते हुए कहा कि रोहित ने हमेशा खुद को जोखिम में डालकर टीम के लिए तेज शुरुआत की राह बनाई है। 2023 वनडे वर्ल्ड कप और 2024 टी20 वर्ल्ड कप में उनका अटैकिंग एप्रोच इसका सबसे बड़ा प्रमाण था।
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सूर्यकुमार यादव की बेखौफ कप्तानी: टी20 अंतरराष्ट्रीय प्रारूप में सूर्यकुमार यादव के नेतृत्व पर गंभीर ने कहा कि सूर्या खिलाड़ियों को पूरी आजादी देते हैं। वे मैदान पर खुद भी उसी निडर मानसिकता (Fearless Cricket) के साथ उतरते हैं, जिसकी वे अपने बाकी साथियों से उम्मीद करते हैं।
युवा कप्तानों में वही संस्कार: गिल और श्रेयस
गंभीर ने अगली पीढ़ी के दो सबसे अहम चेहरों—शुभमन गिल और श्रेयस अय्यर—के नेतृत्व गुणों को भी सराहा:
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शुभमन गिल की परिपक्वता: टीम के उप-कप्तान के रूप में शुभमन गिल ने खेल की परिस्थितियों को पढ़ना और टीम के लक्ष्य के अनुसार अपनी भूमिका में बदलाव करना बखूबी सीखा है। उनमें टीम को एकजुट रखने और दबाव में फैसले लेने की क्षमता है।
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श्रेयस अय्यर का रणनीतिक लचीलापन: आईपीएल में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) को अपनी कप्तानी में चैंपियन बनाने वाले श्रेयस अय्यर के साथ गंभीर का तालमेल बेहद करीबी रहा है। गंभीर ने कहा कि श्रेयस किसी भी बैटिंग नंबर पर खेलने को तैयार रहते हैं और दबाव की स्थिति में हमेशा टीम की जरूरत को आगे रखते हैं।
कोर लीडरशिप का तुलनात्मक प्रभाव
| खिलाड़ी | टीम में मुख्य भूमिका | गंभीर के अनुसार सबसे बड़ी ताकत |
| रोहित शर्मा | टेस्ट और वनडे कप्तान | निस्वार्थ शुरुआत, ड्रेसिंग रूम में स्पष्टता और खुला माहौल |
| सूर्यकुमार यादव | टी20 कप्तान | आक्रामक खेल शैली और साथियों को पूरी आजादी देना |
| शुभमन गिल | तीनों प्रारूपों में कोर बल्लेबाज / उप-कप्तान | दबाव झेलने की क्षमता और खेल की गहरी समझ |
| श्रेयस अय्यर | मध्यक्रम के आधार / रणनीतिक लीडर | परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालना और टीम के लिए जोखिम लेना |
'ड्रेसिंग रूम का माहौल ही तय करता है परिणाम'
मुख्य कोच ने निष्कर्ष निकालते हुए कहा कि एक कोच केवल रणनीति बना सकता है, लेकिन उस रणनीति को मैदान पर लागू करने का काम मैदान पर खड़े खिलाड़ियों और कप्तानों का होता है।
गंभीर ने कहा, "जब आपके शीर्ष चार अगुआ यह सोचने लगें कि 'मैं नहीं, हम जीतेंगे', तो कोच का काम बहुत आसान हो जाता है। रोहित, सूर्या, शुभमन और श्रेयस—इन चारों में यही एक समान खूबी है। वे ड्रेसिंग रूम में जीत की जो भूख पैदा कर रहे हैं, वही भविष्य के बड़े आईसीसी टूर्नामेंटों में भारतीय क्रिकेट को सफलता के नए शिखर पर ले जाएगी।"
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