खाद्यान्न उत्पादन 376.5 मिलियन टन रहने का अनुमान, मजबूत विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण ढांचे से मिल रहा सपोर्ट

Sep 03, 2026 - 15:24
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खाद्यान्न उत्पादन 376.5 मिलियन टन रहने का अनुमान, मजबूत विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण ढांचे से मिल रहा सपोर्ट
Food Grain Production

नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2025-26 के तीसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, देश में कुल खाद्यान्न उत्पादन 376.563 मिलियन टन रहने का अनुमान है। यह पिछले वर्ष के 357.732 मिलियन टन उत्पादन की तुलना में करीब 18.8 मिलियन टन यानी 5.3 प्रतिशत अधिक है। यह जानकारी एक आधिकारिक फैक्टशीट में गुरुवार को दी गई। 

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत भारत दुनिया के सबसे बड़े खाद्य सुरक्षा कार्यक्रमों में से एक को संचालित करता है, जिसके दायरे में करीब 80 करोड़ लोग आते हैं।

फैक्टशीट में कहा गया, “भारत में कृषि उत्पादन और खाद्य सुरक्षा प्रयासों के विस्तार के साथ देशभर में विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण ढांचे का महत्व बढ़ गया है। सहकारी क्षेत्र में 2023 में शुरू की गई विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना ने प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पीएसीएस) के माध्यम से भंडारण, प्रसंस्करण, खरीद और वितरण प्रणालियों को बेहतर बनाने में मदद की है।”

इस योजना को संस्थागत समन्वय और वित्तीय सहायता तंत्र के माध्यम से समर्थन दिया जा रहा है।

9,750 मिलियन टन भंडारण क्षमता वाले 11 राज्यों में पायलट परियोजनाओं से शुरू हुई यह पहल लगातार विस्तार कर रही है।

फैक्टशीट के अनुसार, जुलाई 2026 तक देशभर में 313 पीएसीएस में गोदामों का निर्माण पूरा हो चुका था, जिससे 1.80 लाख टन (एलएमटी) से अधिक की भंडारण क्षमता तैयार हुई है। इस ढांचे में गुणवत्ता मानकों, पारदर्शिता और संचालन की व्यवहार्यता पर भी जोर दिया गया है।

सहकारी क्षेत्र में विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना का उद्देश्य खाद्यान्न की बर्बादी को कम करना और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना, किसानों को संकट में बिक्री से बचने और बेहतर कीमत प्राप्त करने के लिए अधिक लचीलापन देना,खरीद केंद्रों, गोदामों और उचित मूल्य दुकानों के बीच परिवहन लागत कम करना और कृषि गतिविधियों में विविधता लाकर प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पीएसीएस) की भूमिका का विस्तार करना है।

यह योजना किसानों के लिए अधिक आय के अवसर पैदा करने में भी मदद करती है।

पायलट परियोजनाओं को महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, तमिलनाडु, तेलंगाना, असम, कर्नाटक और त्रिपुरा में लागू किया गया।

फैक्टशीट में कहा गया है कि इन पायलट परियोजनाओं ने महत्वपूर्ण परिचालन आधार तैयार किया है और सहकारी स्तर पर स्थानीय भंडारण ढांचे की व्यवहार्यता को प्रदर्शित किया है।

इनपुट : आईएएनएस

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